क्लाउड माइथोस (Claude Mythos) ने एक बड़ा खुलासा कर दिया है, जहां इस पावरफुल आर्टिफीशियल इंटेलीजेंस (AI) ने सिर्फ एक महीने के अंदर 10 हजार से अधिक पावरफुल खामियों को उजागर कर दिया है. ये खामियां दुनियां के सबसे जरूरी सॉफ्टवेयर के अंदर मौजूद थीं
क्लाउड माइथोस का ऐलान बीते महीने अप्रैल में हुआ था और यह एक एआई सिस्टम है. कंपनी पहले ही तय कर चुकी है कि इसको आम लोगों के हाथ में नहीं सौंपा जाएगा. इसके खतरों के लेकर दुनियाभर में चर्चा हो चुकी है.
पावरफुल क्लाउड माइथोस को लेकर दुनियाभर के देशों ने इसके गलत इस्तेमाल को लेकर सवाल खड़े किए हैं, इसमें भारत का भी नाम शामिल है.
प्रोजेक्ट ग्लासविंग के तहत दिया गया एक्सेस
एंथ्रोपिक ने माइथोस का एक्सेस चुनिंदा कंपनियों को दिया है, जिसमें ऐमेजॉन और गूगल जैसे नाम शामिल हैं. ये एक्सेस प्रोजेक्ट ग्लासविंग के तहत दिया गया है. अब एंथ्रोपिक ने ही बताया है कि इस प्रोजेक्ट के तहत दिए गए एक्सेस से एक महीने के अंदर करीब 10 हजार खामियां सामने आ चुकी हैं.
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पार्टनर के सॉफ्टवेयर में खतरनाक वायरस
एंथोपिक के मुताबिक, प्रोजेक्ट ग्लासविंग के तहत हर एक पार्टनर ने माइथोस का इस्तेमाल करके अपने ही सॉफ्टवेयर में मौजूद हजारों खामियों का पता लगाया है. कई लोगों ने दावा किया है कि उनकी बग पकड़ने की स्पीड बढ़ गई है.
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क्लाउडफेयर के सॉफ्टवेयर में 2 हजार बग्स
इंटरनेट होस्टिंग प्लेटफॉर्म क्लाउडफेयर ने कहा कि उन्होंने करीब 2 हजार बग्स को खोज निकाला है. इसमें से 400 बग्स बहुत ही खतरनाक थे. कंपनी ने पाया है कि इंसानों की टेस्टिंग की तुलना में माइथोस का टेस्टिंग रेट रिजल्ट ज्यादा बेहतर है. वहीं ब्राउजर सर्विस प्रोवाइड कराने वाले मोजिला ने बताया है कि उन्होंने करीब 271 खामियों को ठीक कर लिया है.