अशोक सिद्धार्थ (Ashok Siddharth) बहुजन समाज पार्टी के पूर्व सदस्य हैं. वे बसपा की राजनीति में लंबे समय तक जुड़े रहे. पेशे से वे डॉक्टर रहे और बाद में सक्रिय राजनीति में आए. उत्तर प्रदेश की राजनीति में उनकी पहचान बसपा प्रमुख मायावती के करीबी नेताओं में हुई.
वे मायावती के भतीजे आकाश आनंद के ससुर हैं. 2025 में पार्टी से निष्कासन के बाद उन्होंने सार्वजनिक रूप से माफी मांगी थी, जिसके बाद मायावती ने उन्हें फिर पार्टी में शामिल कर लिया था.
अगस्त 2026 में मायावती ने उन्हें दोबारा बसपा से निष्कासित कर दिया. इसके बाद 11 सितंबर 2026 में उन्होंने राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा की. उनके इस फैसले को आकाश आनंद के राजनीतिक भविष्य से भी जोड़कर देखा गया.
अशोक सिद्धार्थ ने मेडिकल क्षेत्र से अपने करियर की शुरुआत की थी. उपलब्ध प्रोफाइल के अनुसार उन्होंने महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज से ऑप्थैल्मिक यानी नेत्र चिकित्सा से जुड़ा डिप्लोमा किया. इसके बाद उन्होंने बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से एमए की पढ़ाई भी की. राजनीति में आने के बाद उन्होंने बसपा के संगठन में अपनी जगह बनाई और धीरे-धीरे पार्टी के भरोसेमंद नेताओं में शामिल हो गए.
सिद्धार्थ 2009 से 2015 तक उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य रहे. इसके बाद साल 2016 में उन्हें बसपा ने राज्यसभा भेजा. 5 जुलाई 2016 से 4 जुलाई 2022 तक वे उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सांसद रहे. 2016 के चुनाव में वे बसपा के उम्मीदवार के तौर पर निर्वाचित हुए थे.
सांसद बनने के बाद अशोक सिद्धार्थ की पार्टी में भूमिका और मजबूत हुई. संगठनात्मक कामकाज और अलग-अलग राज्यों में बसपा के विस्तार की जिम्मेदारियों में भी उनका इस्तेमाल किया गया. 11 जून 2018 को उन्हें आंध्र प्रदेश का पार्टी प्रभारी नियुक्त किया गया था. इस जिम्मेदारी के जरिए उन्हें दक्षिण भारत में बसपा के संगठन को मजबूत करने का काम मिला.
उनकी राजनीतिक पहचान सिर्फ संसद तक सीमित नहीं रही. वे बसपा के संगठनात्मक मामलों में सक्रिय रहने वाले नेताओं में गिने जाते थे. मायावती के करीबी माने जाने के कारण पार्टी के भीतर उनका प्रभाव भी चर्चा में रहा.
BSP के पूर्व नेता अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास लेने के बाद भी मायावती का गुस्सा शांत नहीं हो रहा. उन्होंने आकाश आनंद की सिसायी दूर्दशा के लिए भी अशोक सिद्धार्थ को ही जिम्मेदार ठहराया है.
बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ को निशाने पर लेते हुए सपा और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने विपक्षी दलों द्वारा नीले रंग और अंबेडकरवादी सोच के दिखावे पर सवाल उठाते हुए बसपा से निकाले गए नेताओं को पनाह देने और राजनीतिक षड्यंत्र रचने का आरोप लगाया.
बसपा प्रमुख मायावती के कड़े रुख के बाद पूर्व सांसद अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया है. मायावती की शर्त और भतीजे आकाश आनंद के राजनीतिक भविष्य को ध्यान में रखते हुए उन्होंने यह बड़ा कदम उठाया है, लेकिन उसके बाद भी आकाश को बाहर का रास्ता दिखा दिया.