दो महीने से ज्यादा समय तक आईपीएल की भागदौड़, मैचों का दबाव, लगातार यात्राएं और सुर्खियों की चकाचौंध... इन सबके बाद मंगलवार रात वैभव सूर्यवंशी आखिरकार ताजपुर स्थित अपने घर पहुंच गए. क्रिकेट ने उन्हें कम उम्र में ही देशभर में पहचान दिला दी है, लेकिन घर लौटने की खुशी आज भी उनके लिए किसी शतक या अवॉर्ड से कम नहीं है.
अगले कुछ दिन उनके लिए बेहद खास होंगे. परिवार के बीच बैठने का सुकून मिलेगा, मां के हाथ का खाना मिलेगा और वह अपनापन मिलेगा, जिसकी कमी बड़े-बड़े स्टेडियम और आलीशान होटल भी पूरी नहीं कर सकते. वैभव खुद स्वीकार कर चुके हैं कि दुनिया की कोई भी चीज उन्हें घर के खाने जितनी पसंद नहीं है.
क्रिकेट के मैदान पर वैभव सूर्यवंशी अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से गेंदबाजों को बेबस कर देते हैं, लेकिन मैदान के बाहर उनकी दुनिया अब भी एक 15 साल के साधारण बच्चे जैसी ही है- मासूम, सादी और भावनाओं से भरी हुई. करोड़ों लोगों की नजरें उन पर हैं, फिर भी उनके सपने, पसंद और खुशियां बिल्कुल वैसी ही हैं जैसी किसी आम किशोर की होती हैं.
वैभव सूर्यवंशी का गुलाबी घर... जहां सुकून भरपूर, पर सुपर स्टार बनने के बाद यहां टेंशन भी बढ़ी
एक्स (X) पर ESPN Cricinfo के वीडियो में वैभव बताते हैं, 'मैं सब कुछ खाता हूं, घर का खाना मुझे बहुत पसंद है. लेकिन चीट मील में आइसक्रीम सबसे ज्यादा पसंद है.' उनकी यह बात बहुत सरल है, लेकिन इसमें उनका बचपन साफ दिखता है- जहां कोई स्टारडम नहीं, सिर्फ मासूमियत और सादगी है.
थकान और मानसिक दबाव के समय वैभव अपनी ही छोटी सी दुनिया में लौट जाते हैं. वे बताते हैं, 'जब भी घर में खाली बैठता था तो कार्टून देखता था… अभी भी देखता हूं. जब थोड़ा रिलैक्स चाहिए होता है तो रूम में बैठकर कार्टून्स देख लेता हूं. इससे काफी अच्छा लगता है, घर की भी याद आती है.' यह उनके लिए सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि सुकून पाने और घर से जुड़ाव महसूस करने का तरीका है.
Beyond the runs and the spotlight, Vaibhav Sooryavanshi loves his cartoons and ice cream 😁 pic.twitter.com/089V4cPklG
— ESPNcricinfo (@ESPNcricinfo) May 29, 2026
यह उनके लिए सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि मानसिक सुकून पाने का तरीका है- एक छोटा-सा ब्रेक, जो उन्हें मैदान के दबाव से दूर उनके बचपन की दुनिया में वापस ले जाता है.
इसी भावनात्मक संतुलन के बीच वे एक अहम बात मानते हैं- 'वो देखने के बाद मुझे रियलाइज होता है कि मैं भी छोटा ही हूं.' यह एहसास उन्हें हमेशा जमीन से जोड़े रखता है, चाहे मंच कितना भी बड़ा क्यों न हो जाए.
लेकिन इस मासूमियत के पीछे एक मजबूत क्रिकेटर भी खड़ा है. वैभव बताते हैं कि वे बचपन से लगातार अभ्यास कर रहे हैं और उनका लक्ष्य साफ है- भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करना और लंबे समय तक देश के लिए देश के लिए खेलना.
यही उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी खासियत है- एक तरफ आइसक्रीम की सादगी और कार्टून की दुनिया, तो दूसरी तरफ अनुशासन, मेहनत और भारत की जर्सी पहनने का सपना.
वैभव सूर्यवंशी की यह कहानी सिर्फ एक युवा खिलाड़ी की नहीं, बल्कि उस संतुलन की कहानी है जहां बचपन और जिम्मेदारी साथ-साथ चलते हैं और जहां एक बच्चा अपने सपनों को दुनिया के सबसे बड़े मंच तक ले जाने की कोशिश कर रहा है.