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7 गौशालाओं से होगी 16 करोड़ की वसूली...सरकारी अनुदान में बड़ी गड़बड़ी के आरोप

जालोर में गौशालाओं को दिए गए सरकारी अनुदान में करोड़ों रुपये की कथित अनियमितताओं का मामला सामने आया है. महालेखाकार की जांच के बाद गोपालन विभाग ने सात गौशालाओं से 16.15 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली के आदेश दिए हैं. हालांकि संबंधित गौशालाओं ने विभागीय निष्कर्षों पर आपत्ति जताते हुए खुद को निर्दोष बताया है.

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7 गौशालाओं से होगी 16 करोड़ की वसूली, सरकारी अनुदान में बड़ी गड़बड़ी के आरोप (Photo: itg))
7 गौशालाओं से होगी 16 करोड़ की वसूली, सरकारी अनुदान में बड़ी गड़बड़ी के आरोप (Photo: itg))

राजस्थान में जालोर जिले की गौशालाओं को दिए गए सरकारी अनुदान में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का मामला सामने आया है. महालेखाकार (लेखा परीक्षा) की जांच के बाद गोपालन विभाग ने जिले की सात गौशालाओं से कुल 16 करोड़ 15 लाख रुपए से अधिक की वसूली के आदेश जारी किए हैं. विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार अनुदान वितरण में गंभीर विसंगतियां मिलने के बाद संबंधित गौशालाओं को नोटिस जारी कर अतिरिक्त राशि वापस जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं.

7 गौशालाओं से होगी 16.15 करोड़ रुपए की वसूली

जांच में सबसे बड़ा मामला जालोर जिले के पथमेड़ा स्थित श्री गोपाल गोवर्धन गौशाला का सामने आया है. विभागीय आंकड़ों के अनुसार इस गौशाला को 10 करोड़ 95 लाख 73 हजार 200 रुपए का अतिरिक्त अनुदान जारी होने का उल्लेख किया गया है. इसके अलावा श्री खेतेश्वर गौशाला, खिरोड़ी के नाम पर 4 करोड़ 20 लाख 57 हजार रुपए की अतिरिक्त सहायता राशि दर्ज की गई है. शेष राशि जिले की अन्य पांच गौशालाओं से संबंधित बताई गई है. इस प्रकार जालोर जिले की सात गौशालाओं पर कुल 16.15 करोड़ रुपए की वसूली प्रस्तावित है.

कई स्तरों पर रिकॉर्ड में गड़बड़ियां

महालेखाकार की जांच में सामने आया कि अनुदान वितरण के दौरान कई स्तरों पर रिकॉर्ड में गड़बड़ियां पाई गईं. विभागीय दस्तावेजों के अनुसार कई मामलों में गोवंश की वास्तविक संख्या और प्रस्तुत रिकॉर्ड में अंतर मिला. कुछ स्थानों पर टैग पंजीकरण, पशुधन रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों में भी विसंगतियां सामने आईं, जिसके आधार पर अतिरिक्त भुगतान का निष्कर्ष निकाला गया.

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गोपालन विभाग ने संबंधित गौशालाओं को नोटिस जारी कर निर्धारित अवधि में वसूली योग्य राशि राजकोष में जमा कराने के निर्देश दिए हैं. विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि समय पर राशि जमा नहीं कराई जाती है तो संबंधित गौशालाओं की आगामी प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृतियां रोक दी जाएंगी. साथ ही भविष्य में मिलने वाली सहायता राशि पर भी रोक लगाई जा सकती है.

कुछ गौशालाओं ने दी राशि जमा कराने की सहमति

विभागीय आदेशों में जिला स्तर के अधिकारियों को वसूली की कार्रवाई प्राथमिकता से पूरी करने और इसकी अनुपालना रिपोर्ट निदेशालय को भेजने के निर्देश दिए गए हैं. कुछ गौशालाओं की ओर से किश्तों में राशि जमा कराने की सहमति भी दी गई है, जबकि शेष मामलों में नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी.

जिले में करोड़ों रुपए के अनुदान से जुड़ा यह मामला सामने आने के बाद गौशालाओं के संचालन, अनुदान वितरण और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं. अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विभाग वसूली की कार्रवाई कितनी प्रभावी ढंग से पूरी करता है और जांच में सामने आई अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध क्या कदम उठाए जाते हैं.

हालांकि दूसरी ओर संबंधित गोशालाओं ने विभाग की रिपोर्ट पर आपत्ति जताई है. उनका कहना है कि 12 अंकों वाले टैग उपलब्ध कराना, उन्हें गोवंश पर लगाना तथा भारत पशुधन एप पर पंजीकरण करना विभाग की जिम्मेदारी थी. यदि टैगिंग या ऑनलाइन पंजीकरण में तकनीकी अथवा प्रक्रियागत त्रुटियां हुई हैं तो इसके लिए गोशालाओं को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता.

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नहीं अपडेट हुआ मर चुकी गायों का रिकॉर्ड

गोशाला संचालकों का यह भी कहना है कि आवेदन के समय जो गोवंश जीवित थे, उन्हें नियमानुसार आवेदन में शामिल किया गया था. आवेदन के बाद किसी गोवंश की मृत्यु होने या संख्या में परिवर्तन की स्थिति में ऑनलाइन रिकॉर्ड संशोधित करने का विकल्प उपलब्ध नहीं था. उनका दावा है कि संयुक्त भौतिक सत्यापन के दौरान उपलब्ध वास्तविक संख्या के आधार पर ही अनुदान स्वीकृत किया जाता है.

फिलहाल महालेखाकार की रिपोर्ट, विभागीय नोटिस और गोशालाओं के जवाब के बीच मामला विचाराधीन है. वसूली के आदेश जारी होने के बावजूद कई मामलों में अंतिम कार्रवाई और अनुपालना अभी लंबित बताई जा रही है.
 

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