
सोचिए, अगर किसी आम दोपहर अचानक आपके शहर के नीले आसमान से 19 टन का एक ऐसा बम जमीन पर आ गिरे, जो हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणु बम से सैकड़ों गुना ज्यादा ताकतवर हो? और वो भी बिना किसी युद्ध की घोषणा के, बिना किसी चेतावनी के- बस एक सैन्य क्रू मेंबर की मामूली तकनीकी चूक के कारण.
तारीख थी 22 मई 1957. दोपहर करीब 11 बजकर 50 मिनट पर अमेरिकी स्टेट न्यू मेक्सिको का अल्बुकर्क शहर ठीक इसी तरह की एक खौफनाक और अकल्पनीय तबाही की जद में आ खड़ा हुआ था. इस घटना को मिलिटरी दस्तावेजों में 'ब्रोकन एरो' हादसे के नाम से जाना जाता है. हादसा ऐसा था कि बस एक पल में इस खूबसूरत शहर का नामो-निशान हमेशा के लिए मिटने वाला था.
उस दोपहर अमेरिकी वायुसेना का एक विशाल B-36 पीसमेकर बॉम्बर विमान टेक्सास के बर्कसडेल एयरफोर्स बेस से उड़ान भरकर न्यू मेक्सिको स्थित किर्टलैंड एयरफोर्स बेस की ओर लैंडिंग के लिए बढ़ रहा था. विमान के बॉम्बर बे में बंद था Mark 17 थर्मोन्यूक्लियर बम. 42,000 पाउंड यानी लगभग 19,000 किलोग्राम वजनी और 24 फीट लंबा यह हाइड्रोजन बम उस दौर में अमेरिका के शस्त्रागार में शामिल सबसे विशाल और घातक हथियार था. 10 से 15 मेगाटन की मारक क्षमता वाला यह बम हिरोशिमा पर गिराए गए 'लिटिल बॉय' से लगभग 700 से 1,000 गुना अधिक विनाशकारी था.
जब विमान बेस से केवल 4.5 मील दूर था और 1,700 फीट की ऊंचाई पर उड़ रहा था, तब एक क्रू मेंबर आपातकालीन लॉकिंग पिन की जांच कर रहा था. तभी अनजाने में मैकेनिज्म ट्रिगर हो गया. 19 टन वजनी बम ने विमान के भारी सुरक्षा दरवाजों को तोड़ दिया और सीधे नीचे जमीन पर जा गिरा. अच्छा था कि नीचे रेगिस्तानी इलाका था. जैसे ही इतना भारी वजन अचानक कम हुआ, B-36 विमान हवा में कई सौ फीट ऊपर उछल गया. क्रू मेंबर्स जब तक संभलते, नीचे रेगिस्तान में एक भयानक विस्फोट हो चुका था.

जमीन से टकराते ही बम का विशालकाय ढांचा तो टूट गया, लेकिन उसके साथ ही उसमें मौजूद हाई-एक्सप्लोसिव फट गए. इस धमाके का असर इतना जबरदस्त था कि जमीन में 25 फीट चौड़ा और 12 फीट गहरा गड्ढा बन गया. धुएं, आग और मलबे के गुबार एक मील दूर तक बिखर गए और पूरे अल्बुकर्क शहर की खिड़कियां थरथरा उठीं. लेकिन इस भयानक मंजर के बीच एक ऐसा कुदरती और रणनीतिक चमत्कार हुआ, जिसने लाखों जानें बचा लीं.
अमेरिकी रक्षा विभाग के आधिकारिक दस्तावेजों में दर्ज आधिकारिक बयान के अनुसार-
'परमाणु कैप्सूल विमान के भीतर अलग सुरक्षा बॉक्स में रखा गया था और बम में स्थापित नहीं था. इसी कारण कोई परमाणु या थर्मोन्यूक्लियर विस्फोट नहीं हुआ.'
यदि प्लूटोनियम कोर बम के अंदर लगा होता, तो एक थर्मोन्यूक्लियर विस्फोट अल्बुकर्क को हमेशा के लिए एक जलते हुए गड्ढे में तब्दील कर देता. इस हादसे में कोई इंसान हताहत नहीं हुआ. हादसे के तुरंत बाद पूरे इलाके को सील कर दिया गया और रेडियोएक्टिविटी की जांच की गई. इस बेहद संवेदनशील और खौफनाक घटना को दशकों तक गोपनीय रखा गया. 1980 के दशक में जब पेंटागन ने दस्तावेजों को डिक्लासिफाई किया तो शहर के लोगों को पता चला कि उस दिन वे कितने बड़े खतरे के करीब थे, शहर की बहुत बड़ी आबादी तो उस तारीख के बाद पैदा हुई थी जिनको अपने पूर्वजों के सामने आए खतरे का अब आभास हुआ.

ये घटना याद दिलाती है कि हथियारों से दुश्मन देश को जितना खतरा होता है खुद उस मुल्क को उससे कम खतरा नहीं होता. बल्कि वेपन रेस पूरी मानव सभ्यता को ही खतरे में डालती है.
आज कैसा है ये शहर?
1957 की उस खौफनाक दोपहर के लगभग सात दशक बाद, आज का अल्बुकर्क पूरी तरह बदल चुका है. साढ़े पांच लाख से अधिक आबादी वाला यह शहर न्यू मेक्सिको का सबसे जीवंत, सांस्कृतिक और आधुनिक आर्थिक केंद्र है. आज यहां के निवासियों की जिंदगी उस पुराने खौफ के साये में नहीं, बल्कि रंगों और तकनीक के संगम के साथ आगे बढ़ रही है.

आज का अल्बुकर्क दुनिया भर में मुख्य रूप से दो चीजों के लिए जाना जाता है. यह आज विश्व की हॉट एयर बैलून कैपिटल के नाम से जाना जाता है. जिस आसमान से कभी 19 टन की 'मौत' गिरी थी, आज वही नीला आसमान रंगों से सराबोर रहता है. हर साल अक्टूबर में यहां इंटरनेशनल बैलून फिएस्टा आयोजित होता है, जहां दुनिया भर के 500 से अधिक रंग-बिरंगे हॉट एयर बैलून हवा में तैरते हैं.
इस शहर की दूसरी पहचान है ग्लोबल पॉप-कल्चर सेंटर के रूप में. हॉलीवुड की सुपरहिट टीवी सीरीज 'ब्रेकिंग बैड' और 'बेटर कॉल सॉल' की बदौलत आज यहां की सड़कें, ऐतिहासिक रूट 66 और यहां के कैफे दुनिया भर के पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र हैं.
अब एक सवाल सबके मन में उठ सकता है कि क्या शहर उस दिन को भूल गया है? तो बिल्कुल नहीं. अल्बुकर्क ने उस काली दोपहर को अपने इतिहास के एक महत्वपूर्ण सबक के रूप में सहेज लिया है. किर्टलैंड एयरफोर्स बेस के पास रिजर्व एरिया में आज भी उस दुर्घटना से बना विशाल गड्ढा मौजूद है. वहीं शहर में स्थित 'नेशनल म्यूजियम ऑफ न्यूक्लियर साइंस एंड हिस्ट्री' में 1957 के उस B-36 बॉम्बर विमान के अवशेष और Mark 17 हाइड्रोजन बम का विशाल खाली आवरण भी संरक्षित करके रखा हुआ है. जिसे देखने वाले उस दिन की संभावित तबाही की कल्पना किए बिना नहीं रह पाते.