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क्या वैलेंटाइन का प्यार असली है... इंसान हर 10 मिनट में बदल रहा है, फिर प्रेम किससे है?

मौसम की तरह इंसान भी हर पल बदलता है, तो क्या आप जिससे प्यार करते हैं... वो 10 मिनट पहले वाला व्यक्ति ही है. क्योंकि साइंस कहता है कि इंसान का शरीर हमेशा बदल रहा है. हर 7-10 साल में शरीर लगभग पूरी तरह नया हो जाता है. ऐसे में क्या सच में उसी इंसान से प्यार कर रहे होते हैं, जिसे प्रपोज किया था. या शादी की थी?

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इंसान का शरीर जिंदा मशीन है, जो हर पर बदल रहा है. तो आप प्यार किससे करते हैं. (Photo: Getty)
इंसान का शरीर जिंदा मशीन है, जो हर पर बदल रहा है. तो आप प्यार किससे करते हैं. (Photo: Getty)

वैलेंटाइन डे है... चारों तरफ प्यार का खुमार चढ़ा हुआ है. लेकिन एक गहरा सवाल मन में घूमता है...

क्या आप सच में उसी इंसान से प्यार करते हैं जिससे 10 मिनट पहले करते थे? 

हमारा शरीर तो हर पल बदल रहा है – नई कोशिकाएं बन रही हैं, पुरानी मर रही हैं. वैज्ञानिकों ने कार्बन-14 डेटिंग तकनीक से साबित किया है कि शरीर की ज्यादातर कोशिकाओं की औसत उम्र 7-10 साल होती है (Frisén et al., Cell, 2005). 

हर 7-10 साल में शरीर लगभग पूरी तरह नया हो जाता है. फिर क्या प्यार भी वही रहता है? 

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शरीर कैसे बदलता रहता है? 

हमारा शरीर एक जिंदा मशीन है जो खुद को लगातार ठीक करता रहता है. कोशिकाएं (Cella) पुरानी होकर खत्म होती हैं. फिर और नई बनती हैं. स्वीडन के करोलिंस्का इंस्टीट्यूट के शोधकर्ता जोनास फ्रिसेन की टीम ने परमाणु बम टेस्ट से बचे कार्बन-14 आइसोटोप का इस्तेमाल करके कोशिकाओं की उम्र मापी. इससे पता चला कि अलग-अलग अंग अलग गति से रिन्यू होते हैं...

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पेट और आंत की कोशिकाएं: हार्वर्ड स्टेम सेल इंस्टीट्यूट की 2917 की स्टडी के मुताबिक हर 5-7 दिन में पूरी तरह बदल जाती हैं, ताकि पाचन का काम बिना रुके चले. 

टेस्ट बड्स: जर्नल ऑफ सेल बायोलॉजी में छपी स्टडी के हिसाब ते हर 10-14 दिन में नई हो जाती हैं, लेकिन पुराने स्वाद की यादें दिमाग में बनी रहती हैं. 

त्वचा की ऊपरी परत (एपिडर्मिस): हर 2-4 हफ्ते में पूरी तरह रिन्यू हो जाती है.

लाल रक्त कोशिकाएं: हर 120 दिन (4 महीने) में नई बन जाती हैं – खून दान करने के बाद भी 12 हफ्ते में पूरा स्टॉक रिन्यू हो जाता है.

लिवर: 2022 में सेल सिस्टम्स जर्नल की स्टडी के मुताबिक कोशिकाओं की औसत उम्र 200-300 दिन होती है, लेकिन कुछ कोशिकाएं सालों तक जीवित रहती हैं. 

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हड्डियां: पूरी तरह बदलने में 7-10 साल लग सकते हैं. उम्र बढ़ने पर यह प्रक्रिया धीमी हो जाती है. 

इन अध्ययनों से साफ है कि शरीर लगातार खुद को अपडेट करता रहता है.

लेकिन कुछ हिस्से कभी नहीं बदलते

सब कुछ बदलने के बावजूद कुछ कोशिकाएं जीवनभर वही रहती हैं...

  • आंखों की लेंस कोशिकाएं: जन्म के बाद कोई नई कोशिका नहीं बनती. 
  • सेरेब्रल कॉर्टेक्स के न्यूरॉन्स: वयस्क दिमाग में ये कोशिकाएं आमतौर पर नहीं बदलतीं – न्यूरोजेनेसिस बहुत सीमित है. 

सबसे अहम: आपकी चेतना (Consciousness), खुद की पहचान और यादें इन स्थाई न्यूरॉन्स में सुरक्षित रहती हैं. यही वजह है कि आप वही इंसान बने रहते हैं.

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प्यार किससे है – बदलते शरीर से या स्थायी चेतना से?

यह सवाल प्राचीन ग्रीक दार्शनिक प्लूटार्क के 'शीप ऑफ थीसियस' पैराडॉक्स से जुड़ा है. वो कहते हैं कि अगर जहाज के सारे हिस्से बदल दिए जाएं, तो क्या वह वही जहाज रहता है? 

ठीक वैसे ही, आपका पार्टनर हर पल थोड़ा बदल रहा है, लेकिन प्यार यादों, भावनाओं और उसकी 'एसेंस' से होता है.

वैज्ञानिक अध्ययन बताते हैं कि प्यार दिमाग के स्थाई हिस्सों और हार्मोन्स से जुड़ा है. ऑक्सीटोसिन (लगाव का हार्मोन) और डोपामाइन (खुशी का रसायन) भावनाओं को मजबूत बनाते हैं. fMRI स्कैन दिखाते हैं कि प्यार में दिमाग के रिवार्ड सिस्टम सक्रिय होते हैं, जो यादों पर आधारित होते हैं.

शरीर बदल जाए, लेकिन ये भावनाएं और यादें नहीं बदलतीं.

क्या प्यार पूरी तरह असली है? 

हां, वैलेंटाइन का प्यार 100% सच्चा है. शरीर बदलता रहे, लेकिन प्यार उस स्थायी चेतना, यादों और व्यक्तित्व से जुड़ा है जो कभी नहीं बदलता. इस वैलेंटाइन डे पर फूल-गिफ्ट के साथ उन यादों को सेलिब्रेट कीजिए जो समय की कसौटी पर खरी उतरती हैं. प्यार शरीर का नहीं, आत्मा का नाम है.

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