NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ (NALSAR Law University) का पूरा नाम नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ है.भारत के प्रमुख राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों में शामिल है. यह एक सार्वजनिक कानून विश्वविद्यालय है, जो तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद के शमीरपेट क्षेत्र में स्थित है.
NALSAR की स्थापना कानूनी शिक्षा और कानून से जुड़े अध्ययन व शोध को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई थी. विश्वविद्यालय में पांच वर्षीय इंटीग्रेटेड अंडरग्रेजुएट लॉ कोर्स, पोस्टग्रेजुएट लॉ कोर्स और डॉक्टरेट स्तर के कार्यक्रम संचालित किए जाते हैं. यहां स्नातक स्तर के कानून पाठ्यक्रम में प्रवेश राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश प्रक्रिया के माध्यम से होता है.
विश्वविद्यालय का परिसर करीब 55 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है. कैंपस को अलग-अलग हिस्सों में बांटा गया है, जिनमें प्रशासनिक ब्लॉक, अकादमिक ब्लॉक, आवासीय क्षेत्र, स्टेडियम और डाइनिंग हॉल शामिल हैं. अकादमिक ब्लॉक में कक्षाओं के अलावा कॉन्फ्रेंस हॉल, पुस्तकालय, इंटरनेट सेंटर, मूट कोर्ट हॉल और विभिन्न रिसर्च सेंटर मौजूद हैं.
छात्रों के रहने के लिए परिसर में लड़कों और लड़कियों के अलग-अलग हॉस्टल बनाए गए हैं. कैंपस में एक ऑडिटोरियम भी है, जिसमें लगभग 500 लोगों के बैठने की व्यवस्था है. विश्वविद्यालय परिसर वाई-फाई नेटवर्क से जुड़ा हुआ है.
परिसर में कीर्ति स्तंभ और फ्रांसीसी मूर्तिकार ऑगस्टे रोडिन की प्रसिद्ध मूर्ति ‘द थिंकर’ की प्रतिकृति भी स्थापित है. NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ कानूनी शिक्षा, शोध और विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियों के लिए देश के चर्चित कानून विश्वविद्यालयों में शामिल है.
बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने हैदराबाद की NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के 2026 बैच के छात्रों के एडवोकेट के तौर पर एनरोलमेंट पर लगी रोक वापस ले ली है.
सुप्रीम कोर्ट ने हैदराबाद की NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के 2026 बैच के छात्रों के वकालत पंजीकरण पर बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) द्वारा लगाए गए रोक आदेश को रद्द कर दिया है. मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने BCI की कार्रवाई को अनुचित और गैर-जरूरी बताया और छात्रों के शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराने के अधिकार की पुष्टि की.