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'या आटा-साटा में लड़की दो, या 15 लाख', ससुर बेटी को ले गया, फिर दूसरी जगह करा दी शादी

राजस्थान में आटा-साटा प्रथा से जुड़ा एक और मामला सामने आया है. आरोप है कि साले की शादी नहीं करवाने और 15 लाख रुपये नहीं देने पर ससुर अपनी बेटी को ससुराल से वापस ले गया. बाद में उसका दूसरे व्यक्ति से विवाह करा दिया. पीड़ित पति ने कोर्ट के आदेश पर मामला दर्ज कराया है. पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है.

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साले की शादी अटकी, तो उजड़ गई जीजा की गृहस्थी. (Photo: ITG)
साले की शादी अटकी, तो उजड़ गई जीजा की गृहस्थी. (Photo: ITG)

राजस्थान में लंबे समय से विवादों में रही आटा-साटा प्रथा एक बार फिर चर्चा में है. इस बार जोधपुर से सामने आए मामले में आरोप है कि साले की शादी नहीं करवाने और 15 लाख रुपये नहीं देने पर ससुर अपनी बेटी को उसके पति के घर से वापस ले गया. इसके बाद कथित तौर पर उसकी शादी किसी दूसरे शख्स से करा दी. पीड़ित पति ने न्यायालय की शरण ली, जिसके बाद कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

प्रतापनगर थाना प्रभारी भवानी सिंह ने बताया कि पीड़ित पति प्रमोद कुमार प्रजापत की ओर से न्यायालय में पेश इस्तगासे के आधार पर मामला दर्ज किया गया है. पुलिस अब पूरे मामले की जांच कर रही है. रिपोर्ट के अनुसार प्रमोद प्रजापत का विवाह नवंबर 2023 में पोकरराम की बेटी लीला से हुआ था. शादी के बाद करीब एक से डेढ़ वर्ष तक दोनों परिवारों के बीच सामान्य रूप से आना-जाना रहा.

पीड़ित का कहना है कि विवाह से पहले दोनों परिवारों के बीच ऐसी कोई शर्त तय नहीं हुई थी कि उसके साले की सगाई या शादी करवानी होगी. प्रमोद का आरोप है कि कुछ समय बाद उसके ससुर पोकरराम ने उसके पिता से कहा कि उनके बेटे नरेश की सगाई करवाई जाए. कथित तौर पर यह भी कहा गया कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो वह अपनी बेटी लीला को वापस ले जाएंगे.

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कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुआ मामला

इसके बाद जुलाई 2025 में पोकरराम और अन्य लोग प्रमोद के घर पहुंचे. आरोप है कि उन्होंने कहा कि या तो आटा-साटा प्रथा के तहत लड़की दो या 15 लाख रुपये दो. यदि दोनों में से कोई बात नहीं मानी गई तो वे अपनी बेटी को अपने साथ ले जाएंगे. पीड़ित के अनुसार जब उसने और उसके परिवार ने पैसे देने से इनकार कर दिया तो उसकी पत्नी लीला को साथ ले जाया गया.

आरोप है कि जाते समय कहा गया कि 15 लाख रुपये लेकर आना, तभी लीला वापस मिलेगी. अन्यथा उसे परिवार की बहू समझना छोड़ देना. प्रमोद का कहना है कि पत्नी के जाने के बाद उसके परिवार ने कई बार ससुराल पक्ष से संपर्क किया, लेकिन हर बार वही शर्त दोहराई गई कि या तो 15 लाख रुपये दिए जाएं या आटा-साटा के तहत उनके बेटे की शादी करवाई जाए.

जब बात नहीं बनी तो इस वर्ष फरवरी में उसे जानकारी मिली कि उसके ससुर ने उसकी पत्नी लीला का विवाह मुकेश नाम के व्यक्ति से करा दिया और उसे उसके साथ भेज दिया. प्रमोद का कहना है कि उसने पहले भी इस मामले में शिकायत दी थी, लेकिन मामला दर्ज नहीं हुआ. इसके बाद उसने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया. कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस ने केस दर्ज कर लिया.

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रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि ससुर ने कथित तौर पर रकम लेकर उसकी पत्नी का विवाह दूसरे व्यक्ति से करा दिया. इस मामले के बीच राजस्थान हाईकोर्ट की हालिया टिप्पणी भी चर्चा में है. इस वर्ष मई में एक मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने आटा-साटा प्रथा पर सख्त टिप्पणी की थी.

आटा-साटा प्रथा पर फिर उठे सवाल

खंडपीठ ने कहा था कि बेटी किसी दूसरे बेटे की शादी की गारंटी नहीं हो सकती. अदालत ने यह भी कहा कि जिस परंपरा को समाज में सामान्य माना जाता है, वह वास्तव में मानव जीवन का लेन-देन है. कोर्ट के अनुसार किसी बेटी को वैवाहिक सौदेबाजी का माध्यम नहीं बनाया जा सकता. ऐसी प्रथाएं बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन करती हैं और इन्हें स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए. फिलहाल प्रतापनगर थाना पुलिस न्यायालय के आदेश पर दर्ज मामले की जांच कर रही है. पुलिस का कहना है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

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