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बीच समंदर क्रूज शिप पर हंतावायरस का हमला, तीन की मौत, कई बीमार

क्रूज शिप पर हंतावायरस की वजह से तीन लोगों की मौत हो गई. यह वायरस चूहों से फैलता है. फ्लू जैसे लक्षणों के बाद फेफड़ों में घातक संक्रमण करता है. 40% तक मौत का खतरा रहता है.

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अटलांटिक महासागर में चल रहे है एक क्रूज शिप पर हंतावायरस के संक्रमण से 3 लोगों की मौत हो गई है. कई लोग बीमार हैं. (Photo: ITG)
अटलांटिक महासागर में चल रहे है एक क्रूज शिप पर हंतावायरस के संक्रमण से 3 लोगों की मौत हो गई है. कई लोग बीमार हैं. (Photo: ITG)

अटलांटिक महासागर में चल रहे एक क्रूज शिप पर तीन लोगों की मौत हो गई. कुछ और लोग बीमार हैं. वजह बताई जा रही है हंतावायरस का संक्रमण. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि इसकी जांच चल रही है. इस बीमारी ने पिछले साल तब ध्यान खींचा जब मशहूर अभिनेता जीन हैकमैन की पत्नी बेट्सी अराकावा की न्यू मैक्सिको में हंतावायरस से मौत हो गई. 

हंतावायरस क्या है और यह कहां से आया?

हंतावायरस सदियों पुराना वायरस है. एशिया और यूरोप में इसके कई प्रकोप पहले भी हो चुके हैं. यह वायरस खून की उल्टी और किडनी फेलियर से जुड़ा है. 1990 के शुरुआती सालों में अमेरिका के दक्षिण-पश्चिमी इलाकों में एक नया रूप सामने आया जिसे हंतावायरस पल्मोनरी सिंड्रोम (HPS) कहा जाता है. 

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यह तेजी से फेफड़ों को प्रभावित करता है. 1993 में अमेरिका के फोर कॉर्नर्स इलाके में बड़े प्रकोप के बाद CDC ने इसकी निगरानी शुरू की. हंतावायरस मुख्य रूप से चूहों और दूसरे जानवरों से फैलता है. इनके मूत्र, लार या मल के संपर्क में आने पर, खासकर जब ये हवा में उड़ जाते हैं, तो इंसान को संक्रमण हो जाता है. 

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घर, झोपड़ी या शेड साफ करते समय सबसे ज्यादा खतरा होता है. क्रूज शिप पर संक्रमण कैसे फैला, यह अभी जांच का विषय है. WHO के अनुसार यह वायरस इंसान से इंसान में बहुत कम फैलता है, लेकिन संभव है.

Hantavirus Outbreak

लक्षण क्या होते हैं?

बीमारी शुरू में फ्लू जैसी लगती है. बुखार, ठंड लगना, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द आम लक्षण हैं. शुरुआती दिनों में इसे फ्लू से अलग पहचानना मुश्किल होता है. बाद में सीने में जकड़न होती है. फेफड़ों में लिक्विड भर जाता है. यह जानलेवा हो सकता है. संक्रमण के 1 से 8 हफ्ते बाद लक्षण दिखते हैं. दूसरा रूप (हेमोरेजिक फीवर विद रीनल सिंड्रोम) में किडनी खराब होती है.

अमेरिका में होने वाला पल्मोनरी सिंड्रोम बहुत खतरनाक है. इसमें करीब 40% मरीजों की मौत हो जाती है. दूसरे रूप में मौत का खतरा 1% से 15% तक रहता है. शुरुआती इलाज से बचने की संभावना बढ़ जाती है, लेकिन कोई खास दवा या इलाज उपलब्ध नहीं है. डॉक्टर सपोर्टिव केयर देते हैं.

अमेरिका में ज्यादातर मामले पश्चिमी राज्यों में होते हैं. न्यू मैक्सिको और एरिजोना हॉटस्पॉट हैं. ग्रामीण इलाकों में चूहों और इंसानों के संपर्क की ज्यादा संभावना रहती है.

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रोकथाम का सबसे अच्छा तरीका

इस वायरस से बचने का सबसे अच्छा तरीका चूहों और उनके मल-मूत्र से दूर रहना है. अगर साफ-सफाई करनी हो तो दस्ताने पहनें, ब्लीच का घोल इस्तेमाल करें. झाड़ूया वैक्यूम क्लीनर का इस्तेमाल न करें क्योंकि इससे वायरस हवा में फैल सकता है.

वर्तमान में क्रूज शिप पर हुए प्रकोप की पूरी जांच चल रही है. लैब टेस्टिंग और एपिडेमियोलॉजिकल जांच जारी है. वायरस का जीनोम सीक्वेंसिंग भी हो रहा है. WHO और अमेरिकी स्वास्थ्य अधिकारी स्थिति पर नजर रखे हुए हैं.

वैज्ञानिकों को अभी भी कई बातें समझ नहीं आई हैं. जैसे कुछ लोगों में बीमारी हल्की क्यों रहती है और कुछ में बहुत गंभीर. एंटीबॉडी कैसे बनते हैं, इसका भी पूरा पता नहीं है. रिसर्च जारी है. हंतावायरस दुर्लभ लेकिन बहुत खतरनाक बीमारी है. क्रूज शिप जैसी बंद जगहों पर इसका फैलना चिंता का विषय है. 

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