यह कहानी है एक ऐसी साध्वी की है, जिसने तीन महीने से ना तो सांस ली है और ना ही उसका दिल धड़क रहा है. लखनऊ के आश्रम में उस साध्वी के शिष्य यह मानते हैं कि साध्वी न सिर्फ जिंदा है, बल्कि आध्यात्मिक चेतना की तरंगों से लगातार बात भी कर रही है. वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह संभव नहीं है, लेकिन उनके शिष्य इसे मानने को तैयार ही नहीं हैं कि वो अब इस दुनिया में नहीं हैं.