मूंग दाल (Moong Dal) भारतीय भोजन का एक आम हिस्सा है. यह मूंग के बीज से तैयार की जाती है और घरों में इसे कई तरह से इस्तेमाल किया जाता है. मूंग की फलियां पौधे पर लगती हैं और उनके अंदर छोटे हरे रंग के दाने होते हैं. इन्हीं दानों को साफ करके और अलग-अलग तरीके से संसाधित करके मूंग दाल तैयार की जाती है.
मूंग दाल मुख्य रूप से दो रूपों में बाजार में मिलती है. साबुत मूंग में दाने का हरा छिलका मौजूद रहता है, जबकि धुली मूंग दाल में छिलका हटा दिया जाता है. बाजार में पीली धुली मूंग दाल भी आसानी से मिलती है. इसके अलावा हरी मूंग दाल का इस्तेमाल भी कई व्यंजनों में किया जाता है.
मूंग दाल से घरों में दाल, खिचड़ी, चीला, हलवा और कई तरह के नाश्ते तैयार किए जाते हैं. अंकुरित मूंग का इस्तेमाल सलाद और दूसरे घरेलू व्यंजनों में भी किया जाता है. अलग-अलग क्षेत्रों में मूंग दाल को स्थानीय स्वाद और मसालों के अनुसार पकाने का तरीका अलग हो सकता है.
मूंग की खेती भारत के कई हिस्सों में की जाती है. राजस्थान, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में इसकी खेती होती है. इसकी फसल के लिए गर्म मौसम को उपयुक्त माना जाता है. मूंग की खेती खरीफ के साथ-साथ कुछ क्षेत्रों में गर्मी के मौसम में भी की जाती है.
बाजार में मूंग दाल अलग-अलग पैकिंग और मात्रा में उपलब्ध होती है. इसे खरीदते समय दाल के दानों का रंग, साफ-सफाई और पैकेट की स्थिति देखी जा सकती है. घर में मूंग दाल को सूखी और साफ जगह पर बंद डिब्बे में रखना आम तरीका है.
भारतीय रसोई में मूंग दाल का इस्तेमाल लंबे समय से होता रहा है. साधारण घरेलू भोजन से लेकर अलग-अलग पारंपरिक पकवानों तक, इसका उपयोग कई प्रकार से किया जाता है. यही वजह है कि मूंग दाल भारतीय खाद्य सामग्री में एक जाना-पहचाना नाम है.