डूरंड कप, जिसे इंडियनऑयल डूरंड कप भी कहा जाता है, भारत का एक प्रतिष्ठित फुटबॉल टूर्नामेंट है. इसकी शुरुआत साल 1888 में हिमाचल प्रदेश के शिमला स्थित अन्नाडेल में हुई थी. यह एशिया का सबसे पुराना मौजूदा क्लब फुटबॉल टूर्नामेंट माना जाता है. साथ ही, यह दुनिया की सबसे पुरानी राष्ट्रीय फुटबॉल प्रतियोगिताओं में भी शामिल है.
डूरंड कप का आयोजन डूरंड फुटबॉल टूर्नामेंट सोसाइटी और ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन यानी एआईएफएफ की ओर से किया जाता है. आज यह टूर्नामेंट भारतीय फुटबॉल सीजन की शुरुआत का संकेत माना जाता है. इसमें देश के प्रमुख क्लबों के साथ भारतीय सशस्त्र बलों की अलग-अलग टीमों को भी खेलने का मौका मिलता है. इससे टूर्नामेंट की पुरानी सैन्य परंपरा आज भी कायम है.
डूरंड कप की शुरुआत ब्रिटिश राज के दौरान हुई थी. इसका नाम इसके संस्थापक सर हेनरी मोर्टिमर डूरंड के नाम पर रखा गया. हेनरी डूरंड 1884 से 1894 तक ब्रिटिश राज में विदेश सचिव रहे थे. साल 1888 में बीमारी से उबरने के दौरान वह शिमला में थे. इसी दौरान उन्हें खेलों की अहमियत का एहसास हुआ. उनका मानना था कि खेल लोगों को स्वस्थ रखने के साथ-साथ अनुशासन और प्रतिस्पर्धा की भावना भी बढ़ाते हैं. इसी सोच के साथ उन्होंने भारत में फुटबॉल प्रतियोगिता के लिए पुरस्कार शुरू किया.
शुरुआत में डूरंड कप मुख्य रूप से भारतीय सशस्त्र बलों की अलग-अलग रेजिमेंट और विभागों के बीच खेला जाता था. इसमें तत्कालीन रियासतों की टीमें भी हिस्सा लेती थीं. समय के साथ यह प्रतियोगिता भारतीय फुटबॉल के सबसे चर्चित टूर्नामेंटों में शामिल हो गई.
डूरंड कप की शुरुआत शिमला से हुई, लेकिन साल 1940 में इसके आयोजन स्थल को नई दिल्ली स्थानांतरित कर दिया गया. इसके बाद दिल्ली इस टूर्नामेंट का प्रमुख केंद्र बन गया. आज भी डूरंड कप भारतीय फुटबॉल के इतिहास और सेना की खेल परंपरा से गहराई से जुड़ा हुआ है.
आजादी के बाद भी सेना की भागीदारी टूर्नामेंट में बनी रही. अलग-अलग सैन्य रेजिमेंट की टीमें बतौर आमंत्रित टीम इसमें हिस्सा लेती रही हैं. साल 2016 में आर्मी ग्रीन डूरंड कप जीतने वाली आखिरी सेना की टीम बनी.
एक समय ऐसा भी आया जब फेडरेशन कप की शुरुआत के बाद डूरंड कप की भूमिका काफी हद तक आमंत्रण आधारित और प्रदर्शनी टूर्नामेंट जैसी रह गई थी. हालांकि 2022 से इसमें बड़ा बदलाव देखने को मिला. इंडियन सुपर लीग और अधिकांश आई-लीग क्लबों की भागीदारी शुरू हुई, जिससे टूर्नामेंट का रोमांच और प्रतिस्पर्धा दोनों बढ़े.
आज डूरंड कप भारतीय फुटबॉल सीजन के पर्दा उठाने वाले टूर्नामेंट के तौर पर जाना जाता है. हालांकि देश की प्रमुख घरेलू कप प्रतियोगिता का दर्जा और एएफसी चैंपियंस लीग टू में स्थान सुपर कप से जुड़ा है.
लगभग डेढ़ सदी के सफर में डूरंड कप ने भारतीय फुटबॉल के कई दौर देखे हैं. शिमला के मैदान से शुरू हुआ यह टूर्नामेंट आज भारतीय फुटबॉल की परंपरा, इतिहास और आधुनिक क्लब फुटबॉल के बीच एक मजबूत कड़ी बन चुका है.