मिल्कशेक (Milkshake) एक ठंडा पेय है, जिसे आमतौर पर दूध, फल, आइसक्रीम, चीनी या दूसरे स्वाद वाले पदार्थों को मिलाकर तैयार किया जाता है. इसे घर पर बनाने के साथ-साथ कैफे, रेस्टोरेंट और फूड आउटलेट्स में भी परोसा जाता है. मिल्कशेक का स्वाद इस्तेमाल की गई सामग्री के हिसाब से अलग-अलग हो सकता है.
मिल्कशेक बनाने का सबसे सामान्य तरीका दूध और किसी फल या फ्लेवर को ब्लेंड करना है. इसमें केला, आम, स्ट्रॉबेरी, चॉकलेट, वनीला, कॉफी और ड्राई फ्रूट जैसे कई विकल्प इस्तेमाल किए जाते हैं. कुछ मिल्कशेक में आइसक्रीम या व्हिप्ड क्रीम भी डाली जाती है. वहीं घर पर बनाए जाने वाले मिल्कशेक में लोग अपनी पसंद के अनुसार चीनी, शहद या अन्य सामग्री का इस्तेमाल करते हैं.
मिल्कशेक का इतिहास अमेरिका और यूरोप में विकसित हुए डेयरी आधारित पेय पदार्थों से जुड़ा माना जाता है. शुरुआती दौर में मिल्कशेक आज के मुकाबले अलग तरीके से तैयार किए जाते थे. समय के साथ ब्लेंडर और आधुनिक फूड प्रोसेसिंग तकनीकों के इस्तेमाल से इसे तैयार करना आसान हुआ और अलग-अलग फ्लेवर लोकप्रिय होते गए.
भारत में मिल्कशेक खास तौर पर गर्मी के मौसम में पसंद किया जाता है. आम, केला, चीकू, स्ट्रॉबेरी और पपीते जैसे फलों से तैयार मिल्कशेक कई जगहों पर आसानी से मिल जाते हैं. शहरों में कैफे और रेस्टोरेंट्स ने मिल्कशेक को कई नए फ्लेवर और अलग-अलग सर्विंग स्टाइल के साथ पेश किया है.
मिल्कशेक की एक खास बात यह है कि इसे मौसम और उपलब्ध सामग्री के अनुसार अलग-अलग तरीके से बनाया जा सकता है. घर पर इसे तैयार करने के लिए आमतौर पर ठंडा दूध, फल या फ्लेवर और ब्लेंडर की जरूरत होती है. सामग्री को अच्छी तरह ब्लेंड करने के बाद इसे तुरंत परोसा जाता है.
आज मिल्कशेक केवल एक घरेलू पेय नहीं है, बल्कि डेयरी और फूड सर्विस इंडस्ट्री का भी हिस्सा है. बाजार में रेडी-टू-ड्रिंक मिल्कशेक, पैक्ड मिल्कशेक और अलग-अलग फ्लेवर वाले इंस्टेंट मिक्स भी उपलब्ध हैं. बदलती पसंद के साथ मिल्कशेक की रेसिपी और इसके फ्लेवर में भी लगातार बदलाव देखने को मिलते हैं.