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Super Exclusive Interview: ‘जितना बड़ा रिस्क, उतना बड़ा रिवॉर्ड…’, कोच गौतम गंभीर ने बताया कैसे जीता भारत ने T20 वर्ल्ड कप, VIDEO

टीम इंडिया की T20 वर्ल्ड कप जीत के बाद कोच गौतम गंभीर ने बताया कि टीम की सफलता का मंत्र ‘हाई रिस्क, हाई रिवॉर्ड’ की सोच रही. उन्होंने कहा कि T20 में डिफेंसिव क्रिकेट से जीत संभव नहीं. टीम मैनेजमेंट खिलाड़ियों को रन नहीं, बल्कि इम्पैक्ट से आंकता है और सभी खिलाड़ियों पर भरोसा रखता है. यही भरोसा भारत को चैम्पियन बनाने में काम आया.

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माइलस्टोन नहीं, इम्पैक्ट पर फोकस… कोच गंभीर ने खोला चैम्पियन बनने का फॉर्मूला  (Photo: PTI)
माइलस्टोन नहीं, इम्पैक्ट पर फोकस… कोच गंभीर ने खोला चैम्पियन बनने का फॉर्मूला (Photo: PTI)

टीम इंडिया ने टी20 वर्ल्ड कप 2026 का खिताब जीतकर इतिहास रच दिया. कप्तान सूर्यकुमार यादव की अगुआई में भारत ने फाइनल में न्यूजीलैंड को हराकर तीसरी बार ट्रॉफी अपने नाम की. इस ऐतिहासिक जीत के बाद टीम के हेड कोच गौतम गंभीर ने खुलकर बताया कि आखिर टीम इंडिया की सफलता का असली मंत्र क्या रहा. इसे लेकर गंभीर ने आजतक से एक्सक्लूस‍िव बातचीत की. 

गंभीर ने कहा कि जब उन्होंने टीम के साथ काम शुरू किया तो उनकी सोच साफ थी, T20 क्रिकेट में ‘हाई रिस्क, हाई रिवॉर्ड’ का खेल जरूरी है. उन्होंने कहा कि इस फॉर्मेट में 120 या 240 गेंदों में जितना ज्यादा असर पैदा किया जा सके, वही टीम को जीत के करीब ले जाता है.

गंभीर के मुताबिक- आप डिफेंसिव होकर या अपने शेल में रहकर T20 फॉर्मेट नहीं जीत सकते. अगर आप बड़े टूर्नामेंट जीतना चाहते हैं तो आपको डोमिनेट करना होगा. यही सोच हमने टीम के साथ शेयर की.

उन्होंने यह भी कहा कि मैच के दौरान माइलस्टोन के बारे में सोचना टीम को नुकसान पहुंचा सकता है. अगर खिलाड़ी अपने व्यक्तिगत माइलस्टोन के बारे में सोचता है तो टीम के 15–20 रन कम हो सकते हैं. वही 15–20 रन कई बार वर्ल्ड कप जीतने और हारने के बीच फर्क बन जाते हैं.
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संजू और अभ‍िषेक के बारे में गंभीर ने क्या कहा?
टूर्नामेंट से ठीक पहले न्यूजीलैंड सीरीज में संजू सैमसन का फॉर्म चिंता का विषय था. हालांकि गंभीर ने साफ कहा कि किसी भी टीम में ऐसा संभव नहीं कि सभी खिलाड़ी एक साथ फॉर्म में हों.

उन्होंने कहा-ऐसा कभी नहीं होता कि वर्ल्ड कप में जाते वक्त टीम के सभी खिलाड़ी फॉर्म में हों. न्यूजीलैंड के खिलाफ संजू के रन नहीं आए, लेकिन वर्ल्ड कप में जिस तरह उसने बल्लेबाजी की, वह किसी भी क्रिकेटर के लिए ड्रीम जैसा है.
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गंभीर ने अभिषेक शर्मा का उदाहरण देते हुए कहा कि टीम मैनेजमेंट खिलाड़ी को सिर्फ रन के आधार पर नहीं, बल्कि उसके इम्पैक्ट के आधार पर देखती है. लोग बाहर से सिर्फ रन देखते हैं. लेकिन कोच और टीम मैनेजमेंट यह देखते हैं कि खिलाड़ी किस तरह का इम्पैक्ट बना रहा है. अगर कोई खिलाड़ी 20 गेंद में 20 रन बनाता है तो वह टीम के लिए ज्यादा नुकसानदायक हो सकता है.

टीम सेलेक्शन कैसे होता है, गंभीर ने बताया 
कोच ने यह भी बताया कि टीम चयन भरोसे पर किया गया था. गंभीर ने कहा- हम खिलाड़ियों को ट्रस्ट और फेथ पर चुनते हैं, होप पर नहीं. अगर आप किसी खिलाड़ी पर भरोसा करके उसे टीम में लेते हैं तो उसे 4–5 मैच में बाहर नहीं कर सकते. ड्रेसिंग रूम में मौजूद 15 के 15 खिलाड़ियों पर हमें पूरा भरोसा था कि मौका मिलने पर वे टीम के लिए प्रदर्शन करेंगे. 
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गंभीर के मुताबिक टीम की सबसे बड़ी ताकत यही रही कि हर खिलाड़ी ने खुद से पहले टीम को रखा. यही कारण है कि भारत पूरे टूर्नामेंट में आक्रामक अंदाज में खेलता रहा और बड़े स्कोर बनते रहे. उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी टीम इंडिया इसी आक्रामक सोच के साथ खेलेगी और बड़े स्कोर बनते रहेंगे.

व्यक्त‍िगत माइलस्टोन पर क्या बोले गंभीर 
इस इंटरव्यू में टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर ने कहा क्रिकेट में व्यक्तिगत माइलस्टोन से ज्यादा टीम की सफलता मायने रखती है. उनके मुताबिक क्रिकेट एक टीम स्पोर्ट है, जहां खिलाड़ी अगर अपने निजी रिकॉर्ड के बारे में सोचने लगें तो टीम का नुकसान हो सकता है. गंभीर ने साफ कहा कि टीम का हर खिलाड़ी मैच में ज्यादा से ज्यादा इम्पैक्ट बनाने की कोशिश करे, यही सबसे जरूरी है.

उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा भारतीय टीम में शानदार माहौल है और ड्रेसिंग रूम का वातावरण ही बताता है कि खिलाड़ी कितने एकजुट हैं. गंभीर के मुताबिक यही एकजुटता टीम को बड़े टूर्नामेंट जिताने में मदद करती है.

कोच ने आलोचकों पर भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें बाहरी आलोचनाओं की परवाह नहीं है. उनका पूरा फोकस सिर्फ टीम और खिलाड़ियों पर रहता है. गंभीर का मानना है कि यह टीम किसी भी परिस्थिति में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की क्षमता रखती है और यही सोच उसे आगे भी सफल बनाएगी.

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