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Shani Vakri 2026: मीन राशि में वक्री होंगे शनि, 3 राशियां होंगी लकी, कमाई के खुलेंगे नए रास्ते

Shani Vakri 2026:शनि को कर्मफल दाता कहा जाता है. वक्री अवस्था में शनि व्यक्ति को आत्ममंथन, पुराने कर्मों और अधूरे कार्यों की समीक्षा कराते हैं. वहीं, मार्गी होने पर शनि उन कर्मों का प्रत्यक्ष परिणाम देना शुरू करते हैं.

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शनि की उल्टी चाल से बनेगा बड़ा योग
शनि की उल्टी चाल से बनेगा बड़ा योग

Shani Vakri 2026: वैदिक ज्योतिष में शनि ग्रह को अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है. उन्हें कर्मफल दाता, न्याय के प्रतीक और दंडाधिकारी के रूप में जाना जाता है, क्योंकि शनि प्रत्येक व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार परिणाम देते हैं.  शनि लगभग ढाई वर्ष में एक बार राशि परिवर्तन करते हैं और करीब 30 वर्षों बाद गुरु की राशि मीन में प्रवेश कर चुके हैं.  शनि मीन राशि में जून 2027 तक विराजमान रहेंगे.  इस अवधि में वे विभिन्न ग्रहों से युति, दृष्टि और नक्षत्र परिवर्तन करते रहेंगे, जिससे कई शुभ और अशुभ योग बनेंगे.  इसी दौरान शनि कभी अस्त, वक्री और मार्गी अवस्था में भी रहेंगे.वर्तमान में शनि मीन राशि में स्थित है.  27 जुलाई 2026 को रात 1:25 बजे इसी राशि में वक्री हो जाएंगे. शनि लगभग 138 दिनों तक वक्री अवस्था में रहने के बाद 11 दिसंबर 2026 को सुबह 5 बजे मार्गी होंगे. 

मेष राशि (Aries) 

मेष राशि की गोचर कुंडली में शनि बारहवें भाव में स्थित हैं ,इस समय साढ़ेसाती का पहला चरण भी चल रहा है.शनि के वक्री होने पर वे बारहवें भाव के साथ-साथ ग्यारहवें भाव का भी फल देने लगेंगे.

फायदे:

पुराने खर्चों और कर्ज से राहत मिलने की संभावना है. विदेश से जुड़े कार्यों या संपर्कों से लाभ मिल सकते हैं. आय के नए स्रोत बन सकते हैं. रुके हुए धन की वापसी संभव है. आध्यात्मिक झुकाव बढ़ेगा, जिससे मानसिक शांति मिलेगी. 

कर्क राशि (Cancer) 

कर्क राशि के जातकों की कुंडली में शनि नौवें भाव में वक्री होंगे.  यह भाव भाग्य, धर्म, उच्च शिक्षा और लंबी यात्राओं से जुड़ा होता है. 

फायदे:

भाग्य का साथ मिलने लगेगा. करियर में वरिष्ठों और पिता समान व्यक्तियों का सहयोग मिलेगा. उच्च शिक्षा या प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता मिलेगी. धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी. लंबे समय से रुके कामों में गति आएगी. 

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मकर राशि (Capricorn) 

मकर राशि के स्वामी स्वयं शनि हैं और इस राशि के लिए शनि का वक्री होना विशेष प्रभावशाली माना जाता है.  शनि मकर राशि की कुंडली में तीसरे भाव में वक्री होंगे. 

फायदे:

साहस और आत्मविश्वास में वृद्धि होगी. मेहनत का पूरा फल मिलने लगेगा. करियर में नए अवसर और जिम्मेदारियां मिलेगी. भाई-बहनों से सहयोग और संबंधों में सुधार होगा. मीडिया, लेखन, कम्युनिकेशन और बिजनेस से जुड़े लोगों को विशेष लाभ मिलने की संभावना है. 

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