के. एस. ईश्वरप्पा (K. Sharanappa Eshwarappa) भारतीय राजनेता हैं. छात्र जीवन के दौरान वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से जुड़े और बाद में निजी व्यवसाय भी शुरू किया.
उनका जन्म 10 जून 1948 को कर्नाटक के बेल्लारी में हुआ था. उनके पिता का नाम शरणप्पा और माता का नाम बसम्मा था. 1950 के दशक की शुरुआत में उनका परिवार शिमोगा (वर्तमान शिवमोग्गा) आकर बस गया. उनके माता-पिता रोजाना मजदूरी करके परिवार का पालन-पोषण करते थे. शुरुआती शिक्षा के बाद उन्होंने शिवमोग्गा के नेशनल कॉमर्स कॉलेज से पढ़ाई की.
राजनीतिक जीवन की शुरुआत भारतीय जनसंघ से जुड़कर हुई. वर्ष 1975 से 1977 के आपातकाल के दौरान उन्हें गिरफ्तार कर बेल्लारी जेल में रखा गया था. आपातकाल समाप्त होने के बाद उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) में सक्रिय भूमिका निभाई. वर्ष 1982 में वे शिवमोग्गा शहर भाजपा इकाई के अध्यक्ष बने। इसके बाद उन्होंने संगठन और चुनावी राजनीति दोनों में काम किया.
वर्ष 1989 में उन्होंने शिवमोग्गा विधानसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और पहली बार विधायक चुने गए. इसके बाद वे कई बार इसी सीट से विधानसभा पहुंचे. 1992 में उन्हें कर्नाटक भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया. वर्ष 2000 में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार के दौरान उन्हें केंद्रीय रेशम बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त किया गया.
कर्नाटक की राजनीति में उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं. वे जल संसाधन मंत्री, ऊर्जा मंत्री, प्रमुख सिंचाई एवं जल संसाधन मंत्री और ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज मंत्री रहे. जुलाई 2012 में जगदीश शेट्टार के नेतृत्व वाली सरकार में उन्हें कर्नाटक का उपमुख्यमंत्री बनाया गया. इस दौरान उनके पास राजस्व और ग्रामीण विकास विभाग की जिम्मेदारी भी रही.
वर्ष 2014 से 2018 तक ईश्वरप्पा कर्नाटक विधान परिषद में विपक्ष के नेता रहे. 2018 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने फिर से शिवमोग्गा सीट से जीत दर्ज की. 20 अगस्त 2019 को बी. एस. येदियुरप्पा सरकार में उन्हें ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज मंत्री बनाया गया. बाद में बसवराज बोम्मई सरकार में भी वे कैबिनेट मंत्री रहे.
14 अप्रैल 2022 को एक ठेकेदार की आत्महत्या से जुड़े विवाद के बाद उन्होंने ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. अप्रैल 2023 में उन्होंने विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने का फैसला लिया और पार्टी नेतृत्व को पत्र लिखकर अपने नाम पर विचार न करने का अनुरोध किया.
साल 2024 में लोकसभा चुनाव के दौरान टिकट वितरण को लेकर मतभेद सामने आए. इसके बाद उन्होंने शिवमोग्गा लोकसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने का फैसला किया. इस निर्णय के बाद अप्रैल 2024 में भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें छह वर्ष के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया.
ईश्वरप्पा ने राजनीति से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया था और बेटे को हावेरी से टिकट देने की मांग की थी. लेकिन ऐसा न होने पर वह बागी हो गए और निर्दलीय चुनाव में उतरने का फैसला कर डाला. उन्होंने बीजेपी नेता और पूर्व सीएम बीएस येदियुरप्पा के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की. वह लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण में येदियुरप्पा के बेटे बीवाई राघवेंद्र के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे.
भारतीय जनता पार्टी से बगावत कर केएस ईश्वरप्पा शिवमोग्गा सीट पर चुनावी मैदान में उतर गए हैं. उन्होंने शुक्रवार को निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में अपना नामांकन दाखिल कर दिया है. नामांकन दाखिल कर उन्होंने कर्नाटक के पूर्व सीएम बीएस येदियुरप्पा का बिना नाम लिए निशाना साधा है.
ईश्वरप्पा ने 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले प्रचार के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर का इस्तेमाल किया. इस पर बीजेपी ने आपत्ति जताई और उनसे ऐसा न करने को कहा. इसके बाद ईश्वरप्पा ने स्थानीय कोर्ट में एक कैविएट दायर कर दी. इसमें कहा गया कि उन्हें चुनाव प्रचार के दौरान पीएम मोदी की तस्वीर का इस्तेमाल करने से नहीं रोका जाना चाहिए क्योंकि "मोदी हमारे नेता हैं".
कर्नाटक बीजेपी के वरिष्ठ नेता के. ए. ईश्वरप्पा ने कांग्रेस को लेकर विवादित बयान दिया है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस हिंदुओं से नफरत करती है जबकि मुस्लिम उसके लिए ससुराल के परिवार की तरह है. उन्होंने मंदिर और मस्जिद को लेकर भी विवादित बयान दिया.