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डिफेंस कंपनी अब बनाएगी सैटेलाइट... अंतरिक्ष में कचरा कम करने पर करेगी काम

भारत की प्रमुख रक्षा कंपनी सैमटेल एवियोनिक्स अब स्पेस टेक्नोलॉजी और स्वदेशी ड्रोन बनाने में तेजी से आगे बढ़ रही है. कंपनी का लक्ष्य जल्द ही ₹1000 करोड़ का ऑर्डर बुक हासिल करना है. LEO सैटेलाइट और लंबी उड़ान वाले एंटी-ड्रोन ड्रोन्स बनाएगी. निर्यात बढ़ाकर 50% करने का प्लान है.

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ये है डिस्प्ले जो वायुसेना, थलसेना इस्तेमाल कर रही है. (Photo: ITG)
ये है डिस्प्ले जो वायुसेना, थलसेना इस्तेमाल कर रही है. (Photo: ITG)

भारत की प्रमुख रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी सैमटेल एवियोनिक्स ने आत्मनिर्भर भारत को नई ऊंचाई देने के लिए बड़ा कदम उठाया है. कंपनी अब स्पेस टेक्नोलॉजी और पूरी तरह स्वदेशी ड्रोन सिस्टम बनाने में तेजी से विस्तार कर रही है. उसका लक्ष्य जल्द ही ₹1000 करोड़ का ऑर्डर बुक हासिल करना है.

पिछले 5 सालों में कंपनी कॉकपिट डिस्प्ले और HMI सिस्टम से आगे बढ़कर सेंसर्स, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और एडवांस्ड डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स में मजबूत हो चुकी है. अब उसके प्रोडक्ट्स भारतीय वायुसेना और थलसेना को हो रहे हैं. जल्द ही नौसेना को भी सप्लाई होंगे. 

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ये प्रोडक्ट्स अब ऑपरेशनल एयरक्राफ्ट और हेलिकॉप्टरों पर लगाए जा चुके हैं. इससे दुनिया भर में भारतीय टेक्नोलॉजी पर भरोसा बढ़ा है. कंपनी मलेशिया, दक्षिण अफ्रीका और अमेरिका में निर्यात बढ़ा रही है. 

 Samtel Avionics

स्वदेशी ड्रोन डिवीजन शुरू

समतल ने नया इंडिजिनस ड्रोन डिवीजन लॉन्च किया है. यहां पूरी तरह भारतीय तकनीक पर आधारित लंबी उड़ान वाले ड्रोन्स बनाए जाएंगे. इनमें एडवांस्ड पेलोड और एंटी-ड्रोन क्षमता होगी. भारत का ड्रोन बाजार हर साल ₹5000 करोड़ की गति से बढ़ रहा है. कंपनी इसमें बड़ा हिस्सा बनना चाहती है. साथ ही ड्रोन्स के रखरखाव (MRO) की पूरी सुविधा भी तैयार की जाएगी.

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अब स्पेस सेक्टर में प्रवेश

कंपनी स्पेस क्षेत्र में भी कदम रख रही है. वह LEO (लो अर्थ ऑर्बिट) और मिनिएचर सैटेलाइट्स बनाएगी जो कम्युनिकेशन और IoT सेवाओं के लिए इस्तेमाल होंगे. पहला स्पेस प्रोजेक्ट कुछ महीनों में शुरू होगा. प्रोटोटाइप और कॉमर्शियल उपयोग अगले 2 सालों में होने वाला है.

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कंपनी के CEO और MD पुनीत कौरा ने कहा कि हम स्पेस टेक्नोलॉजी में खासकर LEO और स्पेस डेब्री क्लियरिंग मैकेनिज्म पर फोकस कर रहे हैं. आज इस क्षेत्र के लिए इससे बेहतर समय नहीं हो सकता. कंपनी के 60% कर्मचारी रिसर्च और डेवलपमेंट में लगे हैं. एक्सपोर्ट अभी 25-30% है, जिसे भविष्य में 50% तक बढ़ाने का लक्ष्य है.

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