Kartik Maas Ki Katha: हिंदू धर्म में कार्तिक महीने को बेहद पवित्र माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इस महीने भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की पूजा करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है. यही वजह है कि लोग कार्तिक मास में सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं और भगवान की पूजा-अर्चना करते हैं. इस दौरान दान करना, दीप जलाना और तुलसी की पूजा करना भी शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इन कामों को करने से भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण का आशीर्वाद मिलता है. वहीं, कार्तिक महीने में पूजा-पाठ के साथ कथा पढ़ने और सुनने का भी विशेष महत्व है. इस महीने से जुड़ी कई कथाएं प्रचलित हैं. इन्हीं में एक कहानी भगवान श्रीकृष्ण और एक बुजुर्ग महिला की है. आइए जानते हैं कार्तिक मास की इस कथा के बारे में.
कार्तिक मास की कथा (Kartik Maas Ki Katha)
पौराणिक कथा के अनुसार, एक गांव में एक बुजुर्ग महिला रहती थी. वह हर साल कार्तिक महीने में नियम से व्रत रखती और सुबह गंगा स्नान करने जाती थी. उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान श्रीकृष्ण रोज उसके घर आते और उसके लिए एक कटोरे में खिचड़ी रख जाते थे. इससे महिला का व्रत पूरा हो जाता था. उसी गांव में उसके घर के पास एक दूसरी महिला भी रहती थी. उसे बुजुर्ग महिला से जलन होती थी. वह मन ही मन सोचती थी कि इस बूढ़ी औरत का कोई सहारा नहीं है, फिर भी इसे रोज खाने के लिए खिचड़ी मिल जाती है.
एक दिन बुजुर्ग महिला हमेशा की तरह कार्तिक स्नान के लिए गंगा चली गई. उसके जाने के बाद भगवान श्रीकृष्ण उसके घर आए और रोज की तरह खिचड़ी का कटोरा रखकर चले गए. तभी उसकी पड़ोसन की नजर उस कटोरे पर पड़ी. उसने देखा कि घर में कोई नहीं है तो वह खिचड़ी उठाकर घर के पीछे फेंक आई. कुछ देर बाद जब बुजुर्ग महिला स्नान करके लौटी तो उसे घर में खिचड़ी नहीं मिली. वह बहुत परेशान हुई और बार-बार यही कहने लगी कि मेरी खिचड़ी कहां चली गई और मेरा कटोरा किसने गायब कर दिया?
जिस जगह पड़ोसन ने खिचड़ी फेंकी थी, वहां कुछ समय बाद एक पौधा उग आया. उस पौधे पर दो सुंदर फूल खिले. एक दिन वहां से राजा गुजर रहे थे. उनकी नजर उन फूलों पर पड़ी तो उन्होंने दोनों फूल तोड़ लिए और महल ले जाकर रानी को दे दिए. रानी ने जब उन फूलों को सूंघा तो कुछ समय बाद वह गर्भवती हो गई. निर्धारित समय पूरा होने पर रानी ने दो पुत्रों को जन्म दिया. दोनों राजकुमार धीरे-धीरे बड़े होने लगे, लेकिन हैरानी की बात यह थी कि वे किसी दूसरे व्यक्ति से बातचीत नहीं करते थे.
हालांकि, जब भी दोनों राजकुमार शिकार के लिए जाते, रास्ते में उन्हें वही बुजुर्ग महिला दिखाई देती. वह आज भी अपने खोए हुए कटोरे को याद करके कहती रहती थी कि मेरी खिचड़ी कहां गई और मेरा कटोरा कहां चला गया? महिला की बात सुनकर दोनों राजकुमार जवाब देते कि हम ही तुम्हारी खिचड़ी हैं और हम ही तुम्हारा बेला हैं.
राजा को पता चला राजकुमारों के जन्म का रहस्य
एक दिन राजा ने दोनों राजकुमारों को उस बुजुर्ग महिला से बात करते हुए देख लिया. उन्हें बड़ा आश्चर्य हुआ, क्योंकि उनके बेटे महल में किसी से बात नहीं करते थे, लेकिन इस महिला के सामने बोलने लगते थे. राजा ने तुरंत उस महिला को राजमहल बुलवाया और उससे इसका कारण पूछा. बुजुर्ग महिला ने राजा को बताया कि वह हर साल कार्तिक महीने में व्रत रखती थी. भगवान श्रीकृष्ण उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर रोज उसके लिए खिचड़ी भेजते थे. लेकिन एक दिन जब वह गंगा स्नान करके लौटी तो खिचड़ी का कटोरा गायब था. वह काफी देर तक उसे ढूंढती रही और यही कहती रही कि मेरी खिचड़ी और मेरा कटोरा कहां चला गया?
तब दोनों राजकुमारों ने उसे बताया कि उसकी पड़ोसन ने खिचड़ी को घर के पीछे फेंक दिया था. उसी जगह दो फूल खिले थे, जिन्हें राजा अपने महल ले आए थे. रानी ने उन फूलों को सूंघा और उन्हीं से दोनों राजकुमारों का जन्म हुआ. उन्होंने बताया कि भगवान ने उन्हें उसी बुजुर्ग महिला के लिए भेजा है. यह पूरी बात जानकर राजा बहुत प्रसन्न हुए. उन्होंने बुजुर्ग महिला को अपने महल में रहने के लिए जगह दी और उसका पूरा ध्यान रखने का आदेश दिया.