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जलता नारियल,नींबू और सिंदूर...मर्डर के लिए मां को घर से बाहर लाने के टोटके करती थी आयुषी

जयपुर में सामने आए एक सनसनीखेज हत्याकांड में पुलिस का दावा है कि सरकारी नौकरी और करोड़ों रुपये की संपत्ति के लालच में बेटी ने अपनी विधवा मां की हत्या की साजिश रची. कथित तौर पर सुपारी देकर वारदात को सड़क हादसे का रूप देने की कोशिश की गई, लेकिन सीसीटीवी फुटेज और पुलिस जांच ने पूरा मामला उजागर कर दिया.

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मां को घर से निकालने के टोटके करती थी आयुषी (Photo: itg)
मां को घर से निकालने के टोटके करती थी आयुषी (Photo: itg)

राजस्थान से कलयुग की एक ऐसी खौफनाक और रोंगटे खड़े कर देने वाली वारदात सामने आई, जिसने मां-बेटी के पवित्र रिश्ते को कलंकित कर दिया है.जयपुर के प्रताप नगर इलाके में एक 23 साल की सगी बेटी ने अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी और करोड़ों रुपये की संपत्ति हड़पने के लिए अपनी ही विधवा मां की 7 लाख रुपये की सुपारी देकर बेरहमी से हत्या करवा दी.

हत्या को  'हिट-एंड-रन' साबित करना था

कोर्ट में एलडीसी विजय वशिष्ठ उर्फ विजय शर्मा की एक साल पहले हुई मौत के बाद  उनकी पत्नी निरज शर्मा ने बेटी आयुषी को अकेले पढ़ाया और दिव्यांग बेटे को भी संभाला लेकिन आयुषी के दिमाग में अलग ही खेल चल रहा था.वकालत की तैयारी कर रही  आयुषी शर्मा ने मां को अनुकंपा पर  मिली  नौकरी छीनने के लिए उसकी हत्या की साजिश रच डाली. इतना ही नहीं बल्कि उसने तो इस पूरी वारदात को एक सामान्य 'हिट-एंड-रन' सड़क हादसे का रूप देने की कोशिश की, लेकिन पुलिस की पैनी नजर और सीसीटीवी फुटेज ने इस रूह कंपा देने वाली साजिश का पर्दाफाश कर दिया.

थार से कुृचलने की कोशिश में बच गई थी निरज

इस पूरे मामले में शातिर आयुषी को लेकर परतें खुलने लगी हैं और कई हैरान करने वाली बातें सामने आ रही हैं.मालूम हुआ कि हत्या से एक महीने पहले भी थार गाड़ी से निरज को उसके ही घर के बाहर कुचलने की कोशिश की गई थी लेकिन निरज बच गई. मगर उसे शक हो गया था.उसने यह बात अपने भाई को बताई और घर से निकलना बंद कर दिया. निरज समझ गई थी कि खतरा है तो उसने पूरे घर में जाली लगाकर बाहर चार सीसीटीवी कैमरे लगा दिए थे.

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नींबू मिर्च, सिंदूर और जलता नारियल

इतने सब के बाद निरज का मर्डर करना मुश्किल हो रहा था तो मां को घर से निकालने के लिए आयुषी ने नए-नए टोना टोटके के तरीक़े अपनाने शुरू किए.वही नींबू मिर्च , लाल रंग का सिंदूर और जलता नारियल घर की सीढ़ियों पर फेंकने लगी.जिसे देखने के लिए और घबराकर निरज बाहर निकले और उसपर हमला हो.आखिरकार वो दिन आ भी गया.4 जुलाई को जब निरज अपने बेटे को लेकर फिजियोथैरेपिस्ट के यहां गई थी तो बेटी ने उसे जरूरी काम से घर आने के लिए कहा.निरज जब घर लौट रही थी तो 60 फीट रोड पर मोटरसाइकिल पर इंतज़ार कर रहे हमलावरों ने उसपर स्कॉर्पियो चढ़ा दी और उसकी मौत हो गई.

पति का मौत और अनुकंपा पर नौकरी

पूरा मामला जयपुर की एयरपोर्ट कॉलोनी में रहने वाले एक परिवार से जुड़ा है.करीब ढाई साल पहले लोअर कोर्ट में एलडीसी के पद पर कार्यरत विजय वशिष्ठ उर्फ विजय शर्मा ने यहां अपना मकान बनवाया था.वह अपनी पत्नी निरज शर्मा, बेटी आयुषी शर्मा और मानसिक रूप से दिव्यांग बेटे के साथ रहते थे.करीब एक साल पहले विजय शर्मा का निधन हो गया.उस समय आयुषी ने 12वीं की परीक्षा पास की थी.पिता की मौत के बाद अनुकंपा नियुक्ति का सवाल उठा तो आयुषी ने खुद नौकरी करने की इच्छा जताई.शुरुआत में उसकी मां भी इसके लिए तैयार थीं.

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गुस्से में पुराने घर में चली गई आयुषी

इसी दौरान निरज शर्मा के भाई, जो लोअर कोर्ट में ही एलडीसी के पद पर कार्यरत हैं, उन्होंने अपनी बहन को समझाया कि वह पढ़ी-लिखी हैं और परिवार की जिम्मेदारी संभाल सकती हैं.उन्होंने कहा कि मानसिक रूप से दिव्यांग बेटे की देखभाल भी जरूरी है, जबकि आयुषी अभी आगे पढ़ सकती है और भविष्य में अपने पैरों पर खड़ी हो सकती है.इसके बाद निरज शर्मा ने बेटे की जिम्मेदारी और परिवार की जरूरतों को देखते हुए अपने दिवंगत पति की जगह अनुकंपा के आधार पर नौकरी स्वीकार कर ली.

मां के इस फैसले से 24 साल की आयुषी नाराज हो गई.वह एयरपोर्ट कॉलोनी छोड़कर कल्याण कॉलोनी स्थित अपने पिता के पुराने घर में रहने लगी.वहीं उसने अपने ताऊ मोहन स्वरूप शर्मा के बेटे बलराम के साथ एलएलबी में दाखिला लिया.दोनों चचेरे भाई-बहन एक ही घर में रहने लगे.

'मां को मार दे, 10 करोड़ की जमीन तेरी'

पुलिस जांच के अनुसार, इसी दौरान आयुषी ने अपनी मां की हत्या की योजना बनाई.उसने कथित तौर पर बलराम से कहा कि अगर वह उसका साथ देगा तो आगरा रोड स्थित करीब पांच करोड़ रुपये कीमत की पांच बीघा जमीन और भरतपुर में करीब पांच करोड़ रुपये मूल्य की चार बीघा जमीन उसे दिला दी जाएगी.आयुषी का यह भी कहना था कि मां की मौत के बाद उसे अनुकंपा के आधार पर नौकरी मिल जाएगी और जयपुर के दोनों मकानों पर भी उसका अधिकार हो जाएगा.

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आयुषी को नहीं कोई पछतावा, दे रही उल्टे जवाब

जांच में सामने आया कि इसके बाद दोनों ने यह पूरी योजना आयुषी के ताऊ और बलराम के पिता मोहन शर्मा को बताई.कथित तौर पर फैसला लिया गया कि निरज शर्मा को कार से कुचलकर मौत के घाट उतारा जाएगा, ताकि घटना सड़क हादसा लगे.पुलिस के अनुसार, साजिश के मुताबिक वारदात को अंजाम भी दिया गया, लेकिन महज दो-तीन दिनों के भीतर जांच के दौरान पूरे मामले का खुलासा हो गया.

गिरफ्तारी के बाद भी आयुषी के व्यवहार में किसी तरह का पछतावा नजर नहीं आया.पुलिस का कहना है कि पूछताछ के दौरान वह टालमटोल और उलझाने वाले जवाब देती रही.वहीं, आजतक की टीम ने भी उससे बातचीत की कोशिश की, लेकिन उसने कैमरे के सामने पूरे समय चुप्पी साधे रखी.

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