अजय आलोक (Ajay Alok) एक राजनेता हैं. वह जनता दल यूनाइटेड के पूर्व नेता हैं और भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता हैं. उनका जन्म 1985 में पटना, बिहार में हुआ था और उनका पैतृक संबंध कैमूर जिले के चैनपुर से है.
अजय आलोक ने शुरुआती पढ़ाई पटना के लोयोला हाई स्कूल से की. इसके बाद उन्होंने नई दिल्ली के सीएसकेएम पब्लिक स्कूल से पढ़ाई पूरी की. उन्होंने महाराष्ट्र के कोल्हापुर स्थित डॉ. डीवाई पाटिल एजुकेशन सोसाइटी के मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई की और 1997 में मेडिकल शिक्षा पूरी की.
मेडिकल की पढ़ाई के बाद उन्होंने दिल्ली में डॉक्टर के तौर पर काम किया और बाद में विदेश में भी सेवाएं दीं. 1999 में वह पटना लौट आए. इसके बाद उन्होंने बिहार लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास की और सरकारी डॉक्टर के रूप में भी काम किया. साल 2000 में उन्होंने इंदिरा गोपाल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल सर्विसेज की स्थापना की. 2013 में उन्होंने पटना में उदयन अस्पताल भी शुरू किया.
अजय आलोक ने 2003 में सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया. 2005 के बिहार विधानसभा चुनाव में उन्होंने लोक जनशक्ति पार्टी के टिकट पर चैनपुर सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन जीत नहीं सके. 2010 में उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर इसी सीट से चुनाव लड़ा और दूसरे स्थान पर रहे.
मार्च 2012 में वह नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड में शामिल हुए और प्रवक्ता तथा महासचिव की जिम्मेदारी संभाली. टेलीविजन बहसों में राजनीतिक मुद्दों पर पार्टी का पक्ष रखने के कारण वह राष्ट्रीय स्तर पर पहचाने जाने लगे. 2019 में उन्होंने जेडीयू के प्रवक्ता पद से इस्तीफा दे दिया. 2022 में पार्टी ने उनकी सदस्यता समाप्त कर दी.
28 अप्रैल 2023 को अजय आलोक भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए. इसके बाद वह भाजपा के प्रवक्ता के रूप में राजनीतिक और समाचार चैनलों की बहसों में नजर आने लगे.
अजय आलोक का विवाह डॉक्टर गीतिका कौशिक सिन्हा से हुआ है. उनके दो बच्चे हैं, जिनके नाम कुणाल सिन्हा और मान्या सिन्हा हैं. उनके पिता गोपाल प्रसाद सिन्हा प्रसिद्ध चिकित्सक और पद्मश्री सम्मान प्राप्त व्यक्ति थे, जबकि उनकी मां इंदिरा सिन्हा शिक्षाविद थीं.
जातिगत आरक्षण में बदलाव की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच बीजेपी प्रवक्ता अजय आलोक के बयान ने नई बहस छेड़ दी है. उन्होंने EWS आरक्षण और OBC से जुड़े मोदी सरकार के फैसलों का जिक्र करते हुए आंदोलन की दिशा पर सवाल उठाए. वहीं आरक्षण सुधार के समर्थकों ने पलटवार करते हुए सामान्य वर्ग को भी आरक्षण पर बोलने का अधिकार देने की मांग की है.