2024 में भारत ने ईरान के साथ 10 साल का समझौता किया था. इसके तहत इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड (IPGL) को ईरान के चाबहार पोर्ट में शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल चलाने और विकसित करने का अधिकार मिला था. यह पोर्ट इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो भारत को अफगानिस्तान, मध्य एशिया, रूस और यूरोप से जोड़ता है- पाकिस्तान को बायपास करके. भारत ने इसमें करीब लगभग ₹4000 करोड़ निवेश किया है.
क्या हुआ?
सितंबर 2025 में अमेरिका ने ईरान पर फिर से सख्त प्रतिबंध लगा दिए. इससे पहले 2018 में छूट मिली थी, लेकिन ट्रंप प्रशासन ने इसे रद्द कर दिया. अमेरिका के OFAC (ऑफिस ऑफ फॉरेन असेट्स कंट्रोल) ने भारत को 6 महीने की छूट दी- अक्टूबर 2025 से अप्रैल 2026 तक- ताकि भारत सभी गतिविधियां बंद कर सके.
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इस दौरान
IPGL के बोर्ड से सरकारी डायरेक्टरों ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया. कंपनी की वेबसाइट बंद कर दी गई, ताकि जुड़े लोग अमेरिकी प्रतिबंधों से बच सकें. भारत ने $120 मिलियन ट्रांसफर करके कर्ज और बकाया चुकाए.
12 जनवरी 2026 को राष्ट्रपति ट्रंप ने घोषणा की कि ईरान के साथ व्यापार करने वाले किसी भी देश पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगेगा. इससे भारत पर दबाव बढ़ा, क्योंकि अमेरिका के साथ व्यापार बहुत बड़ा है.
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फैसले पर प्रतिक्रियाएं
विपक्ष ने इसे अमेरिका के सामने झुकना बताया और राष्ट्रीय हित की अनदेखी कहा. सरकार और समर्थकों ने इसे व्यावहारिक कदम माना- अमेरिका से टकराव से बचना और अर्थव्यवस्था की रक्षा करना जरूरी है.

चाबहार भारत के लिए रणनीतिक है: यह ग्वादर पोर्ट (पाकिस्तान में, चीन द्वारा विकसित) का जवाब है और अफगानिस्तान को मानवीय सहायता (जैसे अनाज, दवाइयां) पहुंचाने का रास्ता देता है.
अभी क्या स्थिति?
अप्रैल 2026 तक छूट है, लेकिन भारत ने पूरी तरह बाहर निकलने का फैसला लिया है. ईरान में बड़े विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं, जो स्थिति को और जटिल बना रहे हैं. भारत अब वैकल्पिक रास्तों पर विचार कर रहा है.