जयनगर (Jaynagar) पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में स्थित एक शहर और नगरपालिका क्षेत्र है. यह कोलकाता के दक्षिणी हिस्से के करीब बसा हुआ है और ग्रेटर कोलकाता के शहरी क्षेत्र का हिस्सा माना जाता है. यह इलाका कोलकाता मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी यानी KMDA के अंतर्गत भी आता है. जयनगर मजिलपुर अपने प्रसिद्ध जयनगर के मोआ के लिए भी जाना जाता है.
जयनगर और मजिलपुर दो पुराने इलाकों से मिलकर बना शहर है. जयनगर का नाम स्थानीय देवी जॉयचंडी से जुड़ा माना जाता है. पुराने समय में इसे जॉयचंडीतला और जॉयचंडीनगर जैसे नामों से भी जाना जाता था. बाद में इसका नाम जयनगर हो गया. मजिलपुर के नाम को आदि गंगा के पुराने प्रवाह और वहां जमा हुई मिट्टी से जोड़ा जाता है. बंगाली भाषा में मिट्टी के जमने की प्रक्रिया को मोजे जाओआ कहा जाता है. इसी से आगे चलकर मजिलपुर नाम बनने की बात कही जाती है.
इस क्षेत्र का इतिहास काफी पुराना है. प्राचीन समय में भागीरथी की पुरानी धारा के किनारे कई जनपद बसे थे. इनमें कालीघाट, बोराल, राजपुर, हरिनावी, महीनगर, बारुईपुर, बहारू, जयनगर और मजिलपुर जैसे इलाके शामिल थे. कवि बिप्रदास पिपिलाई की 1495 में रची गई रचना मनसाविजय में जयनगर का उल्लेख मिलता है.
एक समय आदि गंगा की धारा जयनगर और मजिलपुर के बीच से होकर गुजरती थी. बाद में नदी की धारा कमजोर होती गई और इसका पुराना मार्ग कई स्थानों पर तालाबों और जलाशयों के रूप में दिखाई देने लगा. इस क्षेत्र का संबंध सुंदरबन के आसपास के पुराने इलाकों से भी रहा है.
जयनगर के इतिहास में मोटिलाल परिवार का नाम मिलता है. स्थानीय परंपरा के अनुसार जॉयचंडी देवी की मूर्ति से जुड़ी एक धार्मिक कथा भी इस परिवार से जुड़ी है. बाद में सेन और मित्र परिवार भी यहां बसे. मित्र परिवार से जुड़े राधाबल्लभ मंदिर और द्वादश शिव मंदिर आज भी इस क्षेत्र के पुराने धार्मिक स्थलों में गिने जाते हैं.
मजिलपुर में दत्त, उद्गाता और पोता परिवारों के बसने के बाद क्षेत्र का विकास हुआ. यहां धन्वंतरि काली मंदिर भी ऐतिहासिक धार्मिक स्थल के रूप में जाना जाता है. हर साल बैसाख महीने में यहां पखवाड़े भर चलने वाला बेश मेला आयोजित किया जाता है.
जयनगर मजिलपुर का संबंध बंगाल के साहित्य, संगीत, चिकित्सा और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े कई लोगों से भी रहा है. शिवनाथ शास्त्री, नीलरतन सरकार, शक्ति चट्टोपाध्याय, हेमंत कुमार और निर्मला मिश्रा जैसे नाम इस क्षेत्र से जुड़े रहे हैं. स्वतंत्रता आंदोलन के क्रांतिकारी कनाइलाल भट्टाचार्य का भी संबंध जयनगर मजिलपुर से रहा है.
आज जयनगर मजिलपुर दक्षिण 24 परगना का एक प्रमुख शहरी क्षेत्र है, जहां पुराने इतिहास, धार्मिक परंपराओं और आधुनिक शहरी जीवन का मेल दिखाई देता है.