थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में लगभग 48 घंटे तक लगातार भारी बारिश के बाद अधिकारियों ने पूरे शहर में बाढ़ आपदा घोषित कर दी है. शनिवार को यह घोषणा हुई जब घरों, दुकानों और सड़कों पर पानी भर गया और कई जगहों पर लोग कमर तक पानी में चलने को मजबूर हो गए. Photo: AFP
कुछ इलाकों में गुरुवार दोपहर से शनिवार सुबह तक 300 मिलीमीटर से ज्यादा बारिश दर्ज की गई. प्रधानमंत्री अनुतिन चार्नविराकुल लंदन की अपनी यात्रा बीच में ही छोड़कर देश वापस लौट आए. बैंकॉक मेट्रोपॉलिटन एडमिनिस्ट्रेशन ने शहर के सभी 50 जिलों में आपदा घोषित की. Photo: AFP
इससे स्थानीय संगठनों को विशेष अधिकार मिल गए हैं ताकि वे तेजी से राहत और बचाव कार्य कर सकें. गवर्नर चाडचार्ट सित्तीपुंत ने शनिवार दोपहर कहा कि स्थिति स्थिर हो गई है. अगर और बारिश नहीं हुई तो समस्या हल हो जाएगी. उन्होंने बताया कि बारिश रुकने पर बाढ़ का पानी निकालने में दो से तीन दिन लग सकते हैं. Photo: AFP
बारिश ने शहर के नहरों के नेटवर्क को भर दिया और गंदा पानी आसपास के घरों, रेस्तरां, दुकानों और गलियों में घुस गया. 67 वर्षीय विक्रेता सोमकिद फुक-नगम ने बताया कि पानी लगातार आ रहा है और अब कमर तक पहुंच गया है. वह मध्य बैंकॉक के उत्तर में एक नहर के पास रहती हैं. उन्होंने कहा कि दो दिन से दुकान बंद है और कहीं जाना मुश्किल हो गया है. Photo: AFP
63 वर्षीय निवासी अनुतिन मीचमनान ने कहा कि इतने सालों में उन्होंने कभी इतनी लगातार दिनों तक बारिश नहीं देखी. पूर्वी बैंकॉक के कई जिलों में लोग पानी में से मोटरसाइकिल धकेलते या पैदल चलते दिखे. एक प्रमुख सड़क पर खड़ी कारें आधी डूबी हुई थीं. बांग बुआ जिले में एक महिला जांघ तक पानी में खड़ी होकर अपनी दुकान का सामान बचाने की कोशिश कर रही थी. Photo: AFP
सुआन लुआंग जिले में रहने वाले 36 वर्षीय कार्यालय कर्मचारी खेम अमनुईलाफ ने बताया कि उनके इलाके में पानी घुटनों से ऊपर है. उनका नया घर ऊंचा बना हुआ है इसलिए बचा रहा लेकिन आसपास के पुराने घरों में पानी घुस गया. उनके पास दो-तीन दिन का खाना है लेकिन बाद में खाने के लिए पानी में से गुजरना पड़ सकता है. सोमवार को ऑफिस कैसे पहुंचेंगे यह उन्हें समझ नहीं आ रहा. Photo: AFP
कुछ सुविधा स्टोरों की अलमारियां दोपहर तक खाली हो गईं क्योंकि लोग जरूरी सामान खरीदने के लिए दुकानों पर टूट पड़े. गवर्नर ने कम से कम 13 प्रमुख सड़कों के जलमग्न होने की बात कही लेकिन लोगों से घबराने को नहीं कहा. उन्होंने जोर दिया कि भोजन की कमी की चिंता न करें. Photo: AFP
बैंकॉक को कभी पूर्व का वेनिस”कहा जाता था क्योंकि यह पुराने दलदली इलाके पर बसा है और समुद्र तल से महज 1.5 मीटर ऊंचा है. शहर की नहरें पानी निकालने का मुख्य जरिया हैं लेकिन जब वे भर जाती हैं तो पानी चारों तरफ फैल जाता है. गवर्नर चाडचार्ट ने साफ कहा कि समस्या नहरों के भरे होने की है. वे आसपास के प्रांतों के साथ मिलकर पानी को दूसरी दिशाओं से निकालने की कोशिश कर रहे हैं ताकि बैंकॉक में आने वाले पानी की मात्रा कम हो. Photo: AFP
शहर के पंपिंग स्टेशन पूरी क्षमता से चल रहे हैं और कुल मिलाकर प्रति सेकंड 1200 घन मीटर पानी निकाल रहे हैं. एक लाख रेत के थैले तैयार रखे गए हैं. करीब 980 लोग अस्थायी शरण स्थलों में ठहरे हैं और 36 बिस्तर पर पड़े मरीजों को अस्पतालों में स्थानांतरित किया गया है. सोमवार को स्कूल बंद रहेंगे और कुछ अधिकारियों से घर से काम करने को कहा गया है. Photo: AFP
सितंबर बारिश का चरम मौसम होता है लेकिन इस बार स्थिति सामान्य से ज्यादा खराब महसूस हुई. बैंकॉक के ड्रेनेज और सीवरेज विभाग के आंकड़ों के अनुसार एक से 25 सितंबर तक 487 मिलीमीटर बारिश हुई जबकि 1991 से 2020 के औसत में यही अवधि लगभग 269 मिलीमीटर की होती थी. यानी इस साल सितंबर काफी ज्यादा गीला रहा. Photo: AFP
अधिकारियों ने पानी निकालने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है. पंपिंग स्टेशन फुल क्षमता पर हैं और आसपास के प्रांतों से सहयोग लिया जा रहा है. अस्थायी शरण स्थल खोले गए हैं जहां जरूरत मंद लोग ठहर रहे हैं. रेत के थैले बांटने और कमजोर इलाकों को सुरक्षित करने की कोशिश जारी है. गवर्नर ने सोशल मीडिया पर अपडेट देते हुए लोगों को शांत रहने की अपील की. Photo: AFP
फिर भी चुनौतियां बड़ी हैं. लगातार बारिश से जल निकासी प्रणाली पर भारी दबाव पड़ा. पुराने घर और निचले इलाके ज्यादा प्रभावित हुए. यातायात ठप होने से रोजमर्रा का जीवन प्रभावित हुआ. दुकानदारों को नुकसान हुआ क्योंकि कई दिन तक कारोबार बंद रहा. कार्यालय जाने वाले लोग सोमवार को ऑफिस पहुंचने की चिंता कर रहे हैं. Photo: AFP
थाईलैंड के आपदा रोकथाम और शमन विभाग के अनुसार शनिवार को देश के 21 प्रांतों में बाढ़ की सूचना मिली. रविवार को और बारिश की संभावना जताई गई. 2011 में दक्षिण पूर्व एशिया में व्यापक बाढ़ आई थी जिसमें थाईलैंड में 500 से ज्यादा लोग मारे गए और लाखों घर क्षतिग्रस्त हुए. उस घटना की याद अब फिर ताजा हो गई है. Photo: AFP
वैज्ञानिक चेतावनी देते रहे हैं कि जीवाश्म ईंधन के उत्सर्जन से ग्रह गर्म हो रहा है और चरम मौसमी घटनाओं की तीव्रता तथा आवृत्ति बढ़ेगी. बैंकॉक जैसी कम ऊंचाई वाली और घनी आबादी वाली शहरों के लिए यह खतरा और बड़ा है. दलदली भूमि पर बसावट और तेजी से शहरीकरण ने प्राकृतिक जल निकासी को प्रभावित किया है. नहरें जो कभी पानी संभालती थीं अब तेजी से भर जाती हैं. Photo: AFP
इस बाढ़ ने फिर याद दिलाया कि जलवायु अनुकूलन और बेहतर जल निकासी व्यवस्था कितनी जरूरी है. पंपिंग क्षमता बढ़ाने, नहरों की सफाई नियमित रखने और नए निर्माणों में ऊंचाई के मानकों का पालन कराने जैसे कदम लंबे समय में मददगार साबित हो सकते हैं. अल्पकालिक राहत के साथ दीर्घकालिक योजना पर भी ध्यान देने की जरूरत है. Photo: AFP