हरचंदपुर (Harchandpur) उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले में स्थित एक गांव और सामुदायिक विकास खंड है. यह बैंती नदी के किनारे बसा है, जो सई नदी की सहायक नदी है. हरचंदपुर जिला मुख्यालय से उत्तर-पूर्व दिशा में लखनऊ जाने वाली सड़क पर स्थित है. रेलवे आने के बाद से इस इलाके का व्यापारिक महत्व लगातार बढ़ा और आज भी हरचंदपुर आसपास के क्षेत्र के लिए एक प्रमुख कारोबारी केंद्र माना जाता है.
हरचंदपुर के इतिहास की बात करें तो इसकी स्थापना नाभ राय ने की थी. नाभ राय कायस्थ थे और बैस राजा तिलोक चंद के दीवान के रूप में काम करते थे. बताया जाता है कि उन्होंने अपने बेटे हर चंद के नाम पर इस जगह का नाम हरचंदपुर रखा था. हर चंद को संवत 1350 में गोद लिया गया था. नाभ राय के वंशज आज भी हरचंदपुर में प्रमुख जमीन मालिकों में शामिल बताए जाते हैं.
हरचंदपुर के विकास में रेलवे की भूमिका काफी महत्वपूर्ण रही है. 1800 के दशक में अवध और रोहिलखंड रेलवे के शुरू होने के बाद यहां व्यापारिक गतिविधियों में तेजी आई. रेलवे की मुख्य लाइन कस्बे से होकर गुजरती थी और हरचंदपुर रेलवे स्टेशन स्थानीय सामान को दूसरे इलाकों तक पहुंचाने का प्रमुख केंद्र बन गया. यहां से अनाज, खाल और तिलहन जैसे सामान बाहर भेजे जाते थे.
रेलवे स्टेशन शुरू होने के बाद हरचंदपुर में बाजार गतिविधियां भी बढ़ीं. 1894 में रघुवीरगंज बाजार की स्थापना ठाकुराइन उदयराज कुंवर ने कराई थी. इसका नाम उनके दिवंगत पति रघुबर बख्श सिंह के नाम पर रखा गया था, जो हसनापुर के तालुकेदार थे. 1905 तक रघुवीरगंज बाजार को रायबरेली तहसील के प्रमुख बाजारों में गिना जाने लगा था.
उस दौर में हरचंदपुर में डाकघर, पशु बांधने के लिए कांजी हाउस और एक बड़ा प्राथमिक विद्यालय भी मौजूद था. उत्तर-पश्चिम दिशा में जाने वाली सड़क पर एक सैन्य शिविर भी था. 1901 में हरचंदपुर की आबादी 1,457 दर्ज की गई थी. उस समय यहां ब्राह्मण, बनिया, मुस्लिम और अन्य समुदायों के लोग रहते थे.
आज हरचंदपुर अपने ऐतिहासिक महत्व के साथ रायबरेली जिले के ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्र के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में जाना जाता है. रेलवे, सड़क संपर्क, स्थानीय बाजार और आसपास की ग्राम पंचायतों से जुड़ाव ने इसके विकास में अहम भूमिका निभाई है. इसका इतिहास यह दिखाता है कि किस तरह परिवहन सुविधाओं और व्यापार ने एक छोटे से क्षेत्र को धीरे-धीरे स्थानीय केंद्र के रूप में विकसित किया.