चैत्र महीने की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को श्रीराम का जन्म हुआ था. भगवान विष्णु का प्रमुख अवतार होने की मान्यता के कारण श्रीराम को भगवान ही माना जाता है. बात श्रीराम की होती है तो उनके भक्त और उन्हें अपने हृदय में बसाने वाले हनुमान जी का भी जिक्र होता है. सामान्य तौर पर हम हनुमान जी को एक मुख वाला ही देखते हैं, लेकिन हनुमान जी का भी एक विराट स्वरूप है, जिसमें वह पंचमुखी हनुमान बन जाते हैं.
पंचमुखी हनुमान का रूप बहुत दुर्लभ, शक्तिशाली और तंत्र-शास्त्र में सर्वोच्च माना जाता है. यह रूप तब प्रकट हुआ जब हनुमान जी ने अहिरावण और महि रावण (रावण के ही खानदान के असुर) का वध करने के लिए पाताल लोक पहुंचे थे.
पंचमुखी हनुमान के पांच मुख कौन-कौन से हैं?
इन पांचों मुखों के कारण इनका नाम पंचमुखी हनुमान पड़ा.
कृत्तिवास रामायण में मिलती है कथा
पंचमुखी हनुमान जी की कथा विशेष रूप से कृत्तिवास रामायण और लोक परंपराओं में मिलती है. लंका युद्ध के दौरान, महिरावण और अहिरावण जो पाताल लोक के राजा और देवी निकुंभला का उपासक थे, छल से श्री राम और लक्ष्मण का अपहरण करके उन्हें पाताल ले गया. महिरावण उन्हें अपनी देवी महामाया निकुंभला को बलि चढ़ाना चाहता था. जब हनुमान जी को यह पता चला, तो वह उन्हें बचाने के लिए पाताल लोक पहुंचे. उन्होंने देखा कि वहां महाकाली का एक विशाल मंदिर है.
हनुमान जी ने देवी महाकाली को पुकारा कि वह उन्हें श्री राम और लक्ष्मण को बचाने की अनुमति दें. महाकाली हंसने लगीं और बोलीं कि हनुमान राम और लक्ष्मण को कोई बचाए ऐसा कौन है. वह तो खुद ही सारी सृष्टि को बचाते-बिगाड़ते हैं. लेकिन, ये युद्ध तो आपकी शक्ति को जगाने के लिए है. तब देवी कहती हैं कि ध्यान से देखिए हनुमान, आप मेरे ही स्वरूप हैं.
कैसे लिया पंचमुखी अवतार
देवी के ऐसा कहते ही, हनुमान जी ने देवी का रूप आत्मसात कर लिया और खुद उनके स्थान पर स्थापित हो गए. इसके बाद, उन्होंने पंचमुखी हनुमान का भयंकर रूप धारण किया (जिसमें पांच दिशाओं में पांच मुख थे, स्वयं हनुमान, नरसिंह, गरुड़, वराह और हयग्रीव. उन्होंने पांचों दिशाओं में जल रहे पांच दीपकों को एक साथ बुझाकर महिरावण का वध किया और राम-लक्ष्मण को मुक्त कराया.
माना जाता है कि इस घटना के बाद, देवी महाकाली (जो दुर्गा का ही एक रूप हैं) हनुमान जी की भक्ति और वीरता से अत्यंत प्रसन्न हुईं और उन्हें अपना द्वारपाल या सेवक नियुक्त किया. यही कारण है कि आज भी कई शक्तिपीठों और देवी मंदिरों के बाहर हनुमान जी और भैरव बाबा की प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं.
पंचमुखी हनुमान जी की पूजा के लाभ
पूजा का सरल तरीका
ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट्।
यह पंचमुखी हनुमान का बीज मंत्र है जो बहुत चमत्कारी माना जाता है.