scorecardresearch
 

Premanand Ji Maharaj: सिर्फ पूजा से नहीं मिलता पुण्य, प्रेमानंद महाराज ने इन लोगों को दी चेतावनी

Premanand Ji Maharaj:मंदिर जाना तभी सच में काम आता है, जब इंसान का मन साफ हो और वह अच्छे काम करता हो. अगर दिल में सच्ची श्रद्धा हो और व्यवहार सही हो, तभी भगवान की पूजा का सही फल मिलता है और ईश्वर की कृपा बनी रहती है.

Advertisement
X
प्रेमानंद महाराज (Photo: Instagram/@Bhajanmargofficial)
प्रेमानंद महाराज (Photo: Instagram/@Bhajanmargofficial)

Premanand Ji Maharaj : ईश्वर से जुड़ना जीवन में बहुत अहम माना जाता है. यही वजह है कि लोग विश्वास और श्रद्धा के साथ भगवान की पूजा करते हैं, तीर्थ यात्रा पर जाते हैं , मंदिरों में दर्शन करते हैं. पूजा-पाठ और भजन-कीर्तन के माध्यम से वे भगवान को याद करते हैं. माना जाता है कि जब इंसान दिल से भक्ति करता है, तो उसका मन शांत रहता है, और मन शांत रहता है तो जीवन में संतुलन बना रहता है. लेकिन हर व्यक्ति को भक्ति का फल एक जैसा मिले, यह जरूरी नहीं है. किसी को कितना पुण्य मिलेगा, यह उसकी सोच, व्यवहार और कर्मों पर निर्भर करता है. 

प्रेमानंद जी महाराज ने अपने प्रवचन में इस विषय पर गहराई से रोशनी डाली है. उन्होंने बताया कि कुछ लोग चाहे कितनी भी पूजा करें या कितने ही मंदिरों के दर्शन कर लें, फिर भी उन्हें उसका पुण्य नहीं मिलता. इसके पीछे कारण उनका गलत आचरण और अशुद्ध विचार होते हैं. 

किन लोगों को नहीं मिलता पूजा का फल?

प्रेमानंद महाराज कहते हैं कि जो व्यक्ति बुरा काम करता है, दूसरों को दुख पहुंचाता है या मन में बुरी सोच रखता है, उसकी पूजा का कोई फायदा नहीं होता. अगर कोई सिर्फ भक्त बनने का दिखावा करता है, लेकिन उसका दिल साफ नहीं है, तो मंदिर जाना भी बेकार है. ऐसे लोगों की पूजा सिर्फ दिखावा बनकर रह जाती है. 

भगवान सब कुछ जानते हैं

प्रेमानंद जी बताते हैं कि भगवान हर व्यक्ति के हृदय में रहते हैं और हमारे सभी कर्मों को देख रहे हैं. हम दूसरों के सामने कुछ भी दिखा सकते हैं, लेकिन भगवान से कुछ छिप नहीं सकता. अगर किसी के कर्म गलत हैं, तो केवल पूजा-पाठ करने से कुछ नहीं बदलता. वहीं, अगर किसी का मन शुद्ध है, जिससे वह अच्छे काम करता है, तो भले ही वह हर दिन मंदिर न जाए, उसे फिर भी पुण्य मिलता है. 

Advertisement

सच्ची भक्ति का मार्ग

महाराज का संदेश यह है कि भक्ति करने से पहले अपने काम सही करें, साथ ही अपने विचार अच्छे रखें. भगवान का नाम दिल से याद करें. दूसरों के प्रति दया और प्यार रखें. ऐसा करने से न केवल भगवान की कृपा मिलती है, बल्कि तीर्थों और मंदिरों में जाने का पूरा पुण्य भी अपने आप मिल जाता है. 

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement