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Dhanteras 2026: शुक्र प्रदोष में मनेगा धनतेरस, अभी नोट कर लें खरीदारी का शुभ मुहूर्त

इस बार धनतेरस पर प्रदोष काल शाम 5:49 बजे से लेकर रात 8:23 बजे तक रहेगा. धनतेरस की पूजा के लिए प्रदोष काल को सर्वोत्तम समय बताया गया है. यानी इस बार धनतेरस पर कुबेर, लक्ष्मी और धन्वंतरी की पूजा के लिए करीब ढाई घंटे का शुभ मुहूर्त रहने वाला है.

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महालक्ष्मी के हिरण्य यानी स्वर्ण स्वरूप और चांदी से जुड़े स्वरूप का उल्लेख करते हुए धनतेरस पर सोना-चांदी खरीदने की परंपरा बताई गई है.
महालक्ष्मी के हिरण्य यानी स्वर्ण स्वरूप और चांदी से जुड़े स्वरूप का उल्लेख करते हुए धनतेरस पर सोना-चांदी खरीदने की परंपरा बताई गई है.

इस साल धनतेरस का त्योहार शुक्र प्रदोष के संयोग में मनाया जाएगा. 6 नवंबर को शुक्रवार है और धनतेरस पर पूजा और खरीदारी के लिए प्रदोष काल को सबसे उत्तम समय माना गया है. शुक्रवार का दिन माता महालक्ष्मी को समर्पित है. वाराणसी के ज्योतिषाचार्य पंडित वेदप्रकाश मिश्रा के अनुसार, इस शुभ संयोग में कुबेर, धन्वंतरी और मां लक्ष्मी की आराधना करने से घर में सुख-समृद्धि बढ़ेगी. धनतेरस पर सोना-चांदी खरीदने की परंपरा भी है. लेकिन अगर आपका बजट कम है तो आप पीतल या तांबे का बर्तन या खड़ा धनिया जैसी चीजें भी खरीद सकते हैं.

धनतेरस पर पूजा का शुभ मुहूर्त
इस बार धनतेरस पर प्रदोष काल शाम 5:49 बजे से लेकर रात 8:23 बजे तक रहेगा. धनतेरस की पूजा के लिए प्रदोष काल को सर्वोत्तम समय बताया गया है. यानी इस बार धनतेरस पर कुबेर, लक्ष्मी और धन्वंतरी की पूजा के लिए करीब ढाई घंटे का शुभ मुहूर्त रहने वाला है.

खरीदारी का शुभ मुहूर्त

1. शुभ चौघड़िया मुहूर्त: सुबह 8:16 बजे से 9:48 बजे तक
2. अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:48 बजे से दोपहर 12:56 बजे तक
3. प्रदोष काल: शाम 05 बजकर 49 मिनट से रात 08 बजकर 23 मिनट तक

धनतेरस पर क्या खरीदना शुभ होता है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस पर सोना-चांदी खरीदना शुभ माना जाता है. महालक्ष्मी के हिरण्य यानी स्वर्ण स्वरूप और चांदी से जुड़े स्वरूप का उल्लेख करते हुए इस दिन सोना-चांदी के आभूषण खरीदने की परंपरा बताई जाती है. हालांकि हर व्यक्ति के लिए कीमती धातुएं खरीदना संभव नहीं होता है. ऐसे में सामर्थ्य के अनुसार पीतल या तांबे का बर्तन भी खरीदा जा सकता है. इसके अलावा धनतेरस पर खील और साबुत धनिया खरीदना भी शुभ माना जाता है.

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कैसे हुआ भगवान धन्वंतरि का प्राकट्य?
धन त्रयोदशी से जुड़ी पौराणिक मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे. उन्हें आयुर्वेद का प्रवर्तक और आरोग्य का देवता माना जाता है. भगवान धन्वंतरि का प्राकट्य मानव जीवन की रक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ा माना जाता है. श्रीमद्भागवत पुराण के अष्टम स्कंध में समुद्र मंथन की कथा का वर्णन मिलता है. इसी कथा से भगवान धन्वंतरि के प्राकट्य की मान्यता जुड़ी हुई है. उनके हाथ में अमृत कलश था, जिसे जीवन की रक्षा और अमरत्व के प्रतीक के रूप में देखा जाता है. इसी वजह से धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है. इनकी पूजा करके लोग आरोग्य और स्वस्थ जीवन की कामना करते हैं.

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