आईसीसी मेन्स टी20 वर्ल्ड कप 2026 में सूर्यकुमार यादव की अगुवाई वाली भारतीय टीम को साउथ अफ्रीका के खिलाफ 76 रनों से हार झेलनी पड़ी, जो टूर्नामेंट में उनकी पहली शिकस्त थी. 22 फरवरी (रविवार) को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में हुए इस मैच में उप-कप्तान अक्षर पटेल को मौका नहीं मिला, जिसे लेकर हंगामा मचा हुआ है. अक्षर के ऊपर ऑलराउंडर वॉशिंगटन सुंदर को तवज्जो दी गई.
अब टीम इंडिया के पूर्व स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने इस सुपर-8 मुकाबले में अक्षर पटेल को प्लेइंग इलेवन से बाहर रखने पर सवाल उठाए हैं. अपने यूट्यूब चैनल पर अश्विन ने कहा कि अक्षर भारत के लिए टी20 क्रिकेट में 'मोस्ट वैल्यूएबल प्लेयर' (MVP) रहे हैं और कई बार मुश्किल हालात से टीम को बाहर निकाल चुके हैं. उन्होंने माना कि लेफ्ट-हैंड बल्लेबाजों के खिलाफ वॉशिंगटन सुंदर को खिलाना रणनीतिक रूप से सही हो सकता है, लेकिन अक्षर के योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
रविचंद्रन अश्विन ने कहा, 'मैं शत प्रतिशत सहमत हूं कि बाएं हाथ के बल्लेबाजों के खिलाफ वॉशिंगटन सुंदर को इस्तेमाल करना चाहिए. लेकिन अक्षर पटेल टी20 क्रिकेट में आपके एमवीपी रहे हैं. पिछली बार साउथ अफ्रीका के खिलाफ जब भारतीय टीम मुश्किल में थी, तब अक्षर पटेल ने विराट कोहली के साथ साझेदारी कर टीम को 170 के पार पहुंचाया था. कोहली का अनुभव था, लेकिन अक्षर किसी से कम नहीं हैं.'
असिस्टेंट कोच ने फैसले का किया बचाव
वहीं भारत के सहायक कोच रयान टेन डोशेट ने अक्षर पटेल को बाहर रखने के फैसले का बचाव किया. उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन सुंदर पावरप्ले में गेंदबाजी करने के साथ ही बाएं हाथ के बल्लेबाजों के खिलाफ ज्यादा प्रभावी विकल्प थे. हालांकि, मैच में सुंदर सिर्फ 2 ओवर ही डाल सके और 17 रन खर्च किए. बल्लेबाजी में भी वह 11 गेंदों में 11 रन बनाकर आउट हो गए. ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या अक्षर को बाहर करना टीम की रणनीतिक चूक साबित हुई?
भारतीय टीम की इस हार के बाद प्लेइंग इलेवन के संतुलन पर बहस तेज हो गई है. मध्य ओवरों में टीम को एक ऐसे ऑलराउंडर की जरूरत महसूस हुई, जो गेंद और बल्ले दोनों से स्थिरता दे सके. अक्षर पटेल की गैरमौजूदगी में यह कमी साफ नजर आई, खासकर तब जब लक्ष्य का पीछा करते हुए नियमित अंतराल पर विकेट गिरते रहे.
सुपर-8 के अगले दो मुकाबले अब भारत के लिए 'करो या मरो' जैसे बनते जा रहे हैं. टीम मैनेजमेंट को यह तय करना होगा कि रणनीति के नाम पर अनुभव और भरोसे को नजरअंदाज करना सही है या फिर परिस्थितियों के अनुसार संतुलित कॉम्बिनेशन के साथ मैदान में उतरना बेहतर होगा.