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केजरीवाल को जेल भेजे जाने का विरोध कर कांग्रेस ने कर लिया अपना सबसे बड़ा नुकसान, 8 पॉइंट्स में समझिए

अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी उन्हें देश की राजनीति में और बड़े रोल के लिए तैयार कर रही है. रामलीला मैदान में जिस तरह विपक्ष ने उन्हें हाथों-हाथ लिया है वो उनके भविष्य की कहानी लिख रहा है. कांग्रेस भी आम आदमी पार्टी के साथ जिस तरह पेश आई है वह उसके आत्मसमर्पण करने जैसा ही है.

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अरविंद केजरीवाल और राहुल गांधी
अरविंद केजरीवाल और राहुल गांधी

शराब घोटाले में गिरफ्तार दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पिछले 10 दिनों से विपक्ष की राजनीति के धुरी बने हुए हैं. जाने अनजाने में यह गिरफ्तारी उनके लिए आपदा में अवसर लेकर आई है. 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ विपक्ष के सारे मुद्दे गौण हो चुके हैं. सबसे बड़ा मुद्दा इस समय ईडी और सीबीआई के दुरुपयोग का हो गया है. केजरीवाल के नाम पर जिस तरह दिल्ली के रामलीला मैदान में इंडिया गुट एकजुट हुआ वह भी दिखाता है कि यह नाम अपने आप में कितना बड़ा हो चुका है. जिस कांग्रेस पार्टी को और उसके नेताओं को अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी के लोग हर लेवल पर निशाना बनाते आ रहे थे वो लोग ही उन्हें आज मुख्य भूमिका में आगे रखे हुए थे. राम लीला मैदान में राहुल और प्रियंका ही नहीं सोनिया गांधी ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई. 

1- आम आदमी पार्टी के सामने कांग्रेस का सरेंडर होना  

आम आदमी पार्टी के सामने जिस तरह कांग्रेस ने अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के मुद्दे पर रुख अपनाया है उसके लिए सही शब्द सरेंडर ही है. यह कौन नहीं जानता अरविंद केजरीवाल की राजनीति कांग्रेस के खिलाफ शुरू हुई है. वो शुरू से ही सोनिया से लेकर राहुल तक को टार्गेट करते रहे हैं. दिल्ली की तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के बारे में उन्होंने क्या कुछ नहीं कहा. उनको भ्रष्टाचारी बताते हुए यहां तक कहा गया कि दिल्ली में सरकार बनते ही शीला दीक्षित की गिरफ्तारी होगी. ये सब तो भाषण था पर हकीकत तो इससे भी खराब है. दिल्ली में पुलिस हाथ में नहीं थी इसलिए बहुत कुछ चाहते हुए भी नहीं हो सका. पर पंजाब में सरकार बनने के बाद सबसे अधिक निशाने पर कांग्रेस के ही लोग थे. सबसे अधिक जांच आयोग कांग्रेसी नेताओं के लिए बैठाए गए. सबसे अधिक गिरफ्तारियां भी कांग्रेस नेताओं की हुई. बदले में काग्रेस ने भी अरविंद केजरीवाल को सबसे अधिक भ्रष्ट साबित करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी. अब कांग्रेस नेता केजरीवाल की बहादुरी के किस्से गुनगुना रहे हैं. कोई भी राजनीतिक पार्टी दूसरी पार्टी के नेता के बारे में इस तरह की तारीफ तभी करता है जब उसे अपने से बड़ा और योग्य मान लेता है. कांग्रेस करीब करीब आम आदमी पार्टी के साथ वैसा ही व्यवहार कर रही है.

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2-दिल्ली की राजनीति में कांग्रेस का क्या होगा?

दिल्ली में कांग्रेस पिछले लोकसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी से बेहतर प्रदर्शन कर चुकी है. पर विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी इतना बड़ा बहुमत हासिल कर चुकी है कि अगर कांग्रेस अगले विधानसभा चुनावों में उससे गठबंधन करना चाहे तो भी संभव नहीं होगा. क्योंकि आम आदमी पार्टी उसे महत्वहीन समझेगी . आखिर जिस पार्टी के पास विधानसभा की 70 सीटों में 62 सीटें हैं वह जीरों सीट वाली पार्टी को कितनी सीटें शेयर कर सकती है? जाहिर है कि कांग्रेस न गठबंधन कर पाएगी और न ही विरोध कर पाएगी. क्योंकि विरोध करने का आधार उसने केजरीवाल की जेल यात्रा का महिमामंडन करके खत्म कर दिया है.  

3-आजादी के बाद वाली कांग्रेस के वोटर्स पर आम आदमी पार्टी का कब्जा

आजादी के बाद दशकों तक देश पर राज करने के पीछे कांग्रेस पार्टी की वो नीतियां थी जिनसे पार्टी दूर जा चुकी है. पर आम आदमी पार्टी उन्हीं नीतियों के बल पर दिल्ली में ऐसा कब्जा जमाया है कि बीजेपी देश जीत लेती है पर दिल्ली और पंजाब में उसे दिन में तारे नजर आते हैं. आज जो वोटर्स कांग्रेस से टूट रहे हैं उनमें से अधिकतर आम आदमी पार्टी की ओर ही जाते हैं. झुग्गी झोपडियों के वोट, गरीब और निम्न मध्यवर्गीय लोगों के वोट आज आम आदमी पार्टी के हार्ड कोर वोटर्स हो चुके हैं.सबसे बड़ी बात कि आम आदमी पार्टी के वोट आम क्षेत्रीय दलों की तरह किसी जाति-धर्म और भाषा से जुड़े हुए नहीं हैं. बिल्कुल उसी तरह जिस तरह कांग्रेस अपने शुरुआती दौर में थी.यही पहलु आम आदमी पार्टी को देश भर के क्षेत्रीय दलों से ऊपर उठाती है.    

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4-कांग्रेस में कोई चुनाव नहीं लड़ना चाहता इससे बड़ा संकेत और क्या हो सकता है?

उत्तर से लेकर दक्षिण तक जितने भी कांग्रेस के दिग्गज नेता हैं जिनका नाम और पहचान लोगों के बीच में है वे चुनाव के मैदान में उतरना ही नहीं चाहते हैं. पार्टी में दूसरों की बात करना बेमानी है जब खुद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी उत्तर प्रदेश में चुनाव लड़ना नहीं चाहते हैं. एक कट्टर कांग्रेसी ने लिखा कि राहुल और प्रियंका अगर यूपी में चुनाव नहीं लड़ते हैं तो वो पीठ दिखाकर भागने वाली बात है, और जनता ससम्मान हारने वाले का जयगान करती है पर डर कर भागने वाले को कभी माफ नहीं करती है.

आप महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में जहां कांग्रेस पार्टी अभी भी बीजेपी से बराबर की पार्टी है के बड़े नेताओं का नाम देखिए , आपको पता चलेगा कि कोई भी चुनाव मैदान में नहीं है. बड़े नामों में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को छोड़कर कोई भी मैदान में नजर नहीं आता है. जो चुनाव लड़ना चाहता है उसे राजनीति का शिकार होना पड़ता है. ऐसी स्थिति में कांग्रेस की जगह लेने के लिए बहुत तेजी से आम आदमी पार्टी तैयार हो सकती है. क्योंकि बीजेपी के खिलाफ सीधा खड़ा होने की माद्दा इस पार्टी ने दिखा दिया है.अरविंद केजरीवाल ने कई बार दिखाया है कि मोदी के विरोध के लिए वो हर लेवल पर जाने के लिए तैयार हैं. 

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5-दिल्ली -पंजाब ही नहीं गुजरात, हिमाचल, गोवा आदि में कांग्रेस के लिए खतरा बन चुकी है AAP

आम आदमी पार्टी दिल्ली पर काबिज हो चुकी है. जहां तक उम्मीद है कि इस बार के लोकसभा चुनावों में दिल्ली की वो सभी सीटों जो आम आदमी पार्टी के हिस्से आईं हैं वो पार्टी के कब्जे में आ जाएं. पंजाब में आम आदमी पार्टी अकेले ही चुनाव लड़ रही है. वहां पर कांग्रेस का सूपड़ा साफ करके आम आदमी पार्टी सरकार बना चुकी है. इस बार उम्मीद है कि पंजाब में सबसे अधिक सीटें भीं आम आदमी पार्टी की आएं. गुजरात में पिछले चुनावों में करीब 16 परसेंट वोट पाकर उसके हौसले बुलंद हैं. गोवा में आम आदमी पार्टी धीरे-धीरे कांग्रेस की जगह लेने को तैयार है.अगर शराब घोटाले से केजरीवाल बाइज्जत बरी होते हैं तो मध्यप्रदेश -राजस्थान-हिमाचल आदि में और मजबूत होकर आम आदमी पार्टी उभरेगी.जाहिर है कि आम आदमी पार्टी का मजबूत होना कांग्रेस के लिए कब्र खुदने जैसा होगा.

6-सीएए का विरोध करके पूरे देश के अल्पसंख्यकों का सपोर्ट हासिल किया है

अरविंद केजरीवाल बहुत दूरदृष्टि वाले नेता हैं पिछले सालों में वो इस बात को साबित कर चुके हैं. कम से कम राहुल गांधी से तो वो मीलों आगे हैं. कांग्रेस जब देश भर में कास्ट सेंसस और सामाजिक न्याय की घिसी पिटी बातें कर रही थी वो अपना अलग एजेंडा तैयार कर रहे थे. सीएए जैसे मुद्दे पर उन्होंने केंद्र की एनडीए सरकार के खिलाफ जमकर विरोध किया. दूसरी तरफ समान सिविल संहिता पर वो अपना मॉडर्न दृष्टिकोण सामने रखा. वो अच्छी तरह जानते हैं कि हमें कहां अपने को खर्च करना है, जो राहुल गांधी अब तक नहीं समझ सके हैं. सीएए पर राहुल गांधी और कांग्रेस की चुप्पी को देखते हुए उन्होंने इसे बहुत बड़ा मुद्दा बना दिया . वो जानते हैं कि पूरे देश के मुसलमान को इस मुद्दे पर अपने साथ लाया जा सकता है.जो सीधे सीधे कांग्रेस की रीढ़ पर चोट करने समान है. सीएए के मुद्दे पर राहुल गांधी का न बोलना ही उन्हें वायनाड में  मुश्किलों में डाल दिया है. 

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7-सोनिया से पहले की सॉ़फ्ट हिंदुत्व वाली कांग्रेस जैसी छवि भी बना रही आम आदमी पार्टी

कांग्रेस पार्टी की खासियत रही है कि आजादी की लड़ाई में वो हिंदुओं की पार्टी रही. भले ही पार्टी ने मुसलमानों को संरक्षण दिया पर कभी भी खुद की छवि एंटी हिंदू नहीं बनने दी. आज भी देश के कम से कम दो हिस्सों में हिंदुओं का वोट कांग्रेस को ही जाता है. पंजाब और केरल में बीजेपी को अभी हिंदुओं की पार्टी बनने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है. केरल में वायनाड इसी लिए राहुल के लिए मुश्किल हो रहा है. क्योंकि वहां उन पर आरोप लग रहा है कि वो सीएए के मुद्दे पर लगातार चुप रहे. केरल के मुख्यमंत्री लगातार सीएए के विरोध को लेकर सभाएं कर रहे हैं. 

दूसरी ओर आम आदमी पार्टी राम मंदिर के मुद्दे पर बहुत संतुलित बिहेव किया है. अरविंद केजरीवाल राम मंदिर उद्घाटन से दूर रहे पर बाद में उन्होंने सपरिवार अयोध्या  जाकर रामलला का दर्शन किया.उन्होंने भारतीय करंसी पर लक्ष्मी की फोटो छापने की भी डिमांड कर रखी है. कश्मीर में 370 के मुद्दे पर भी उन्होंने राष्ट्रवादी रुख अपनाया.  

8- कांग्रेस खाली होती जा रही है, और AAP ने अपनी पकड़ बनाए रखी है

कांग्रेस पार्टी छोड़ने वालों कद्दावर नेताओं की सूची लगातार लंबी हो रही है. ऐसा कोई दिन नहीं जाता जब यह सुनने को नहीं आता कि इस राज्य का ये नेता काग्रेस छोड़ रहा है. आज बुधवार के दिन भी 2 बड़े नाम कांग्रेस छोड़ने वालों में शामिल हो गए हैं. पीएम मोदी और बीजेपी के हार्डकोर विरोधी बॉक्सर विजेंद्र ने 21 घंटे पहले कांग्रेस के समर्थन ट्वीट किया था आज वो बीजेपी में शामिल हो गए. इसी तरह मुंबई कांग्रेस के दिग्गज संजय निरूपम के बारे में भी चर्चा है कि आज या कल में वो पार्टी छोड़ देंगे. पंजाब में रवनीत सिंह बिट्टू जैसे नेता ने कांग्रेस को अलविदा कह दिया. आखिर कांग्रेस को दिग्गज लोग क्यों छोड़ रहे हैं?  शायद कमजोर होती कांग्रेस सबको दिख रही है. लोगों को यह भी दिख रहा है कि कांग्रेस को मजबूत करने वाला हाल फिलहाल में कोई नहीं है. जबकि आम आदमी पार्टी अपने सबसे चुनौतीपूर्ण समय में भी एकजुट और हमलावर बनी हुई है.

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