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नीच ग्रह बर्बाद करेंगे या उच्च ग्रह बनाएंगे राजा? ज्योतिषविद से जानें

किसी ग्रह के शुभ या अशुभ परिणाम केवल उसके उच्च या नीच होने से तय नहीं होते, बल्कि उसके संपूर्ण ज्योतिषीय बल और कुंडली में उसकी स्थिति पर निर्भर करते हैं. किसी ग्रह का फल जानने के लिए केवल उसकी राशि देखना पर्याप्त नहीं होता. यह समझना आवश्यक है कि वह ग्रह कुंडली में किस भाव का स्वामी है.

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ग्रहों की युति और दृष्टि भी फलादेश में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. (Photo: ITG)
ग्रहों की युति और दृष्टि भी फलादेश में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. (Photo: ITG)

यदि आपकी कुंडली में कई उच्च ग्रह हैं तो यह भ्रम न पाले कि वह आपको राजा बना देंगे. न ही इसका दुख करें कि नीच के ग्रह आपको बर्बाद कर देंगे. कुंडली का पूरी तरह से आंकलन किए बिना यह धारना अधूरी और केवल भ्रांति ही है. किसी ग्रह के शुभ या अशुभ परिणाम केवल उसके उच्च या नीच होने से तय नहीं होते, बल्कि उसके संपूर्ण ज्योतिषीय बल और कुंडली में उसकी स्थिति पर निर्भर करते हैं. किसी ग्रह का फल जानने के लिए केवल उसकी राशि देखना पर्याप्त नहीं होता. यह समझना आवश्यक है कि वह ग्रह कुंडली में किस भाव का स्वामी है. कई बार उच्च का ग्रह ऐसे भाव का स्वामी होता है, जो संघर्ष, रोग, ऋण, निराशा या बाधाओं से जुड़ा होता है. ऐसी स्थिति में वह ग्रह अपनी शक्ति तो बढ़ा देता है और उसी भाव के फल को भी प्रभावशाली बना सकता है. परिणामस्वरूप व्यक्ति को अपेक्षित शुभ फल नहीं मिल पाते.

इसी प्रकार यदि कोई ग्रह नीच राशि में स्थित है, तो इसका अर्थ यह नहीं कि वह हमेशा अशुभ परिणाम ही देगा. यदि वह ग्रह किसी शुभ भाव का स्वामी हो, शुभ ग्रहों की दृष्टि प्राप्त कर रहा हो, मजबूत नवांश में स्थित हो या नीचभंग राजयोग जैसी विशेष स्थिति बना रहा हो, तो वही ग्रह व्यक्ति को सम्मान, सफलता, धन और प्रतिष्ठा भी प्रदान कर सकता है. इसलिए किसी ग्रह को केवल उच्च या नीच देखकर उसे अच्छा या बुरा समझना ज्योतषिय दृष्टि से उचित नहीं माना जाता है.

ग्रह किस भाव में बैठा है, यह भी अत्यंत महत्वपूर्ण होता है. एक उच्च का ग्रह यदि अशुभ भाव में बैठा हो या पाप ग्रहों से पीड़ित हो, तो उसकी सकारात्मक शक्ति प्रभावित हो सकती है. वहीं नीच का ग्रह यदि केंद्र या त्रिकोण में शुभ योग बना रहा हो और उस पर शुभ ग्रहों की दृष्टि हो, तो वह आश्चर्यजनक रूप से अच्छे परिणाम भी दे सकता है.

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एक ग्रह देखकर भविष्यवाणी करना गलत
ग्रहों की युति और दृष्टि भी फलादेश में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. यदि उच्च का ग्रह राहु, केतु या शनि जैसे ग्रहों से अशुभ रूप से प्रभावित हो, तो उसके परिणाम बदल सकते हैं. वहीं नीच का ग्रह यदि बृहस्पति, चंद्रमा या शुक्र जैसे शुभ ग्रहों का सहयोग प्राप्त कर रहा हो, तो उसके दोष काफी हद तक कम हो सकते हैं. इसलिए कभी भी केवल एक ग्रह को देखकर भविष्यवाणी कर लोगों को भ्रम में नहीं रहना चाहिए. बल्कि संपूर्ण कुंडली का गहन अध्ययन के बिना किसी निष्कर्ष से अपने मन में कोई भ्रम न पाले.

कई बार जन्मकुंडली में साधारण दिखाई देने वाला ग्रह अपनी दशा में असाधारण सफलता देता है, जबकि अत्यंत मजबूत दिखाई देने वाला ग्रह अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाता. इसलिए केवल यह सुनकर कि आपकी कुंडली में कोई ग्रह उच्च का है या नीच का, उत्साहित या भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है. सही फलादेश के लिए ग्रह की राशि, भाव, भावेश, युति, दृष्टि, योग, दशा और संपूर्ण कुंडली का संतुलित विश्लेषण आवश्यक होता है. ज्योतिष का उद्देश्य भ्रम या भय उत्पन्न करना नहीं, बल्कि सही मार्गदर्शन देना है.

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