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आसाराम को राजस्थान हाई कोर्ट से राहत, जेल में मिलती रहेंगी ये सुविधाएं

राजस्थान हाईकोर्ट ने आसाराम को जोधपुर सेंट्रल जेल में मिल रही बेड, बिस्तर, चिकित्सा सुविधा, अल्कालाइन पानी और निजी स्रोत से भोजन की व्यवस्था जारी रखने का आदेश दिया है. न्यायमूर्ति संजीत पुरोहित की पीठ ने कहा कि किसी कैदी के मौलिक अधिकार केवल अपील का निस्तारण हो जाने से समाप्त नहीं हो जाते. हालांकि, अदालत ने आसाराम की कुछ अन्य मांगों को खारिज भी कर दिया.

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आसाराम की सभी मांगों को स्वीकार नहीं किया. (File Photo: ITG)
आसाराम की सभी मांगों को स्वीकार नहीं किया. (File Photo: ITG)

राजस्थान हाईकोर्ट ने दुष्कर्म मामले में सजा काट रहे आसाराम को जेल में उपलब्ध कराई जा रही कुछ विशेष सुविधाओं को जारी रखने का आदेश दिया है. न्यायमूर्ति संजीत पुरोहित की एकल पीठ ने इस संबंध में 21 पृष्ठ का विस्तृत आदेश जारी किया.

अदालत ने कहा कि किसी कैदी के मौलिक अधिकार केवल इस आधार पर समाप्त नहीं हो जाते कि उसकी अपील का निस्तारण हो चुका है. इसी सिद्धांत को आधार बनाते हुए कोर्ट ने जेल प्रशासन को आसाराम को कुछ सुविधाएं उपलब्ध कराते रहने के निर्देश दिए हैं.

हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार, आसाराम को जोधपुर सेंट्रल जेल में बेड, बिस्तर, चिकित्सा सुविधाएं और अल्कालाइन पानी उपलब्ध कराया जाता रहेगा. इसके अलावा उन्हें निजी स्रोत से भोजन प्राप्त करने की अनुमति भी जारी रहेगी. अदालत ने स्पष्ट किया कि कैदी होने के बावजूद व्यक्ति के कुछ बुनियादी अधिकार सुरक्षित रहते हैं और उनका संरक्षण किया जाना चाहिए.

हालांकि, अदालत ने आसाराम की सभी मांगों को स्वीकार नहीं किया. आदेश में उनकी कुछ अन्य मांगों को खारिज भी कर दिया गया है. कोर्ट ने किन-किन मांगों को अस्वीकार किया, इस पर आदेश में विस्तार से उल्लेख किया गया है.

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यह मामला जेल में उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं को लेकर दायर याचिका से जुड़ा था. हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद आसाराम को फिलहाल पूर्व में मिल रही प्रमुख सुविधाएं मिलती रहेंगी.

गौरतलब है कि आसाराम विभिन्न मामलों में सजा काट रहे हैं और वर्तमान में जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं. हाईकोर्ट का यह आदेश कैदियों के मौलिक अधिकारों और जेल प्रशासन की जिम्मेदारियों को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

नाबालिग से दुष्कर्म में उम्रकैद बरकरार
हाल ही में राजस्थान हाईकोर्ट ने आसाराम से जुड़े बहुचर्चित दुष्कर्म मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए उन्हें आंशिक राहत दी. अदालत ने सामूहिक दुष्कर्म और सामूहिक यौन उत्पीड़न से संबंधित दोषसिद्धि को निरस्त कर दिया, लेकिन नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में दी गई उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा.

हाईकोर्ट की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के बाद कहा कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर नाबालिग से दुष्कर्म के आरोप सिद्ध होते हैं, इसलिए इस अपराध में सुनाई गई उम्रकैद की सजा जारी रहेगी. हालांकि, सामूहिक दुष्कर्म से जुड़े आरोपों के संबंध में अदालत ने राहत दी.

फैसले के साथ ही अदालत ने सह-आरोपियों को भी राहत देते हुए उन्हें बरी कर दिया. इस प्रकार मामले में सह-आरोपियों के खिलाफ दर्ज दोषसिद्धि और सजा को रद्द कर दिया गया.

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जेल में ही काटनी होगी सजा
हाईकोर्ट के फैसले के बाद आसाराम को आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया गया था. अदालत द्वारा उम्रकैद की सजा बरकरार रखे जाने के कारण उन्हें जेल में ही सजा काटनी होगी. बाद में आसाराम ने जोधपुर सेंट्रल जेल में आत्मसमर्पण भी कर दिया.

गौरतलब है कि यह मामला नाबालिग से दुष्कर्म और उससे जुड़े अन्य आरोपों से संबंधित था, जिसमें निचली अदालत ने आसाराम और अन्य आरोपियों को दोषी ठहराया था. हाईकोर्ट ने अपीलों पर सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया है, जिसे मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम माना जा रहा है.

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