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ईरान जंग कब खत्म होगी? पूरी दुनिया में पूछे जा रहे इस सवाल का जवाब क्या है

ट्रंप रोज जीत का दावा करते हैं और दूसरी ओर ईरान से बातचीत की बात भी कहते हैं. बदले में ईरान अपनी मिसाइलों और ड्रोन से ट्रंप को जवाब दे रहा है. ऐसे में ये पहेली गहराती जा रही है कि आखिर ये जंग कब खत्म होगी?

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मिडिल ईस्ट में ईरान और यूएस-इजरायल के बीच जंग जारी है. (File Photo: AFP)
मिडिल ईस्ट में ईरान और यूएस-इजरायल के बीच जंग जारी है. (File Photo: AFP)

28 फरवरी से शुरू हुई ईरान जंग थमने का नाम नहीं ले रही है. अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के भीतर सैकड़ों मिसाइल साइटें तबाह की हैं. ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई समेत दर्जनों बड़े नेता मारे गए. फिर भी ईरान नहीं रुका. अब ट्रंप कह रहे हैं कि बातचीत हो रही है, लेकिन ईरान साफ मना कर रहा है. वो कह रहा है हम तब तक नहीं रुकेंगे जब तक हम खुद फैसला न करें. ट्रंप ने  ईरान के एनर्जी प्लांट्स पर हमला करने का अल्टीमेटम पहले पांच दिन और  फिर अब दस दिन के लिए टाल दिया गया है. लेकिन, माना ये भी जा रहा है कि इसकी आड़ में वो ईरान पर बड़े हमले का प्लान बना रहे हैं.

क्या ट्रंप अकेले खत्म कर सकते हैं ये जंग?

वेनेजुएला ऑपरेशन से उत्साहित ट्रंप ने सोचा था कि ईरानी चुनौती को एक झटके में खत्म कर देंगे. न्यूक्लियर खतरा रिजीम चेंज और प्रदर्शनकारियों की मदद जैसे बहाने लिए. लेकिन वे अब बातचीत की मेज पर वापस आना चाहते हैं. न्यूक्लियर प्रोग्राम तो खोखला निकला. रिजीम बदली नहीं गई.
एयरफोर्स और नेवी को भारी नुकसान के बावजूद ईरान मिसाइल और ड्रोन से मनमाफिक हमले कर रहा है. अब तक ईरान ने खाड़ी के अमेरिकी ठिकानों पर सैकड़ों हमले किए. इजरायल पर भी मिसाइलें गिराईं.

ट्रंप का बातचीत वाला दावा एकतरफा लग रहा है. यूरोप और नाटो तटस्थ हैं. वो बीच में नहीं पड़ रहे. ट्रंप की किरकिरी हो रही है क्योंकि तेल का संकट बढ़ रहा है. होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से रोज बीस मिलियन बैरल तेल का रास्ता रुक गया. ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत एक सौ बीस डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई. अमेरिका में पेट्रोल की कीमत तीन डॉलर साठ सेंट पर चढ़ गई. महंगाई बढ़ेगी तो मिड टर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को भारी नुकसान होगा. ट्रंप सऊदी अरब जैसे खाड़ी देशों की स्पॉन्सरशिप पर कब तक जंग लड़ेंगे.

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सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने शुरू में ट्रंप को उकसाया था लेकिन अब खुद तेल संकट से परेशान हैं. यूएई कतर कुवैत भी ईरान को घायल छोड़ना नहीं चाहते. अगर ईरान बचा तो भविष्य में और खतरनाक हो जाएगा. ट्रंप को अब लग रहा है कि ये जंग लंबी खिंच गई तो घरेलू दबाव बढ़ेगा. इसलिए वो पंद्रह पॉइंट का सीजफायर प्लान भेज रहे हैं. लेकिन ईरान ने उसे अस्वीकार कर दिया. वो कह रहा है ये शर्तें बहुत ज्यादा हैं. कयास ये भी लगाए जा रहे हैं कि ट्रंप शायद होर्मुज पर कब्जे के लिए ग्राउंड ऑपरेशन को ओके कह दें. लेकिन, ऐसा करना सीजफायर जैसी सूरत को और पीछे धकेल देगा.

ईरान का कॉन्फिडेंस क्यों बढ़ता जा रहा है?

पहले घंटों में ईरान को जो नुकसान होना था वो हो चुका. आयतुल्ला अली खामेनेई मारे गए. कई बड़े कमांडर भी खत्म हो गए. उसके बाद बारी बारी से और नेता मारे गए. लेकिन ईरान का जज्बा कम नहीं हुआ. वो कह रहा है, हम तो डूबेंगे, लेकिन तुमको भी ले डूबेंगे. ईरानी मिसाइलें और ड्रोन अब खाड़ी के अमेरिकी ठिकानों पर ही नहीं इजरायल और पड़ोसी देशों में तबाही मचा रहे हैं. अब तक ईरान ने चार सौ से ज्यादा मिसाइलें लॉन्च की हैं. इजरायल में चौबीस नागरिक मारे गए. यूएई में छह लोग मारे गए. होर्मुज नाकेबंदी से ईरान पर कम दबाव पड़ रहा है. बल्कि ट्रंप पर ज्यादा बोझ आ रहा है.

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तेल संकट पूरी दुनिया को झकझोर रहा है. भारत में पेट्रोल डीजल महंगा हो रहा है. चीन और रूस ईरान के साथ खड़े हैं. उन्होंने युद्ध की निंदा की. ट्रंप ईरान को झुका कर जंग से बाहर निकलना चाहते हैं. लेकिन ईरान इस छटपटाहट को कमजोरी मान रहा है. नया सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई कह रहा है होर्मुज बंद रहेगा. ईरान ने अपने पांच शर्तें रखीं. सैंक्शन हटाओ, मुआवजा दो और होर्मुज पर हमारा कंट्रोल मानो. ईरान जानता है कि उसकी मिसाइल क्षमता अभी भी बची है. अमेरिका ने तीन हजार से ज्यादा टारगेट मारे लेकिन ईरान के पास अभी भी सैकड़ों मिसाइल लॉन्चर बचे हैं. ड्रोन फैक्ट्रीज चल रही हैं, पर्याप्त स्टॉक पड़ा. यदि ट्रंप ने अपनी फौज ईरान की जमीन पर उतारी IRGC तैयार बैठी है. इससे ईरान का आत्मविश्वास बढ़ा हुआ है. वो सोच रहा है कि ट्रंप जल्द ही पीछे हट जाएंगे. जैसा उन्होंने पिछले साल 12 दिन का युद्ध लड़ने के बाद किया.

क्या इजरायल बनेगा सीजफायर में रुकावट?

ट्रंप के अलावा ईरान युद्ध में इजरायल भी पार्टनर है. इजरायल ईरान की पूरी फौजी ताकत खत्म करना चाहता है. लेकिन उसकी मजबूरी है कि वो ट्रंप के फैसलों से आगे नहीं जा सकता. ट्रंप बातचीत की बात करें तो इजरायल को मानना पड़ेगा. सीजफायर की घोषणा ट्रंप करें तो इजरायल के लिए भी वही होगा. इजरायल ने अब तक छह सौ से ज्यादा हमले किए. ईरान की मिसाइल लॉन्च साइट्स में से तीन सौ तीस तबाह कर दीं. लेकिन इजरायल को भी नुकसान हुआ. उसके चौबीस नागरिक मारे गए. पांच हजार से ज्यादा घायल हुए. इजरायल डर रहा है कि ट्रंप जल्दी सीजफायर कर देंगे. वो चाहता है ईरान को पूरी तरह कुचल दिया जाए. दूसरी ओर ईरान के पड़ोसी खाड़ी देशों की अजीब स्थिति है. खबरें हैं कि सऊदी क्राउन प्रिंस ने ट्रंप को उकसाया था. यूएई कतर कुवैत भी ईरान को अमेरिकी साझेदार मान रहे हैं. ये देश चाहते हैं कि युद्ध ईरान को लाइन पर लाने के बाद बंद हो. यानी ईरान का पूरा सरेंडर हो. अगर ईरान को घायल छोड़ दिया तो वो फिर से घातक हो जाएगा. इसलिए खाड़ी देश भी जल्दी सीजफायर नहीं चाहते. लेकिन तेल संकट उनको भी खा रहा है. कतर का एलएनजी एक्सपोर्ट बंद हो गया. सऊदी को भी नुकसान हो रहा है.

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दुनिया के लिए अब तमाशा नहीं रहा ईरान वॉर?

गल्फ के इस युद्धरत इलाके के बाहर भी एक दुनिया है. जिसके लिए ये जंग अब महज तमाशा नहीं रही. दिनोंदिन गहराते ईंधन संकट से कई देशों में इमरजेंसी की नौबत आ गई. भारत अपने हितों की रक्षा कर रहा है. वो तेल आयात के वैकल्पिक रास्ते ढूंढ रहा है. लेकिन कीमतें बढ़ने से महंगाई बढ़ेगी. चीन और रूस सुरक्षित दूरी बनाकर ईरान के साथ खड़े हैं. उन्होंने युद्ध की निंदा की और अमेरिका पर दबाव डाला. कुल मिलाकर कोई भी ट्रंप से युद्ध रोकने के लिए नहीं कह रहा. न ईरान से. सबकी सामूहिक इच्छा है कि ये युद्ध रुके. लेकिन पहल कौन करेगा इसमें कन्फ्यूजन है.

ट्रंप कह रहे हैं कि ईरान डील करना चाहता है, लेकिन ईरान मना कर रहा है. ईरान का कहना है हम हमले के दौरान बात नहीं करेंगे. अमेरिका ने एक हजार अतिरिक्त सैनिक भेजने की तैयारी की. पहले से पचास हजार सैनिक खाड़ी में हैं. ईरान ने खाड़ी में सोलह जहाजों पर हमले किए. अब युद्ध का आर्थिक बोझ बढ़ रहा है. अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने कहा कि ये इतिहास का सबसे बड़ा सप्लाई डिसरप्शन है. तेल की कीमतें सौ डॉलर से ऊपर हैं. पेट्रोल महंगा हो रहा है. अमेरिका में पेट्रोल की कीमत तीन साठ सेंट पहुंच गई. अगर युद्ध दो हफ्ते और चला तो महंगाई पूरे विश्व में बढ़ेगी. भारत जैसे देशों में पेट्रोल डीजल और खाने की चीजें महंगी हो जाएंगी. चीन को भी तेल का नुकसान हो रहा है. रूस ईरान को हथियार सप्लाई की बात कर रहा है.

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अब सवाल ये है कि सीजफायर की संभावना कितनी है?

ट्रंप का कथित पंद्रह पॉइंट प्लान ईरान ने खारिज कर दिया. बल्कि वो अपना पांच शर्त वाला प्लान दे रहा है. पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र जैसे देश मध्यस्थता कर रहे हैं. इजरायल डर रहा है कि ट्रंप एक महीने का सीजफायर घोषित कर देंगे. ट्रंप का कहना है युद्ध जीत लिया लेकिन फिर भी हमले जारी हैं. ईरान की नेवी के नौ जहाज डुबो दिए गए. कमांडर अड़तालीस मारे गए. लेकिन ईरान के पास अभी भी मिसाइलें और ड्रोन बचे हैं. उसने क्लस्टर एमुनिशन वाली मिसाइलें लॉन्च कीं. अब ईरान खार्ग आईलैंड पर अमेरिकी हमले की तैयारी कर रहा है. ट्रैप्स बिछा रहा है. अगर अमेरिका ग्राउंड इनवेजन करेगा तो भारी नुकसान होगा. अब तक अमेरिका के तेरह सैनिक मारे गए हैं. एक सौ चालीस घायल हुए हैं. इजरायल के चार सैनिक और बत्तीस नागरिक मारे गए हैं. ईरान में बारह सौ से छह हजार लोग मारे गए. तीन मिलियन से ज्यादा लोग विस्थापित हुए हैं. बत्तीस हजार से ज्यादा सिविलियन स्ट्रक्चर क्षतिग्रस्त है. लेकिन, दोनों पक्ष तबाही से पीछे नहीं हट रहे हैं. ईरान जीत रहा है, क्योंकि उसके पास अब हारने के लिए कुछ नहीं बचा. उधर, ट्रंप हार रहे हैं, क्योंकि वे ईरान से सरेंडर नहीं ले पा रहे हैं. यदि, बिना हार-जीत के ये युद्ध खत्म होता भी है तो ईरान इसे अपने ही जीत के रूप में ही बताएगा. ट्रंप के लिए ये पचा पाना मुश्किल है. वो अब बहुत आगे आ चुके हैं.

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सीजफायर तो ठीक है, लेकिन होर्मुज किसका?

ईरान कह रहा है जब तक होर्मुज स्ट्रेट पर हमारा कंट्रोल नहीं माना जाएगा, ये बंद रहेगा. अमेरिका और इजरायल ने जितनी आसानी से ईरान के आसमान पर अपना राज स्थापित किया, उतना ही मुश्किल हो रहा है होर्मुज के समुद्र पर नियंत्रण रख पाना. फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाले इस संकरे रास्ते पर ईरान ने अपना एक टोल बूथ बना लिया है. कुछ देशों को अपने जहाज निकालने की छूट दी है, बाकी के लिए मुकम्मल नाकेबंदी. यहां से गुजरने वाले जहाजों पर ईरान के हमले ने ट्रंप को लाजवाब कर दिया है. वे मदद के लिए नाटो से लेकर यूरोप और फिर पूरी दुनिया से मदद मांग चुके हैं. लेकिन कोई आगे नहीं आ रहा है. बौखलाए ट्रंप ने ईरान के पावर प्लांट पर हमला की धमकी दी, फिर प्लान पांच दिन के लिए टाल दिया. और अब इसे दस दिन के लिए और बढ़ा दिया है. क्योंकि, इस धमकी से ही पूरी दुनिया के बाजारों में हाहाकर मच गया था. ईरान ट्रंप की कमजोर नस पकड़ चुका है. जब ट्रंप ईरान से बातचीत के बारे में कहते हैं तो ईरान जवाब आता है कि हम हमले के दौरान नहीं बात करेंगे. स्टिव विटकॉफ और जेरेड कुश्नर के ईरानी स्पीकर से संपर्क को भी झूठा बता दिया गया है. ईरानी विदेश मंत्री कह रहे हैं कोई डायरेक्ट टॉक नहीं.

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ये जंग अब सिर्फ दो देशों की नहीं, पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था से जुड़ी है. अगर ये दो हफ्ते और चली तो ग्लोबल इन्फ्लेशन (महंगाई) आठ-दस प्रतिशत बढ़ सकता है. इस सबसे बेपरवाह ट्रंप कह रहे हैं ईरान डील करना चाहता है लेकिन डर रहा है. ट्रंप रोज जीत की घोषणा कर रहे हैं, लेकिन जंग से बाहर नहीं आ पा रहे हैं. ईरान खंडहर होता जा रहा है, लेकिन उसके जज्बे की इमारत बुलंद खड़ी है. ऐसे में सीजफायर तभी होगा जब दोनों में से कोई एक तरफ झुके. हो सकता है अप्रैल के पहले हफ्ते में कोई ब्रेक थ्रू हो, लेकिन अभी दोनों तरफ सख्ती है. ईरान ने कहा कि हम तय करेंगे कब जंग खत्म होगी. ट्रंप कह रहे हैं हम जीत रहे हैं, और बातचीत भी चल रही है. ये विरोधाभास दिखाता है कि दोनों पक्ष थक रहे हैं लेकिन मान नहीं रहे.

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