साइबर ठगी मामले में झारखंड के 23 साल के युवक को महाराष्ट्र की स्थानीय कोर्ट ने बरी कर दिया है. अदालत ने कहा है कि किसी शख्स के बैंक खाते में ठगी रकम आ जाना मात्र अपराध नहीं माना जा सकता है. ये जानकारी पीटीआई की रिपोर्ट से मिली है.
गिरगांव कोर्ट के न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रथम श्रेणी) एस. जी. चिमणकर ने बीते सप्ताह दिए गए अपने एक फैसले में मनोज किस्कू को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया.
मजिस्ट्रेट ने बताया है कि मुख्य आरोपी के साथ किसी आपराधिक साजिश के सबूत के सबूत नहीं है. आरोपी के बैंक खाते में रकम जमा होना किसी अपराध की श्रेणी में नहीं आता.
अदालत ने बताया है कि इस मामले में शिकायतकर्ता को आर्थिक रूप से नुकसान हुआ है. वहीं दूसरी तरफ आरोपी को रकम ट्रांसफर होने से लाभ मिला है. यह स्थिति सिविल देनदारी बनाती है और इन परिस्थितियों में इसे आरोपी के खिलाफ आपराधिक अपराध नहीं माना जा सकता है.
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26 फरवरी 2022 को आया मैसेज
शिकायतकर्ता पुलिस अधिकारी प्रियंका हनुमंत पवार को 26 फरवरी 2022 को फोन पर एक एसएमएस आया. इस मैसेज में एचडीएफसी बैंक खाता सक्रिय रखने के लिए पैन कार्ड अपडेट करने की जानकारी दी गई.
फर्जी वेबसाइट पर डाल दी डिटेल्स
मैसेज में दिए गए लिंक पर क्लिक कर उन्होंने अपनी जानकारी एक फर्जी वेबसाइट पर भर दी, जिसके बाद उनके खाते से 99,986 रुपये ट्रांसफर हो गए.
जल्दबाजी में दे दिया ओटीपी
फिर एक फोन कॉल आया, जिसमें ओटीपी मांगा गया. फिर ओटीपी शेयर करने के बाद उनके बैंक खाते से 2,99,970 रुपये को ट्रांसफर कर दिया गया.
मामले की जांच में हुए खुलासा
फिर मामले की जांच की तो पता चला कि एसएमएस भेजने और फर्जी कॉल करने में इस्तेमाल हुए मोबाइल नंबर झारखंड के जामताड़ा निवासी रऊफ अंसारी के नाम पर रजिस्टर्ड हैं.
मार्च 2023 में किया गिरफ्तार
फिर पुलिस ने ठगी गई रकम में से 99,986 रुपये मनोज किस्कू के बैंक खाते में ट्रेस किए. इसके बाद किस्कू को 17 मार्च 2023 को गिरफ्तार किया. फिर अक्टूबर 2023 में उन्हें जमानत दे दी गई.
आरोपी की ओर से पेश अधिवक्ता अमोल थोमरे ने दलील दी कि अभियोजन पक्ष मुख्य आरोपी रऊफ अंसारी को गिरफ्तार करने में विफल रहा, जिसने सीधे शिकायतकर्ता से संपर्क कर धोखा दिया था.