सुप्रीम कोर्ट बुधवार को पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई करेगा. इनमें पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की याचिका भी शामिल है. सूत्रों के मुताबिक, ममता बनर्जी स्वयं इस अहम सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत में उपस्थित रह सकती हैं. सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली शामिल हैं, इस मामले की सुनवाई करेगी.
शीर्ष अदालत ममता बनर्जी के अलावा मोस्तारी बानो और तृणमूल कांग्रेस के सांसदों डेरेक ओ’ब्रायन और डोला सेन द्वारा दायर याचिकाओं पर भी विचार करेगी. सूत्रों ने बताया कि कानून की पढ़ाई कर चुकीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अदालत में अपनी दलीलें स्वयं रख सकती हैं. टीएमसी सूत्रों ने भी उनके सुनवाई में शामिल होने की संभावना की पुष्टि की है. इससे पहले 19 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर प्रक्रिया को लेकर कई निर्देश जारी किए थे और कहा था कि यह प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और आम लोगों को किसी तरह की असुविधा नहीं होनी चाहिए.
SIR पर पिछली सुनवाई में क्या हुआ?
अदालत ने निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया था कि ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ सूची में शामिल मतदाताओं के नाम ग्राम पंचायत भवनों और ब्लॉक कार्यालयों में प्रदर्शित किए जाएं, जहां दस्तावेज और आपत्तियां भी जमा की जा सकें. अदालत ने यह भी नोट किया था कि राज्य में करीब 1.25 करोड़ मतदाताओं के नाम ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ सूची में हैं. इसमें 2002 की मतदाता सूची से मिलान के दौरान माता-पिता के नाम में असंगति या मतदाता और उसके माता-पिता की आयु में 15 वर्ष से कम या 50 वर्ष से अधिक का अंतर जैसी विसंगतियां शामिल हैं.
People's Advocate Vs Devil's Advocate. pic.twitter.com/D9PUyjkeDY
— All India Trinamool Congress (@AITCofficial) February 3, 2026
ममता बनर्जी ने 28 जनवरी को अपनी याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने चुनाव आयोग और पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को पक्षकार बनाया है. इससे पहले उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर एसआईआर को मनमाना और खामियों से भरा बताते हुए इसे रोकने की मांग की थी. उन्होंने चेतावनी दी थी कि मौजूदा स्वरूप में एसआईआर जारी रहने से बड़े पैमाने पर लोगों को मताधिकार से वंचित किए जाने का खतरा है, जो लोकतंत्र की नींव पर प्रहार करेगा.
टीएमसी सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने भी एसआईआर में कथित मनमानी और प्रक्रियागत खामियों को लेकर आवेदन दायर किया है, जिसमें चुनाव आयोग पर बिना लिखित आदेश के अनौपचारिक माध्यमों से निर्देश जारी करने का आरोप लगाया गया है. याचिका में यह भी मांग की गई है कि सभी दावों, आपत्तियों और सुनवाई के निपटारे के बाद ही अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाए.