भारतीय टीम के पूर्व तेज गेंदबाज एस. श्रीसंत को बड़ी राहत मिली है. केरल क्रिकेट एसोसिएशन (KCA) ने उन पर लगाया गया तीन साल का प्रतिबंध हटा लिया है. पिछले साल केसीए ने श्रीसंत को बोर्ड के खिलाफ कथित तौर पर 'मानहानिकारक बयान' देने के आरोप में निलंबित कर दिया था. अब बिना शर्त माफी मांगने के बाद बोर्ड ने अपना फैसला बदल दिया है.
द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक 1 जुलाई को हुई केरल क्रिकेट एसोसिएशन की बैठक में श्रीसंत का निलंबन खत्म करने का फैसला लिया गया. हालांकि बोर्ड ने साफ चेतावनी दी है कि भविष्य में यदि इस तरह का व्यवहार दोबारा हुआ तो उनके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी.
संजू का का किया था सपोर्ट
पूरा विवाद तब शुरू हुआ था, जब संजू सैमसन को विजय हजारे ट्रॉफी 2025-26 के लिए केरल की टीम से बाहर कर दिया गया था. इस फैसले के बाद श्रीसंत ने खुलकर संजू सैमसन का समर्थन किया और केरल क्रिकेट एसोसिएशन की आलोचना की थी.
उन्होंने कहा था, 'वे दूसरे राज्यों के खिलाड़ियों को हमारी टीम में लाते हैं. आखिर क्यों? यह हमारे मलयाली खिलाड़ियों का अपमान है. इंटरनेशनल स्तर पर हमारे पास सिर्फ संजू सैमसन हैं. हमें उनका समर्थन करना चाहिए.'
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एस. श्रीसंत के इस बयान के बाद केसीए ने इसे बोर्ड की छवि खराब करने वाला बताया और उन पर तीन साल का प्रतिबंध लगा दिया. निलंबन के खिलाफ श्रीसंत ने तिरुवनंतपुरम मुंसिफ कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया था, लेकिन उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी. इसके बाद उन्होंने केसीए को बिना शर्त माफी सौंपी, जिस पर विचार करने के बाद बोर्ड ने प्रतिबंध हटाने का फैसला लिया.
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बैन हटने के बाद एस. श्रीसंत अब केरल क्रिकेट लीग (KCL) से फिर जुड़ सकेंगे. वह KCL फ्रेंचाइजी एरीज कोल्लम सेलर्स (Aries Kollam Sailors) के सह-मालिक हैं और अब इस भूमिका में बिना किसी रोक-टोक के काम कर पाएंगे. जब विवाद बढ़ा था, तब केरल क्रिकेट एसोसिएशन ने श्रीसंत पर पलटवार करते हुए कहा था कि उन्हें केरल क्रिकेट की सही जानकारी नहीं है.
केरल क्रिकेट एसोसिएशन ने अपने बयान में यह भी कहा था कि आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग मामले में आपराधिक कार्यवाही भले खत्म हो गई हो, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि श्रीसंत पूरी तरह आरोपों से बरी हो गए थे. साथ ही केसीए ने दावा किया कि प्रतिबंध की अवधि पूरी होने के बाद उसने सद्भावना दिखाते हुए श्रीसंत को रणजी टीम में जगह दी थी.