वैज्ञानिकों ने अंटार्कटिका में एक अनोखे सुरक्षित स्थान में प्राचीन ग्लेशियर की बर्फ के टुकड़े सील कर दिए. यह दुनिया का पहला ऐसा आइस मेमोरी सैंक्चुअरी (Ice Memory Sanctuary) है, जो तेजी से गायब हो रहे ग्लेशियरों के जलवायु रिकॉर्ड को सदियों तक बचाए रखने के लिए बनाया गया है. Photo: CNRS
आइस मेमोरी फाउंडेशन (Ice Memory Foundation) ने यह पहल शुरू की, जो यूरोपीय रिसर्च संस्थानों का एक समूह है. पहले दो आइस कोर (बर्फ के सिलेंडर) यूरोप के आल्प्स से लिए गए. फ्रांस के मॉन्ट ब्लांक (Mont Blanc) और स्विट्जरलैंड के ग्रैंड कॉम्बिन (Grand Combin) से. Photo: CNRS
ये कोर 2016 और 2025 में ड्रिल किए गए थे. इन्हें इटली से जहाज और प्लेन द्वारा 50 दिनों की ठंडी यात्रा के बाद अंटार्कटिका पहुंचाया गया. कॉनकॉर्डिया स्टेशन (Concordia Station) पर 3200 मीटर की ऊंचाई पर, अंटार्कटिक पठार के बीच में स्थित है. यहां तापमान हमेशा -52 डिग्री सेल्सियस रहता है- कोई फ्रिज की जरूरत नहीं. Photo: CNRS
यह एक बर्फ की गुफा (snow cave) है: 35 मीटर लंबी, 5 मीटर ऊंची और चौड़ी, जमीन से 10 मीटर नीचे खोदी गई. वैज्ञानिकों ने ब्लू रिबन काटकर औपचारिक रूप से इसे खोला और बर्फ के बॉक्स रखे. आइस कोर पृथ्वी के पुराने मौसम का समय कैप्सूल हैं. इनमें धूल, गैसें, ज्वालामुखी सामग्री, पानी के आइसोटोप आदि होते हैं, जो हजारों-लाखों साल पुराने तापमान, वर्षा और वातावरण बताते हैं. Photo: CNRS
ग्लोबल वार्मिंग से ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं- हर साल हजारों गायब हो जाएंगे. 2025 तीसरा सबसे गर्म साल रहा. भविष्य के वैज्ञानिक नई तकनीकों से इनमें छिपे राज खोल सकेंगे, जो आज हमें दिखाई नहीं देते. यह मानवता के लिए विरासत है- राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त, सभी वैज्ञानिकों के लिए खुला. Photo: CNRS
आने वाले दशकों में एंडीज, हिमालय, ताजिकिस्तान आदि से और आइस कोर लाए जाएंगे. यह रेस अगेंस्ट टाइम है- ग्लेशियर गायब होने से पहले इनका डेटा बचाना जरूरी. यह प्रोजेक्ट 2015 से चल रहा था. जनवरी 2026 में पहला चरण पूरा हुआ. वैज्ञानिक कहते हैं कि हम आखिरी पीढ़ी हैं जो कुछ कर सकते हैं. यह पर्यावरण और विज्ञान के लिए बड़ा कदम है. Photo: CNRS