अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने घोषणा की है कि इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर मौजूद कुछ एस्ट्रोनॉट्स एक स्वास्थ्य समस्या की वजह से जल्दी पृथ्वी पर लौटेंगे. यह ISS के इतिहास में पहली बार ऐसा नियोजित मेडिकल इवैक्यूएशन है. एस्ट्रोनॉट स्थिर है, लेकिन नासा ने फैसला लिया है कि जोखिम से बचने के लिए उन्हें वापस लाना बेहतर है.
एस्ट्रोनॉट्स की वापसी के कारण क्या हैं?
नासा के अनुसार ISS पर एक एस्ट्रोनॉट को स्वास्थ्य समस्या हुई है, जिसकी वजह से पूरे क्रू-11 को जल्दी वापस बुलाया जा रहा है. मुख्य कारण...
स्वास्थ्य समस्या: एस्ट्रोनॉट को कोई मेडिकल इश्यू हुआ है, लेकिन नासा ने इसका विस्तार से खुलासा नहीं किया है. उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि एस्ट्रोनॉट स्टेबल है. यह समस्या ISS पर किसी चोट, दुर्घटना या स्टेशन के ऑपरेशंस से नहीं जुड़ी है.
नासा के चीफ मेडिकल ऑफिसर जेम्स पोल्क ने कहा कि लिंगरिंग रिस्क (लंबे समय तक रहने वाला जोखिम) और डायग्नोसिस पर सवाल (बीमारी की सही पहचान पर अनिश्चितता) की वजह से यह फैसला लिया गया.
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समय: यह घटना 7 जनवरी 2026 (बुधवार) को हुई, जब नासा ने स्पेसवॉक (अंतरिक्ष में बाहर निकलकर काम) को स्थगित कर दिया. अगले दिन (8 जनवरी, गुरुवार) नासा ने घोषणा की कि क्रू-11 कुछ दिनों में लौटेगा.
LIVE: NASA leadership discusses the @Space_Station and its crew. https://t.co/AHADoGBR8h
— NASA (@NASA) January 8, 2026
क्रू की जानकारी: वापस लौटने वाले चार एस्ट्रोनॉट्स हैं - अमेरिका के माइक फिंके और जेना कार्डमैन, जापान के किमिया युई और रूस के ओलेग प्लाटोनोव. ये क्रू-11 स्पेसएक्स मिशन का हिस्सा हैं, जो 1 अगस्त 2025 से ISS पर हैं. सामान्यतः ऐसे मिशन 6 महीने के होते हैं. ये पहले से ही वापसी के करीब थे, लेकिन अब कुछ हफ्ते पहले लौटेंगे.
नासा ने कहा कि यह कोई इमरजेंसी नहीं है. एस्ट्रोनॉट की गोपनीयता के कारण ज्यादा डिटेल्स नहीं दिए गए. यह ISS के 25 सालों के इतिहास में पहली बार है जब किसी मेडिकल कारण से पूरे क्रू को वापस बुलाया जा रहा है. पहले भी स्वास्थ्य समस्याएं हुई हैं, लेकिन इतना बड़ा कदम नहीं उठाया गया.
स्पेसवॉक (EVA) की तैयारी से जुड़े संभावित जोखिम
क्रू स्पेसवॉक की तैयारी कर रहा था, जिसमें फिंके और कार्डमैन को पावर अपग्रेड का काम करना था. स्पेसवॉक के लिए एस्ट्रोनॉट्स को स्पेससूट में जाना पड़ता है, जो शुद्ध ऑक्सीजन पर 1/3 दबाव (प्योर ऑक्सीजन सूट एटमॉस्फियर) में काम करता है. वहीं, ISS सामान्य वायुमंडलीय दबाव पर चलता है, जिसमें 80% नाइट्रोजन होती है.
इस बदलाव से डीकंप्रेशन सिकनेस (नाइट्रोजन के बुलबुले बनने से होने वाली बीमारी, जैसे गोताखोरों को होती है) का खतरा होता है. इसलिए तैयारी में एक दिन लंबी प्रक्रिया होती है, जिसमें शरीर से नाइट्रोजन निकाली जाती है...
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पुरानी विधि (कैंप आउट प्रोटोकॉल): एस्ट्रोनॉट्स एयरलॉक में रात भर सोते थे, जहां दबाव 2/3 रखा जाता था और ऑक्सीजन बढ़ाई जाती थी.
नई विधि: अब एक्सरसाइज-बेस्ड प्रोटोकॉल इस्तेमाल होता है. इसमें शुद्ध ऑक्सीजन प्री-ब्रीदिंग (सांस लेना) और सूट में या साइकिल एर्गोमीटर पर व्यायाम किया जाता है. व्यायाम से नाइट्रोजन तेजी से निकलती है. प्रक्रिया छोटी हो जाती है.
सूट पहनने और चेकआउट: इसके बाद पूरा सूट पहनने और जांच की प्रक्रिया होती है.
सांस लेने के प्रोटोकॉल्स (मॉडिफाइड ब्रीदिंग) में कुछ गलत होने की संभावना रहती है. जैसे, ऑक्सीजन का स्तर गलत होना, दबाव में अचानक बदलाव या नाइट्रोजन पूरी तरह न निकलना. विशेषज्ञों का मानना है कि स्वास्थ्य समस्या स्पेसवॉक की इसी तैयारी से जुड़ी हो सकती है, हालांकि नासा ने इसकी पुष्टि नहीं की है.
.@NASA is returning @SpaceX’s Crew-11 mission to Earth earlier than planned due to a crew member’s medical concern while reviewing options to advance Crew-12’s launch. https://t.co/AMIVh7zC9P
— International Space Station (@Space_Station) January 9, 2026
यह कदम क्यों उठाया गया?
नासा ने यह फैसला एस्ट्रोनॉट की सुरक्षा को सबसे ऊपर रखते हुए लिया. मुख्य वजहें...
जोखिम से बचाव: ISS पर मेडिकल सुविधाएं सीमित हैं. अगर कोई बीमारी या समस्या है जिसकी सही डायग्नोसिस नहीं हो पा रही, तो पृथ्वी पर बेहतर इलाज संभव है. नासा के एसोसिएट एडमिनिस्ट्रेटर अमित क्षत्रिय ने कहा कि यह पहली बार प्लान्ड मेडिकल इवैक्यूएशन है, जो असामान्य है लेकिन जरूरी भी.
ट्रेनिंग का इस्तेमाल: क्रू ने अपनी ट्रेनिंग का इस्तेमाल करके स्थिति को संभाला है. नासा ने कहा कि स्थिति स्थिर होने के बाद सावधानीपूर्वक विचार-विमर्श से फैसला लिया गया. इससे ISS पर चल रहे कामों पर कम असर पड़ेगा.
मिशन की प्राथमिकता: नासा का कहना है कि मिशन को सुरक्षित चलाना हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है. वे सभी विकल्पों पर विचार कर रहे थे, जिसमें क्रू-11 के मिशन का जल्दी अंत शामिल था. इससे अगला अमेरिकी मिशन पहले शुरू हो सकता है, लेकिन अभी डिटेल्स नहीं दिए गए.
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यह कदम दिखाता है कि नासा कितनी सावधानी बरतता है. अंतरिक्ष में स्वास्थ्य समस्याएं गंभीर हो सकती हैं, क्योंकि गुरुत्वाकर्षण न होने से शरीर पर असर पड़ता है. जैसे हड्डियां कमजोर होना या रेडिएशन का खतरा.
क्या स्पेस स्टेशन एस्ट्रोनॉट्स के बिना खाली हो जाएगा?
नहीं, ISS पूरी तरह खाली नहीं होगा. वहां अभी भी एस्ट्रोनॉट्स रहेंगे...
अमेरिकी मौजूदगी: अमेरिका के क्रिस्टोफर विलियम्स ISS पर रहेंगे, जो रूसी मिशन से नवंबर 2025 में पहुंचे थे. इससे अमेरिका की मौजूदगी बनी रहेगी.
रूसी एस्ट्रोनॉट्स: रूस के सर्गेई कुद-सवर्चकोव और सर्गेई मिकाएव भी वहां हैं, जो सोयुज स्पेसक्राफ्ट से पहुंचे थे.
कुल क्रू: क्रू-11 के चार सदस्य लौटेंगे, लेकिन तीन सदस्य (विलियम्स और दो रूसी) रहेंगे. ISS पर हमेशा कम से कम कुछ लोग रहते हैं, क्योंकि यह 2000 से लगातार वहां कोई रह रहा है.
भविष्य: नासा ने कहा कि अगला अमेरिकी मिशन पहले शुरू हो सकता है, ताकि ISS पर काम जारी रहे. ISS मार्स मिशनों के लिए रिसर्च का केंद्र है. 2030 के बाद डीकमीशन होगा.
क्या कोई खतरनाक या संदिग्ध बीमारी का प्रकोप है, या कुछ और हुआ है?
नासा के अनुसार, यह कोई खतरनाक बीमारी का प्रकोप (आउटब्रेक) या संदिग्ध घटना नहीं है. मुख्य बातें...
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बीमारी नहीं: अधिकारियों ने साफ कहा कि यह कोई इमरजेंसी नहीं है. ISS पर कोई चोट या ऑपरेशन से जुड़ी समस्या नहीं है. कोई वायरस, बैक्टीरिया या महामारी जैसी बात नहीं कही गई. एस्ट्रोनॉट स्थिर है, और यह लिंगरिंग रिस्क से जुड़ा है. मतलब लंबे समय तक रहने वाली समस्या जो स्पष्ट नहीं है.
कोई संदेह नहीं: नासा ने जोर देकर कहा कि क्रू ने ट्रेनिंग के अनुसार काम किया और स्थिति को संभाला है. कोई दुर्घटना, हमला या रहस्यमयी घटना का जिक्र नहीं है. यह सिर्फ एक मेडिकल कंसर्न है, जो गोपनीयता के कारण विस्तार से नहीं बताया गया.
अपडेट: नासा ने कहा कि अगले 24 घंटों में और जानकारी देंगे. अभी तक कोई नई रिपोर्ट नहीं आई कि यह कोई खतरनाक चीज है.
कुल मिलाकर, यह एक सावधानीपूर्ण कदम है, न कि कोई बड़ा खतरा. नासा और उसके पार्टनर्स (जैसे रूस, जापान) ऐसी स्थितियों के लिए ट्रेनिंग करते हैं. ISS पर स्वास्थ्य जांच नियमित होती है. यह घटना दिखाती है कि वे कितने तैयार हैं. आने वाले दिनों में क्रू की सुरक्षित वापसी पर नजर रहेगी. ISS का काम बिना रुके जारी रहेगा.