मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द कर दिया गया है. मध्य प्रदेश से कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में मीनाक्षी नटराजन ने राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया था. जांच में मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र अधूरा पाया गया. मीनाक्षी नटराजन पर तेलंगाना में दर्ज एक आपराधिक मामला छिपाने का आरोप है.
बीजेपी इसे 'सत्य की जीत' बता रही है, जबकि कांग्रेस ने इसे वोट चोरी की तरह 'सीट चोरी' करार दिया है. मामले को सत्य की जीत बताते हुए मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री और बीजेपी नेता राकेश सिंह ने कहा कि मीनाक्षी नटराजन ने जो जानकारियां दी थीं वो गलत थीं, और उन्होंने मामले को छिपाया था. कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य और वकील विवेक तनखा ने कहा कि मीनाक्षी के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज ही नहीं है, और नामांकन रद्द होने को 'सीट चोरी' बताया है. नामांकन रद्द कर दिए जाने के फौरन बाद कांग्रेस नेता जयराम रमेश, भूपेश बघेल, सचिन पायलट और केसी वेणुगोपाल सहित कई नेताओं की टीम दिल्ली में चुनाव आयोग के दफ्तर पहुंचे थे, और कुछ देर धरना भी दिया था. बुधवार को मुख्य चुनाव आयुक्त से कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल की विस्तृत मुलाकात हुई.
मंगलवार को भोपाल में राज्य चुनाव आयोग के रिटर्निंग अफसर अरविंद शर्मा ने अपने आदेश में कहा था, 'मीनाक्षी नटराजन की तरफ से दायर नामांकन पत्र में, फॉर्म 26 में, शपथ पत्र में, उन्होंने उक्त न्यायालय प्रकरण का उल्लेख नहीं करके अपना शपथ पत्र अपूर्ण प्रस्तुत किया है.'
जिस मामले की जानकारी नहीं देने के लिए मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द किया गया है, वह तेलंगाना का मामला है - सवाल है कि चुनाव आयोग पेंडिंग केस किसे मानता है और दोनों पक्षों की दलील क्या हैं?
पेंडिंग केस की परिभाषा क्या है?
चुनाव आयोग की वेबसाइट पर FAQ की लंबी फेहरिस्त है, जिसमें पेंडिंग केस के बारे में भी बताया गया है. सवाल है कि- फॉर्म-26 में 5 (ii) में उम्मीदवार के खिलाफ पेंडिंग मामलों की जानकारी देना जरूरी है, जिनमें कोर्ट द्वारा संज्ञान (Cognizance) लिया जा चुका हो. कृपया संज्ञान (Cognizance) शब्द को स्पष्ट करें.
चुनाव आयोग के अनुसार इस सवाल का जवाब इस प्रकार है- 'संज्ञान (Cognizance) की व्याख्या CrPC की धारा 190 में निहित प्रावधानों से संदर्भ लिया जा सकता है.'
चुनाव आयोग के हलफनामे में Form 26 में उम्मीदवार को Pending criminal cases वाले सेक्शन में घोषणा करनी होती है. इसमें दो विकल्प दिए जाते हैं. अगर कोई पेंडिंग क्रिमिनल केस नहीं है तो टिक करते हुए NOT APPLICABLE लिखना होता है. अगर पेंडिंग केस हैं तो उनकी विस्तृत जानकारी देनी होती है - FIR नंबर, केस नंबर, कोर्ट, धाराएं, आरोपों का विवरण, चार्ज फ्रेम हुए हैं या नहीं, अपील हुई है या नहीं.
1. पेंडिंग केस वे आपराधिक मामले हैं जिनमें कोर्ट की तरफ से CrPC की धारा 190 के तहत संज्ञान लेते हुए समन/नोटिस जारी किया गया हो.
2. ये खास तौर पर ऐसे गंभीर अपराधों के केस में होता है जिनमें 2 साल या उससे ज्यादा की सजा का प्रावधान हो.
3. ध्यान देने वाली बात है कि इनमें FIR दर्ज होना जरूरी नहीं है. प्राइवेट शिकायत पर भी कोर्ट का नोटिस/समन पर्याप्त माना जा सकता है.
कांग्रेस की दलील है कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ सिर्फ नोटिस जारी किया गया है, कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई है, या कोई रजिस्टर्ड आपराधिक मुकदमा नहीं है. और, इसलिए इसकी घोषणा करना जरूरी नहीं है.
कांग्रेस का कानूनी बचाव : ‘रिटर्निंग ऑफिसर गलतफहमी का शिकार हुए’
कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग से मुलाकात के बाद पत्रकारों को संबोधित किया. पार्टी के कानूनी प्रकोष्ठ के चेयरमैन अभिषेक मनु सिंघवी ने चुनाव आयोग के सामने रखी गई दलीलों को कुछ इस तरह दोहराया, और कहा-
-मीनाक्षी नटराजन जी के मामले में रिटर्निंग ऑफिसर (RO) का फैसला विकृत है, कानूनी रूप से गलत है, जिसका समर्थन नहीं किया जा सकता.
-रिटर्निंग ऑफिसर ने जिस आधार पर मीनाक्षी नटराजन जी का नामांकन रद्द कर दिया, वो आधार कानून में Exist ही नहीं करता. ऐसा कोई क्रिमिनल केस था ही नहीं, जिसका मीनाक्षी जी खुलासा कर सकती थीं
-कोर्ट से एक नोटिस आया, जिसमें मीनाक्षी जी से कहा गया कि आप आकर हमें बताइए कि हम केस का संज्ञान लें या नहीं.
-मजिस्ट्रेट द्वारा संज्ञान लेना एक प्राथमिक चरण होता है और उसमें ये फैसला किया जाता है कि ये केस आगे चलना चाहिए या नहीं. बिना संज्ञान के कोई भी क्रिमिनल केस जन्म ही नहीं लेता है.
-मजे की बात ये है कि चुनाव आयोग के कानून में स्पष्ट लिखा है कि आपको सिर्फ वो खुलासा करना है, जिसमें अपराध अगर सिद्ध हो तो सजा दो साल से ज्यादा हो और जिसमें चार्जेस फ्रेम हो चुके हैं. इसे देखने का उत्तरदायित्व RO का होता है
-इस मामले में मजिस्ट्रेट ने संज्ञान नहीं लिया है. मीनाक्षी जी को सुनने के बाद मजिस्ट्रेट संज्ञान लेंगे, उसके बाद जांच होगी और फिर चार्जशीट तैयार होगी और अगर चार्जशीट बनेगी, तब जाकर चार्जेस फ्रेम होंगे.
-यानी इस मामले में आगे के तीन चरण बचे हैं. मजिस्ट्रेट ने संज्ञान तक नहीं लिया है, मगर RO ने मान लिया कि ये एक क्रिमिनल केस लंबित है.
सिंघवी ने कहा कि हमने कई और मुद्दे मुख्य चुनाव आयुक्त के सामने रखे और कहा कि ऐसी बेहूदी गलती के कारण राज्यसभा उम्मीदवार का नामांकन रद्द नहीं किया जा सकता है. ये गणतंत्र के सिद्धांतों के विरुद्ध है और लेवल प्लेइंग फील्ड नहीं बनता है. ये संविधान के मूल ढांचे को भी विकृत करता है. हमने यह भी कहा है कि चुनाव आयोग के पास पूरा अधिकार क्षेत्र है कि वे RO के फैसले को रिवर्स कर दें या आदेश निरस्त कर दें. चुनाव आयोग पहले भी हरियाणा और गुजरात के मामलों में हस्तक्षेप कर चुका है. यानी- ये नहीं कहा जा सकता है कि चुनाव आयोग हेल्पलेस है.
बीजेपी की शिकायत क्या थी
मध्य प्रदेश में बीजेपी के प्रदेश महामंत्री राहुल कोठारी ने मीनाक्षी नटराजन की तरफ से दाखिल हलफनामे पर रिटर्निंग अफसर के पास आपत्ति जताई थी. राहुल कोठारी ने अपने पत्र में लिखा है, मीनाक्षी नटराजन द्वारा प्रस्तुत शपथपत्र एवं न्यायालयीन अभिलेखों का परीक्षण कर यह सुनिश्चित किया जाए कि सभी आवश्यक जानकारियों का विधि अनुसार प्रकटीकरण किया गया है या नहीं. यदि किसी तथ्य का दमन, अपूर्ण प्रकटीकरण अथवा गलत जानकारी दी गई है, तो जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 एवं लागू विधिक प्रावधानों के अंतर्गत आवश्यक कार्यवाही की जाए.

बीजेपी की शिकायत पर रिटर्निंग अफसर अरविंद शर्मा ने कार्रवाई करते हुए मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द कर दिया है. अपने आदेश में अरविंद शर्मा ने लिखा है, 'मीनाक्षी नटराजन की ओर से अपने जवाब में तीन पत्र प्रस्तुत किये गये हैं, और उन्हें रिकॉर्ड में लिया गया. तथ्यों का अध्ययन किया गया. मीनाक्षी नटराजन द्वारा यह भी मौखिक रूप से स्वीकार किया गया कि उनके द्वारा न्यायालीन प्रकरण में प्रतिवादी के रूप में जवाब दाखिल किया गया है.'
रिटर्निंग अफसर अरविंद शर्मा की तरफ से जारी किए गए आदेश में लिखा है:
1. मध्य प्रदेश राज्यसभा निर्वाचन में उम्मीदवार अभ्यर्थी के रूप में मीनाक्षी नटराजन द्वारा दायर नामांकन पत्र में फॉर्म 26 में शपथ पत्र में उन्होंने उक्त न्यायालय प्रकरण का उल्लेख नहीं करके अपना शपथ पत्र अपूर्ण प्रस्तुत किया है, यह सिद्ध पाया गया है.
2. मीनाक्षी नटराजन के विरुद्ध दायर इस प्रकरण का माननीय न्यायालय ने संज्ञान में लिया है. मीनाक्षी नटराजन को हाजिर होने के लिए समन भी जारी किया गया है, अतः प्रकरण न्यायालय में लंबित है यह सिद्ध पाया गया.
3. मीनाक्षी नटराजन द्वारा उक्त प्रकरण में माननीय न्यायालय के समक्ष अपना जवाब दावा भी दाखिल किया है, अतः उन्हें इस प्रकरण की पूर्ण जानकारी होना सिद्ध पाया गया है.

अतः भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुसार अधूरा अपूर्ण एफिडेविट फॉर्म 26 रखा जाना तथा अभ्यर्थी द्वारा तथ्यों का छुपाया जाना मीनाक्षी नटराजन के विरुद्ध सिद्ध पाया गया.
आज तक से बातचीत में मीनाक्षी नटराजन ने अपना पक्ष रखा है. कहती हैं, यह कोई कानूनी लड़ाई नहीं है जिसमें हमे शिकस्त मिली है. जो लड़ाई हम हारे हैं यह राजनीतिक नीयत के खिलाफ थी. यह जो लोकतंत्र को कुचलने की साजिश है, जो वोट चोरी से शुरू हुआ और सीट चोरी तक पहुंच गया है.
कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द!
— AajTak (@aajtak) June 9, 2026
मीनाक्षी नटराजन से आजतक संवाददाता @ReporterRavish की Super Exclusive बातचीत#Congress #RajyaSabha #MeenakshiNatarajan | #ReporterDiary | pic.twitter.com/fa4WBNvRmd
मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ कथित मामला है क्या?
जिस केस के आधार पर बीजेपी ने रिटर्निंग अफसर के पास शिकायत दर्ज कराई है, वह तेलंगाना से जुड़ा है. कॉर्पोरेट एक्जीक्यूटिव रह चुकीं ए. श्रीलता की तरफ से हैदराबाद के मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत में निजी तौर पर शिकायत दर्ज कराई गई थी. शिकायतकर्ता श्रीलता ने मीनाक्षी नटराजन को इसके में चौथे आरोपी के रूप में पेश किया है. यह मामला 20 अगस्त, 2025 को दर्ज किया गया था.

17 सितंबर, 2025 को कोर्ट की तरफ से मीनाक्षी नटराजन को नोटिस जारी कर उनसे व्यक्तिगत रूप से जवाब दाखिल करने को कहा गया था. 24 अक्टूबर, 2025 को दायर अपने काउंटर एफिटेविट में मीनाक्षी नटराजन के वकील ने आरोपों से इनकार करते हुए शिकायत को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया था. अव्वल तो वकील ने मामले को खारिज करने की गुजारिश की थी, लेकिन कोर्ट ने डिमांड को स्वीकार नहीं किया. फिलहाल यह केस कोर्ट में पेंडिंग है.
श्रीलता की शिकायत में मीनाक्षी नटराजन पर मोलेस्टेशन के एक आरोपी कुंभम शिवकुमार रेड्डी को राजनीतिक राजनीतिक संरक्षण देने का आरोप लगाया गया है.
अब आगे क्या होगा
1. अव्वल तो रिटर्निंग अफसर का फैसला फाइनल माना जाता है, लेकिन न्यायिक समीक्षा की गुंजाइश तो रहती ही है. इसीलिए मीनाक्षी नटराजन और बाकी कांग्रेस नेता दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त से मिले हैं. यदि वे यहां संतुष्ट नहीं होते हैं तो कोर्ट जाने का विकल्प तो खुला है ही.
2. दिल्ली में कांग्रेस ने चुनाव आयोग को अपना ज्ञापन दे दिया है. चुनाव आयोग के दफ्तर पर धरना और प्रदर्शन भी किया है. रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव अधिकारी के फैसले को चैलेंज करने के लिए हाई कोर्ट जाने की तैयारी है.
3. मध्य प्रदेश से बीजेपी की दो सीटें पक्की थीं. मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द हो जाने से तीसरी सीट भी बगैर किसी बाधा के फिलहाल पक्की हो गई है.