रविवार शाम को तमिलनाडु के थूथुकुडी जिले में एक डरावनी मौसमी घटना घटी. आसमान में घुमावदार धूल और बादलों का एक बड़ा खंभे जैसी आकृति दिखाई दी जो टॉरनेडो जैसी लग रही थी. इस घटना ने कई घरों, दुकानों, टोल प्लाजा और एक प्राइवेट थीम पार्क को नुकसान पहुंचाया.
कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए, जिनमें लोग हैरानी और डर के साथ इस दृश्य को देख रहे थे. मगर मौसम विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि यह असली टॉरनेडो नहीं था, बल्कि एक शक्तिशाली थंडरस्टॉर्म अपड्राफ्ट था जो क्यूमुलोनिम्बस बादलों के सिस्टम्स से जुड़ा था.
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थूथुकुडी जिले में शाम के समय तेज बारिश और आंधी आई. स्थानीय लोगों ने बताया कि अचानक हवा का तेज झोंका आया और धूल का एक बड़ा घुमावदार कॉलम जमीन से उठकर आसमान की ओर गया. इसने रास्ते में आने वाली चीजों को उखाड़ फेंका. कुछ घरों की छतें उड़ गईं. बिजली के खंभे झुक गए. टोल प्लाजा प्रभावित हुआ और थीम पार्क में काफी नुकसान हुआ.
छह लोग घायल हुए जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया. IMD के अनुसार, क्षेत्र में साइक्लोनिक सर्कुलेशन और स्थानीय गर्मी के कारण तेज थंडरस्टॉर्म पैदा हुआ. क्यूमुलोनिम्बस बादल 3 किलोमीटर से 18 किलोमीटर ऊंचाई तक बन सकते हैं. इनमें बहुत तेज ऊपर की ओर हवा का फ्लो (अपड्राफ्ट) होता है.
इसी अपड्राफ्ट ने जमीन से ढीली मिट्टी और धूल को उठाकर घुमावदार खंभे जैसी आकृति बना दी. यह घटना यहां असामान्य है क्योंकि यहां टॉरनेडो बहुत कम आते हैं. आमतौर पर अमेरिका के मैदानी इलाकों में टॉरनेडो ज्यादा देखे जाते हैं, लेकिन भारत में थंडरस्टॉर्म से जुड़े ऐसे अपड्राफ्ट कभी धूल भरे इलाकों में दिख सकते हैं.
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टॉरनेडो और थंडरस्टॉर्म अपड्राफ्ट में अंतर
टॉरनेडो और थंडरस्टॉर्म अपड्राफ्ट दोनों ही खतरनाक लग सकते हैं, लेकिन इनमें अंतर है. टॉरनेडो एक घूमने वाला हवा का खंभा होता है जो एक थंडरस्टॉर्म से जमीन तक जुड़ा होता है. इसमें हवा की रफ्तार 300 किलोमीटर प्रति घंटे या उससे भी ज्यादा हो सकती है.
टॉरनेडो में मजबूत रोटेशन होता है जो सुपरसेल थंडरस्टॉर्म में बनता है. इसमें अपड्राफ्ट और डाउनड्राफ्ट अलग-अलग रहते हैं, जिससे बहुत तेज घुमाव पैदा होता है. टॉरनेडो बड़े-बड़े घरों को पूरी तरह उखाड़ सकता है, गाड़ियों को उड़ा सकता है और लंबी दूरी तक तेजी से यात्रा करता है.
दूसरी ओर, थंडरस्टॉर्म अपड्राफ्ट क्यूमुलोनिम्बस बादल में ऊपर की ओर तेज हवा का फ्लो है. यह बादल में नमी और गर्म हवा को ऊपर ले जाता है, जिससे बादल बहुत ऊंचा और घना बनता है. जब यह अपड्राफ्ट बहुत मजबूत होता है तो जमीन से धूल, कचरा या पानी को ऊपर खींच सकता है, जिससे फनल या घुमावदार खंभा दिखता है. लेकिन इसमें टॉरनेडो जितना मजबूत रोटेशन और जुड़ी हुई संरचना नहीं होती.
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यह आमतौर पर कमजोर होता है, ज्यादा दूर तक नहीं जाता और नुकसान सीमित रखता है. मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, थूथुकुडी की घटना में यही अपड्राफ्ट था, न कि असली टॉरनेडो. टॉरनेडो के लिए ज्यादा जटिल वायुमंडलीय स्थिति चाहिए, जैसे तेज वर्टिकल विंड शियर (ऊंचाई के साथ हवा की दिशा और गति में बदलाव).
क्यूमुलोनिम्बस बादल थंडरस्टॉर्म के मुख्य बादल होते हैं. ये बिजली, तेज हवा, ओले और भारी बारिश पैदा करते हैं. इनमें अपड्राफ्ट की गति 100 किलोमीटर प्रति घंटे या ज्यादा हो सकती है. जब अपड्राफ्ट धूल भरे क्षेत्र में काम करता है तो डस्ट डेविल या सैंड स्पाउट जैसा नजारा बनता है, जो थूथुकुडी में देखा गया.
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मौसम वैज्ञानिकों की राय और सलाह
IMD के अधिकारी वीआर दुरई ने कहा कि यह टॉरनेडो नहीं था क्योंकि इसमें संरचनात्मक नुकसान कम था. रोटेशन टॉरनेडो जितना तीव्र नहीं था. कुछ मौसम प्रेमी इसे EF2 लेवल का टॉरनेडो मान रहे हैं, लेकिन आधिकारिक रूप से इसे अपड्राफ्ट से जुड़ा बताया गया है. भारत में ऐसे घटनाएं दुर्लभ हैं क्योंकि यहां की भौगोलिक स्थिति और मॉनसून पैटर्न टॉरनेडो के लिए अनुकूल नहीं होते.
वैश्विक तापमान बढ़ने से थंडरस्टॉर्म की तीव्रता बढ़ रही है. गर्म हवा ज्यादा नमी सोखती है, जिससे क्यूमुलोनिम्बस बादल ज्यादा शक्तिशाली बनते हैं. भारत जैसे देशों में जहां मॉनसून पहले से ही सक्रिय है, ऐसे स्थानीय तूफान बढ़ सकते हैं. वैज्ञानिक स्टडी कर रहे हैं कि कैसे जलवायु परिवर्तन इन घटनाओं को प्रभावित कर रहा है. थूथुकुडी जैसी घटनाएं हमें याद दिलाती हैं कि मौसम की चेतावनी को गंभीरता से लेना चाहिए.