जापान के प्रशांत तटीय इलाकों में शक्तिशाली टाइफून डुजुआन ने तबाही मचाई है. इस टाइफून के कारण हुई मूसलाधार बारिश से कई जगहों पर भूस्खलन हुए. सरकारी चैनल एनएचके के अनुसार अब तक चार लोगों की मौत हो चुकी है जबकि छह लोग लापता हैं. Photo: Reuters
टोक्यो इलेक्ट्रिक पावर कंपनी यानी टेपको ने बताया कि क्षेत्र में करीब 45 हजार घरों की बिजली आपूर्ति ठप हो गई है. टाइफून अब जापान से दूर उत्तर-पूर्व दिशा में आगे बढ़ चुका है लेकिन उसके पीछे छोड़े गए प्रभाव अभी भी लोगों के लिए मुश्किलें पैदा कर रहे हैं. Photo: Reuters
यह घटना इस साल वैश्विक स्तर पर देखी जा रही असामान्य तीव्र बारिश, बाढ़ और उष्णकटिबंधीय चक्रवातों की श्रृंखला का हिस्सा है. पूर्वी एशिया से लेकर उत्तरी अमेरिका और यूरोप तक कई क्षेत्रों में मौसम की चरम घटनाएं बढ़ी हैं. जापान में भी पिछले कुछ महीनों में भारी बारिश की घटनाएं हुई हैं. Photo: Reuters
पिछले महीने चिबा प्रांत में आई बाढ़ ने नरिता हवाई अड्डे पर यात्रियों को फंसा दिया था और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दस हजार से अधिक कारें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थीं. Photo: Reuters
कांनागावा और चिबा प्रांतों में भूस्खलन की घटनाएं सबसे गंभीर रहीं. योकोसुका शहर में कीचड़ के बहाव से साठ वर्षीय महिला की मौत हो गई. अन्य तीन मृतकों की उम्र पचास से अस्सी वर्ष के बीच बताई गई है. ये मौतें कांनागावा और चिबा क्षेत्रों में हुईं. म्यूरा शहर में बचाव दल मलबा हटाकर एक लापता व्यक्ति की तलाश में जुटे हैं. Photo: Reuters
वहां एक घर भूस्खलन की चपेट में आ गया था. भारी बारिश ने नदियों का जलस्तर बढ़ा दिया. चिबा के साकुरा शहर में रहने वाले 37 वर्षीय रिचर्ड योनामाइन ने बताया कि पास की नदी उफान पर आ गई और उनके घर में पानी घुस गया. तीन दशक से अधिक समय से वहां रहने वाले योनामाइन ने कहा कि ऐसा अनुभव पहली बार हुआ. Photo: AFP
वे बारिश शुरू होते ही डरने लगे हैं क्योंकि तेज बारिश तुरंत बड़ी समस्या बन जाती है. स्थानीय निवासी सड़कों से कीचड़ साफ करने में जुटे दिखे.भूस्खलन की घटनाएं पहाड़ी और ढलान वाले इलाकों में आम हैं लेकिन इतनी तीव्र बारिश ने मिट्टी को अस्थिर बना दिया. घरों में कीचड़ घुसने से जान का खतरा बढ़ गया. बुजुर्ग और कमजोर वर्ग सबसे अधिक प्रभावित हुए. Photo: Reuters
टोक्यो इलेक्ट्रिक पावर कंपनी ने अपनी वेबसाइट पर जानकारी दी कि क्षेत्र में लगभग 45 हजार घरों में बिजली नहीं है. तूफान और भारी बारिश से बिजली के खंभे, तार और सबस्टेशन क्षतिग्रस्त हुए होंगे. बिजली कटौती से घरों में रोशनी, पानी की सप्लाई और संचार सेवाएं प्रभावित होती हैं. Photo: AFP
अस्पतालों और आपात सेवाओं पर दबाव बढ़ जाता है. बहाली का काम शुरू हो चुका है लेकिन कुछ इलाकों में समय लग सकता है. सड़कें कीचड़ और मलबे से अवरुद्ध हो गईं. यातायात प्रभावित हुआ. कुछ इलाकों में नदियों के किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया. Photo: AFP
स्थानीय प्रशासन ने सतर्कता अलर्ट जारी रखे. टाइफून के दूर जाने के बावजूद मिट्टी की अस्थिरता बनी रह सकती है जिससे और भूस्खलन का खतरा बना हुआ है. टाइफून डुजुआन इस साल की चरम मौसमी घटनाओं की कड़ी में जुड़ गया है. दुनिया भर में तीव्र बारिश और चक्रवातों की संख्या बढ़ी है. Photo: AFP
जापान में पहले भी टाइफून आते रहे हैं लेकिन हाल के वर्षों में उनकी तीव्रता और बारिश की मात्रा बढ़ने के संकेत मिले हैं. चिबा में पिछले महीने की बाढ़ ने नरिता हवाई अड्डे जैसे महत्वपूर्ण केंद्र को प्रभावित किया था. इससे आर्थिक नुकसान के साथ-साथ लोगों में भय भी बढ़ा है. Photo: AFP
जापान आपदा प्रबंधन में अनुभवी देश माना जाता है. यहां भूकंप, सुनामी और टाइफून के लिए नियमित ड्रिल होती हैं. फिर भी भारी बारिश और अचानक भूस्खलन जैसी घटनाएं चुनौती पेश करती हैं. पहाड़ी इलाकों में घर बनाने और जल निकासी व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत बार-बार रेखांकित होती है. चेतावनी प्रणालियां सक्रिय रहीं लेकिन कुछ जगहों पर प्रतिक्रिया का समय कम मिला. Photo: Reuters
बचाव दल मलबा हटाकर लापता लोगों की तलाश में लगे हैं. भारी मशीनों और स्थानीय स्वयंसेवकों की मदद ली जा रही है. मृतकों के परिवारों को सहायता दी जा रही है. बिजली बहाली और सड़कें साफ करने को प्राथमिकता दी गई है. मौसम विभाग लगातार निगरानी कर रहा है क्योंकि बाद में और बारिश होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता. Photo: Reuters
स्थानीय निवासी अब अधिक सतर्क हो गए हैं. योनामाइन जैसे लोगों का अनुभव बताता है कि छोटी-छोटी नदियां भी उफान पर आ सकती हैं. घरों में पानी घुसने से सामान और संपत्ति का नुकसान होता है. लंबे समय में जल निकासी सिस्टम सुधारने, ढलानों को स्थिर करने और हरियाली बनाए रखने जैसे कदम जरूरी हैं. Photo: Reuters
टाइफून डुजुआन ने एक बार फिर याद दिलाया कि जलवायु पैटर्न बदल रहे हैं. जापान जैसे तैयार देश में भी जान-माल का नुकसान होना चिंता का विषय है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मौसम संबंधी सहयोग और शोध को बढ़ावा देने की जरूरत है. फिलहाल प्रभावित क्षेत्रों में राहत और पुनर्निर्माण का काम चल रहा है. Photo: Reuters
लोगों को आधिकारिक अपडेट्स पर ध्यान देने और सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है. यह घटना भविष्य की तैयारियों को और मजबूत बनाने का अवसर भी प्रदान करती है. Photo: Reuters