अनंत नाग (Anant Nag) एक अभिनेता हैं, जिन्होंने मुख्य रूप से कन्नड़ फिल्मों में काम किया है. उनका वास्तविक नाम नागरकट्टे था. अभिनय के लंबे करियर में उन्होंने 300 से अधिक फिल्मों में काम किया है. इनमें 250 से ज्यादा कन्नड़ फिल्में शामिल हैं. इसके अलावा उन्होंने हिंदी, तेलुगु, तमिल, मराठी, मलयालम और अंग्रेजी भाषा की फिल्मों में भी अभिनय किया है.
22 सितंबर 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने एकता नगर, गुजरात में 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में अनंत नाग को दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया.
उनका जन्म 4 सितंबर 1948 को कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले के भटकल तालुक स्थित शिराली में हुआ था. अनंत नाग का बचपन कर्नाटक में बीता. उन्होंने शुरुआती पढ़ाई अज्जरकाड के एक कैथोलिक स्कूल, दक्षिण कन्नड़ के आनंद आश्रम और उत्तर कन्नड़ जिले के चित्रापुर मठ में की. नौवीं कक्षा के बाद उन्हें आगे की पढ़ाई के लिए मुंबई भेजा गया. उन्होंने सेना में जाने की कोशिश भी की थी, लेकिन कम वजन के कारण सेना और कमजोर नजर के कारण वायुसेना में उनका चयन नहीं हो सका.
इसके बाद उनका रुझान मुंबई के रंगमंच की ओर हुआ. उन्होंने करीब पांच वर्षों तक कोंकणी, कन्नड़, मराठी और हिंदी नाटकों में काम किया. इस दौरान उन्होंने सत्यदेव दुबे, गिरीश कर्नाड और अमोल पालेकर जैसे रंगमंच से जुड़े लोगों के साथ काम किया. रंगमंच के अनुभव ने आगे चलकर उनके फिल्मी करियर की नीव तैयार की.
अनंत नाग ने 1973 में कन्नड़ फिल्म संकल्प से फिल्मों में कदम रखा. इसके बाद उन्होंने समानांतर सिनेमा में भी काम किया. श्याम बेनेगल की फिल्म अंकुर से उन्हें इस क्षेत्र में पहचान मिली. उन्होंने श्याम बेनेगल की अंकुर, निशांत, मंथन, भूमिका, कोंडुरा और कलयुग जैसी फिल्मों में अभिनय किया.
कन्नड़ सिनेमा में भी अनंत नाग ने लगातार काम किया. हमसगीत, बयलु दारी, कन्नेश्वर रामा, ना निन्ना बिडलारे, चंदनदा गोम्बे, बेनकिया बले, हेंदथिगे हेलबेड़ी, गणेशन मादुवे और गौरी गणेशा उनकी चर्चित फिल्मों में शामिल हैं. बाद के वर्षों में उन्होंने मुंगारू मले, गोधी बन्ना साधारणा माईकट्टु, राजकुमार, सरकारी हाइ. प्रा. शाले, कासरगोडु, कोडुगे रामन्ना राय, केजीएफ चैप्टर 1, आडुवा गोम्बे, केजीएफ चैप्टर 2 और गालिपट 2 जैसी फिल्मों में भी काम किया.
टेलीविजन पर भी अनंत नाग की मौजूदगी रही है. वह दूरदर्शन की चर्चित श्रृंखला मालगुडी डेज में नजर आए थे. यह श्रृंखला आर. के. नारायण की कहानियों पर आधारित थी और इसका निर्देशन उनके छोटे भाई शंकर नाग ने किया था. शंकर नाग भी अभिनेता और निर्देशक के रूप में कन्नड़ सिनेमा से जुड़े रहे.
अनंत नाग ने 9 अप्रैल 1987 को कन्नड़ अभिनेत्री गायत्री से विवाह किया. अभिनय के अलावा उन्होंने राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभाई. वह विधान परिषद सदस्य और विधायक रहे तथा जे. एच. पटेल सरकार में मंत्री के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली. उन्होंने बेंगलुरु शहरी विकास मंत्री के तौर पर काम किया. वर्ष 2004 में उन्होंने जनता दल सेक्युलर के उम्मीदवार के तौर पर चामराजपेट विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली.
अनंत नाग को छह फिल्मफेयर पुरस्कार दक्षिण और पांच कर्नाटक राज्य फिल्म पुरस्कार मिल चुके हैं. वर्ष 2024 के लिए उन्हें सिनेमा में योगदान के लिए दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया. वर्ष 2025 में उन्हें भारत सरकार की ओर से पद्म भूषण से भी सम्मानित किया गया. अभिनय, रंगमंच, टेलीविजन और राजनीति से जुड़ा उनका सफर कई दशकों में फैला हुआ है.