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मसूर

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मसूर दाल (Masoor Dal) भारतीय रसोई में इस्तेमाल होने वाली प्रमुख दालों में से एक है. यह मसूर नाम के पौधे के बीज से तैयार की जाती है. भारत के अलग-अलग हिस्सों में इसे रोजमर्रा के भोजन में शामिल किया जाता है. मसूर दाल को आमतौर पर लाल, नारंगी या भूरे रंग के रूप में देखा जाता है.

मसूर का पौधा एक दलहनी फसल है. इसकी खेती मुख्य रूप से ठंडे मौसम में की जाती है. भारत में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में मसूर की खेती होती है. इसकी बुवाई आमतौर पर रबी के मौसम में की जाती है और फसल की कटाई वसंत ऋतु के आसपास होती है.

मसूर दाल बाजार में अलग-अलग रूपों में मिलती है. लाल मसूर दाल को अक्सर छिलका हटाकर और दो हिस्सों में विभाजित करके बेचा जाता है. साबुत मसूर दाल का रंग भूरा या गहरा होता है और इसमें बाहरी छिलका मौजूद रहता है. दाल के प्रकार के अनुसार इसका रंग, आकार और पकने का समय अलग हो सकता है.

भारतीय घरों में मसूर दाल से कई तरह के व्यंजन बनाए जाते हैं. इसे सामान्य दाल की तरह पकाया जाता है और इसमें नमक, हल्दी, जीरा, हींग, लहसुन या अन्य मसालों का इस्तेमाल किया जाता है. कई जगहों पर मसूर दाल का इस्तेमाल खिचड़ी, दाल तड़का और दूसरे पारंपरिक व्यंजनों में भी किया जाता है.

मसूर दाल को पकाने से पहले आमतौर पर साफ करके धोया जाता है. साबुत मसूर को कुछ समय के लिए पानी में भिगोया भी जा सकता है. इसके बाद इसे बर्तन या प्रेशर कुकर में पानी के साथ पकाया जाता है. मसूर दाल को किराना दुकानों के अलावा सुपरमार्केट और ऑनलाइन माध्यमों से भी खरीदा जा सकता है.

मसूर दाल की कीमत उसकी किस्म, गुणवत्ता, पैकेजिंग और बाजार की स्थिति के अनुसार अलग-अलग हो सकती है. इसे खुले रूप में और पैकेट में दोनों तरह से बेचा जाता है. घरों में इसे लंबे समय तक रखने के लिए सूखी और साफ जगह पर रखा जाता है.
 

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