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UAE में Amazon AWS डेटा सेंटर पर हमला? आग लगने के बाद किया गया शटडाउन, कई सर्विसेज ठप

वॉर के दौरान आम तौर पर एयरपोर्ट और रिफाइनरी जैसी जगहों को निशाना बनाया जाता है. लेकिन अब डेटा सेंटर सॉफ्ट टारगेट बन गया है. क्योंकि डेटा सेंटर हिट करने का मतलब है इसका सीधा असर दुनिया भर में दिखेगा. बताया जा रहा है कि UAE स्थित Amazon के डेटा सेंटर को नुकसान पहुंचा है.

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AWS places a major strategic bet on agentic AI
AWS places a major strategic bet on agentic AI

अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए अटैक के बाद ईरान लगातार इजरायल सहित मिडिल ईस्ट के अलग-अलग देशों में ड्रोन अटैक कर रहा है. बढ़ते तनाव के बीच खबरें आईं कि UAE और बहरीन में Amazon Web Services यानी AWS के डेटा सेंटर में आग, पावर और कनेक्टिविटी की दिक्कतें देखी गईं. 

रिपोर्ट्स के मुताबिक कुछ सेवाएं प्रभावित हुईं, जिनमें क्लाउड कंप्यूट और डेटाबेस सर्विस शामिल थीं. कंपनी ने घटना की पुष्टि की और बताया कि कुछ AWS सर्विस पर असर पड़ा. यहां अब तक ऑब्जेक्ट हिट जैसे टर्म यूज हो रहे हैं, क्योंकि अभी ये साफ नहीं है कि डायरेक्ट अटैक है या नहीं. 

डेटा सेंटर पर अटैक का क्या असर पड़ेगा?

अब सवाल यह है कि अगर किसी देश या इलाके में डेटा सेंटर पर हमला हो जाए या वह आग, मिसाइल या पावर फेल्योर से प्रभावित हो जाए, तो इसका मतलब क्या होता है?

सबसे पहले समझिए कि डेटा सेंटर क्या है. यह वही जगह है जहां हजारों सर्वर रखे होते हैं. यही सर्वर वेबसाइट, ऐप, बैंकिंग सिस्टम, ई कॉमर्स, सरकारी पोर्टल और कई दूसरे जरूरी सिस्टम को चलाते हैं.

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AWS जैसे क्लाउड प्लेटफॉर्म पर दुनिया की लाखों कंपनियां अपना डेटा और एप्लिकेशन होस्ट करती हैं. अगर इन सर्वरों की पावर चली जाए, नेटवर्क कट जाए या फिजिकल नुकसान हो, तो सीधा असर ऑनलाइन सेवाओं पर दिखता है.

यह भी पढ़ें: ईरान में खामेनेई की आखिर कैसे मिली लोकेशन? US-Israel की टेक्नोलॉजी ने ऐसे किया ट्रैक

वेबसाइट खुलनी बंद हो सकती हैं

जब डेटा सेंटर पर हमला या बड़ी गड़बड़ी होती है, तो सबसे पहले सर्विस आउटेज होता है. इसका मतलब है कि वेबसाइट खुलना बंद हो सकती है, ऐप लॉगिन नहीं करेगा, ऑनलाइन पेमेंट फेल हो सकती है. 

बैंकिंग ट्रांजैक्शन फेल्योर हो सकते हैं

बैंकिंग ट्रांजैक्शन रुक सकते हैं. एयरलाइन टिकटिंग सिस्टम में देरी हो सकती है. कुछ सरकारी डिजिटल सिस्टम भी स्लो या डाउन हो सकते हैं. डेटा सेंटर पर असर का एक बड़ा हिस्सा बैकअप सिस्टम से जुड़ा है. बड़े क्लाउड प्रोवाइडर एक ही डेटा सेंटर पर निर्भर नहीं रहते. वे अलग अलग शहरों और देशों में कई रीजन बनाते हैं. 

अगर एक रीजन में दिक्कत आती है तो ट्रैफिक दूसरे रीजन में भेजा जाता है. लेकिन अगर हमला या पावर फेल्योर बड़े स्तर पर हो, तो रिकवरी में समय लग सकता है.अब सोचिए, युद्ध के समय इसका मतलब क्या है. आज की जंग सिर्फ जमीन और आसमान में नहीं, डिजिटल दुनिया में भी लड़ी जाती है. 

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क्लाउड के जरिए इकॉनमी पर असर

अगर किसी देश के क्लाउड सिस्टम को निशाना बनाया जाए, तो उसकी अर्थव्यवस्था पर तुरंत असर पड़ सकता है. शेयर बाजार, पेमेंट गेटवे, लॉजिस्टिक्स चेन, मीडिया प्लेटफॉर्म सब एक साथ प्रभावित हो सकते हैं. इसे डिजिटल झटका कहा जा सकता है.

अगर डेटा सेंटर फिजिकल अटैक से प्रभावित हो, तो सबसे पहले फायर कंट्रोल सिस्टम चालू होते हैं. सर्वर अपने आप बंद हो सकते हैं ताकि डेटा खराब न हो. 

बैकअप पावर जैसे जनरेटर और UPS तुरंत चालू होते हैं. अगर नेटवर्क कट हो जाए, तो ट्रैफिक दूसरे रूट से भेजा जाता है. लेकिन अगर नुकसान ज्यादा हो, तो इंजीनियरों को साइट पर जाकर सिस्टम ठीक करना पड़ता है.

साइबर अटैक बड़ा खतरा

एक और बड़ा खतरा है साइबर अटैक. कई बार बम या ड्रोन की जरूरत नहीं होती. अगर हैकिंग या मैलवेयर से डेटा सेंटर के कंट्रोल सिस्टम को प्रभावित कर दिया जाए, तो भी सर्विस बंद हो सकती है. इसलिए क्लाउड कंपनियां कई लेयर की सुरक्षा रखती हैं. 

फिजिकल सिक्योरिटी, बायोमेट्रिक एक्सेस, नेटवर्क मॉनिटरिंग और AI आधारित सुरक्षा सिस्टम साथ में काम करते हैं. UAE और बहरीन जैसे इलाकों में AWS की मौजूदगी का मतलब यह भी है कि वहां की डिजिटल इकॉनमी काफी हद तक क्लाउड पर निर्भर है. 

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अगर कुछ घंटों के लिए भी सर्विस डाउन होती है, तो हजारों बिजनेस प्रभावित हो सकते हैं. ई कॉमर्स ऑर्डर रुक सकते हैं. फिनटेक ट्रांजैक्शन फेल हो सकते हैं. स्टार्टअप्स का काम ठप पड़ सकता है.

वॉर में डेटा सेंटर्स आसान टारगेट

युद्ध के समय डेटा सेंटर आसान निशाना माने जाते हैं, क्योंकि इन्हें हिट करके सीधे नागरिक और आर्थिक सिस्टम पर असर डाला जा सकता है. लेकिन इन्हें भारी सुरक्षा और कई बैकअप सिस्टम से लैस रखा जाता है. बड़े क्लाउड प्लेयर डेटा को एक से ज्यादा जगह पर कॉपी करके रखते हैं ताकि एक लोकेशन प्रभावित होने पर भी डेटा सुरक्षित रहे.

इस घटना ने एक बार फिर दिखा दिया है कि आज की दुनिया में डिजिटल सिस्टम उतने ही अहम हैं जितने तेल रिफाइनरी या एयरपोर्ट. 

रिफाइनरी या एयरपोर्ट जितना इंपॉर्टेंट डेटा सेंटर

अगर डेटा सेंटर हिट होता है, तो असर सिर्फ टेक कंपनियों पर नहीं, आम लोगों पर भी पड़ता है. आपका मोबाइल ऐप, आपकी ऑनलाइन पेमेंट, आपका ऑफिस ईमेल सब उसी सर्वर पर टिका है.

जंग के इस दौर में एक नया सच सामने आ रहा है. अब सिर्फ मिसाइल नहीं, सर्वर भी टारगेट बन सकते हैं. और जब सर्वर हिट होता है, तो पूरा डिजिटल सिस्टम हिल सकता है. यही आधुनिक युद्ध का नया चेहरा है, जहां बम के साथ साथ डेटा भी लड़ाई का हिस्सा बन चुका है.

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