दिल्ली यूनिवर्सिटी के चुनावी नतीजों ने कांग्रेस के सियासी दावों के सामने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. बीजेपी का छात्रसंघ ABVP ने तीन पदों पर कब्जा जमाया, वहीं कांग्रेस का छात्रसंघ NSUI का खाता तक नहीं खुला और उपाध्यक्ष पद निर्दलीय उम्मीदवार के हिस्से में चला गया. जिस युवा पीढ़ी की आवाज बनने का दावा राहुल गांधी कर रहे हैं... उसी के सबसे बड़े विश्वविद्यालयों में से एक में NSUI क्यों पिछड़ गई? देखें...