scorecardresearch
 

India Today Conclave 2026: पर्यावरण बदलना है तो कई पीढ़ियों से तालमेल बिठाना होगा: मेलाटी विजसेन

मेलाटी विजसेन 12 साल की उम्र में 'बाय-बाय प्लास्टिक' कैंपेन चलाकर बाली में प्लास्टिक पर बैन लगवाया. आज 25 साल की उम्र में 5 किताबें लिख चुकी हैं. यूथोपिया प्लेटफॉर्म से युवाओं को पर्यावरण शिक्षा दे रही हैं. वो कहती हैं कि बदलाव के लिए सरकार, संस्थाएं और युवा साथ आएं, सकारात्मक रास्ते चुनें और टाइमलाइन बनाकर काम करें.

Advertisement
X
इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2026 में बोलती पर्यावरण एक्टिविस्ट मेलाटी विजसेन. (Photo: Arun Kumar/India Today)
इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2026 में बोलती पर्यावरण एक्टिविस्ट मेलाटी विजसेन. (Photo: Arun Kumar/India Today)

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में युवा पर्यावरण कार्यकर्ता मेलाटी विजसेन ने  Planet Paralyses: Why this Young Woman Refuses to Watch the World Die में अपनी बात रखी. मेलाटी विजसेन ओबामा प्रशासन की पर्यावरण सलाहकार रह चुकी हैं. जब वो सिर्फ 12 साल की थीं, तब उन्होंने इंडोनेशिया में 'बाय-बाय प्लास्टिक' कैंपेन शुरू किया. आज 25 साल की उम्र में वो पर्यावरण एक्टिविस्ट, लेखिका और युवा नेता हैं. उन्होंने अपनी यात्रा, पर्यावरण, प्रोटेस्ट और बदलाव के बारे में खुलकर बात की.

बाय-बाय प्लास्टिक कैंपेन की शुरुआत

मेलाटी ने बताया कि 12 साल की उम्र में वो और उनके दोस्त प्लास्टिक पॉल्यूशन से बहुत परेशान थे. समुद्र, नदियां और बीच पर प्लास्टिक कचरा देखकर फ्रस्ट्रेशन होता था. उन्होंने 'बाय-बाय प्लास्टिक'  कैंपेन शुरू किया. इस कैंपेन की वजह से बाली में प्लास्टिक बैग, स्ट्रॉ और स्टिरर पर बैन लगा.

यह भी पढ़ें: India Today Conclave 2026: AI, सर्विलांस और प्राइवेसी पर Signal की प्रेसिडेंट Meredith Whittaker की बड़ी चेतावनी

मेलाटी कहती हैं कि 40 देशों ने प्लास्टिक पर बैन लगाया था, लेकिन बाली में ये काम युवाओं ने मिलकर किया. वो माता-पिता की शुक्रगुजार हैं जिन्होंने उन्हें सवाल पूछना और पर्यावरण के प्रति जागरूक होना सिखाया.

planet paralyses climate change

क्या बाली अब प्लास्टिक फ्री है?

मेलाटी ने कहा कि बाली पूरी तरह प्लास्टिक फ्री नहीं हुआ है. अब भी कई संस्थाओं के साथ मिलकर कैंपेन चलाना पड़ता है. प्लास्टिक की समस्या सिर्फ एक देश की नहीं, पूरी दुनिया की है. इसलिए अकेले नहीं, बल्कि टीम बनाकर काम करना जरूरी है. 12 साल की उम्र से अब तक 13 सालों में वो लगातार इस मुद्दे पर काम कर रही हैं. उन्होंने 5 किताबें लिखी हैं. शिक्षा में बदलाव लाने पर जोर देती हैं.

Advertisement

पर्यावरण एक्टिविस्ट होना क्या होता है?

मेलाटी के अनुसार पर्यावरण एक्टिविज्म सिर्फ प्रोटेस्ट नहीं है. इसमें सरकार, निजी कंपनियां, युवा और आम लोग – सबको साथ लाना पड़ता है. अगर कोई बड़ा बदलाव लाना है तो कई तरह के प्रयास करने पड़ते हैं. युवा एक्टिविज्म से सिर्फ बात नहीं बनती, जेनरेशन के बीच संवाद जरूरी है. प्रोटेस्ट कई बार गलत रास्ते पर चले जाते हैं. इसलिए बेहतर और सकारात्मक रास्ते चुनने चाहिए. हर व्यक्ति की अपनी खासियत होती है, उसी के हिसाब से काम करना चाहिए.

planet paralyses climate change

यूथोपिया प्लेटफॉर्म और युवाओं की भूमिका

'बाय-बाय प्लास्टिक' की कहानी फेमस हुई तो लोग नए सवाल पूछने लगे. नए आइडिया आने लगे. इसी से मेलाटी ने 'यूथोपिया' नाम का ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बनाया. यहां युवा पर्यावरण, सस्टेनेबिलिटी और बदलाव के बारे में सीखते हैं. कई युवा वहां से प्रेरित होकर अपने स्तर पर बदलाव ला रहे हैं. मेलाटी कहती हैं कि युवाओं को सीरियस होने के साथ मस्ती भी नहीं भूलनी चाहिए.

एआई का इस्तेमाल और कहानी कहने का नया तरीका

मेलाटी अब एआई को पर्यावरण कैंपेन में इस्तेमाल कर रही हैं. एआई से कहानियां बेहतर तरीके से सुनाई जा सकती हैं. सॉल्यूशन जल्दी मिलते हैं. वो मानती हैं कि फेल होना सीखने का हिस्सा है. एआई से फेल होने का डर कम होता है, लेकिन असल प्रोसेस में फेलियर से ही समझ आती है. स्टोरीटेलिंग एक लंबी प्रक्रिया है.

Advertisement

यह भी पढ़ें: India Today Conclave 2026: कैसे काम करता है अडानी ग्रुप? करण अडानी बोले- 3 चीजों पर फोकस

भारत में प्रदूषण के लिए क्या करें?

दिल्ली के प्रदूषण जैसे मुद्दे पर मेलाटी कहती हैं कि पहले सॉल्यूशन ढूंढना चाहिए. फिर लोगों को जोड़ना चाहिए. एक रात में दुनिया नहीं बदल सकती. टाइमलाइन बनानी होगी. अमेरिका-ईरान जंग से पर्यावरण पर असर पड़ रहा है, लेकिन हमें सकारात्मक उम्मीद रखनी चाहिए. अपने आसपास के चेंजमेकर को ढूंढें और उन्हें जोड़ें.

planet paralyses climate change

अगर एक चीज बदलनी हो तो?

मेलाटी कहती हैं कि सबसे पहले अपनी डाइट बदलें. इससे एनिमल एग्रीकल्चर पर दबाव कम होगा और पर्यावरण बेहतर होगा. दूसरा, डरें नहीं. डाइवर्स टीम बनाएं. अलग-अलग बैकग्राउंड वाले लोग साथ आएं तो बेहतर सॉल्यूशन मिलते हैं. टाइमलाइन सेट करें और लगातार कोशिश करें.

महात्मा गांधी से प्रेरणा और फेलियर की सीख

मेलाटी ने महात्मा गांधी की भूख हड़ताल से सीख ली और इंडोनेशिया में इसका इस्तेमाल किया. उसके बाद गवर्नर से मिलीं. भारत से कनेक्टिविटी बनी. वो कई बार फेल हुईं, खासकर सरकार के साथ बातचीत में फ्रस्ट्रेशन हुआ. लेकिन यूएन में स्पीच देने के बाद लगा कि अब बड़ा बदलाव संभव है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement