श्री बद्रीनाथ चालीसा का श्रद्धापूर्वक और नियमित पाठ करने से भगवान बद्रीनाथ (भगवान विष्णु) की विशेष कृपा प्राप्त होती है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसके प्रभाव से पापों का क्षय होता है, मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है तथा जीवन में सुख, शांति, समृद्धि, आध्यात्मिक ऊर्जा और मानसिक संतुलन का संचार होता है.
॥ दोहा ॥
जय बद्री विशाल प्रभु, कृपा करो भगवान।
दीनन के तुम नाथ हो, सब जग के हो प्राण॥
॥ चौपाई ॥
चारों धाम में प्रथम स्थान, बद्रीनाथ तुम्हारा धाम।
अलकनंदा तट पर सोहे, पावन सुंदर धाम महान॥
हिमालय की गोद में बसे, तुम हो जगत के पालनहार।
जो नर-नारी ध्यान लगावे, उतर जाए भवसागर पार॥
पवन मंद सुगंधित बहे, हिम की चादर सोहे यहां।
दर्शन से सब पाप मिटावें, गूंजे जयकारे यहां वहां॥
नर नारायण रूप तुम्हारे, तपस्या लीन सदा रहते।
भक्तों के संकट को प्रभु जी, पल भर में ही सब हरते॥
कुबेर, नारद, और उद्धवजी, करते महिमा तेरी गात।
शेष नाग भी शरण तुम्हारी, सुमिरन करते दिन और रात॥
शंख और घड़ियाल बाजे, धूप दीप से आरती होय।
तुम्हारी कृपा बिना प्रभु जी, मुक्ति पावे न कोई॥
जो भी यात्री दर्शन पावे, जीवन उसका सफल बनावे।
बद्रीनाथ धाम की महिमा, तीनों लोक में गाई जावे॥
पाप ताप सब दूर हो जाते, जो तेरा गुणगान करे।
'दास' तुम्हारा शरण पड़ा है, भव से उसका उद्धार करे॥
॥ दोहा ॥
बद्रीनाथ दयालु तुम, हरहु सकल अज्ञान।
मुझको अपनी शरण में लीजै, प्रभु कृपानिधान॥
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