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बंगाल चुनाव के पहले फेज की खास बातें, जो तय करेंगी नई व‍िधानसभा की शक्‍ल

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण की वोटिंग 23 अप्रैल को होने जा रही है जहां मुख्य मुकाबल सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी के बीच है. बूथों पर वेबकास्टिंग का ट्रायल रन शुरू हो चुका है. पहले फेज में 2926 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला 3.77 करोड़ वोटर करेंगे.

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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल को है. (Photo: ITG)
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल को है. (Photo: ITG)

पश्चिम बंगाल में 23 अप्रैल को विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए मतदान होने जा रहा है. पहले फेज में 152 विधानसभा सीटों के लिए वोट डाले जाएंगे. पश्चिम बंगाल की 294 में से 142 सीटों के लिए दूसरे फेज में 29 अप्रैल को वोटिंग होगी. 

चुनाव आयोग ने हिंसा मुक्त चुनाव कराने के लिए बड़े पैमाने पर तैयारी की है. आयोग का कहना है कि 2026 के बंगाल विधानसभा चुनाव में न 'छप्पा' चलेगा, न ही 'बूथ जामिंग', और इस बार घटना के बाद एक्शन की जगह एहतियाती इंतजामों पर ध्यान दिया जा रहा है. बंगाल में 'छप्पा' का मतलब फर्जी वोटिंग होती है, और 'बूथ जामिंग' बूथ कैप्चरिंग को कहते हैं. चुनाव आयोग का दावा है कि 2021 जैसी हिंसक घटनाओं को किसी भी सूरत में नहीं होने दिया जाएगा. 

सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस के लिए पहला चरण मुख्य रूप से अपना मौजूदा आधार बचाए रखने की लड़ाई है. टीएमसी को नई रणनीति के साथ चैलेंज कर रही भारतीय जनता पार्टी की कोशिश पहले चरण में ज्यादा से ज्यादा बढ़त लेने की होगी. बाकी मैदान में डटे वाम मोर्चा, और सभी सीटों पर उतरी कांग्रेस को जितना मिल जाए, उसी के लिए संघर्ष चल रहा है.  

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महत्वपूर्ण सीटें और मुकाबले

2021 के बंगाल विधानसभा चुनाव और 2024 के आम चुनाव के हिसाब से देखें तो 2026 का चुनाव कई मायने में अलग है. पहली बार ऐसा चुनाव हो रहा है जब 90 लाख से ज्यादा नाम SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत हटाए जा चुके हैं - और बड़े पैमाने पर तबादलों के बाद चुनाव आयोग भारी सुरक्षा बलों की तैनाती से चुनावी हिंसा रोकने की कोशिश कर रहा है. 

करीबी मुकाबलों की बड़ी संख्या के कारण पहले चरण को चुनाव का सबसे निर्णायक हिस्सा माना जा रहा है. यह चरण मतदाता सूची में संशोधन को लेकर विवाद के बीच भी हो रहा है, जहां 90 लाख से ज्यादा नाम हटाए जाने की खबरें हैं.

1. पहले चरण में जंगलमहल, उत्तर बंगाल और मुर्शिदाबाद-मालदा जैसे इलाके शामिल हैं. यहां वोट देने वालों में शहरी मतदाता के अलावा आदिवासी समुदाय और चाय बागान के मजदूरों के साथ साथ मुस्लिम आबादी बहुल इलाके के लोग भी शामिल हैं. 

2. पहले चरण में कूच बिहार, अलीपुरद्वार, जलपाईगुड़ी, दार्जिलिंग, उत्तर और दक्षिण दिनाजपुर, मालदा, मुर्शिदाबाद, पुरुलिया, बांकुड़ा, झाड़ग्राम, पश्चिम मेदिनीपुर, पश्चिम बर्धमान और बीरभूम और नदिया के कुछ क्षेत्रों की विधानसभा सीटें शामिल हैं - और ये चुनाव मैदान सरहद से लगे जिलों, आदिवासी इलाकों, चाय बागानों और औद्योगिक क्षेत्रों तक फैला हुआ है.

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3. पहले फेज की महत्वपूर्ण सीटों की बात करें, तो सिलीगुड़ी, दार्जिलिंग, कलिम्पोंग, उत्तर कूच बिहार, दक्षिण कूच बिहार, रायगंज, इस्लामपुर, बालूरघाट, मालदा और मुर्शिदाबाद की कई सीटें हैं. साथ ही, आसनसोल, बांकुड़ा, पुरुलिया और बहरामपुर जैसी अहम सीटें भी शामिल हैं.

4. चर्चित सीटों में नंदीग्राम में वोटिंग भी पहले चरण में ही होने वाली है. नंदीग्राम पिछले साल तो सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण सीट बन गई थी. क्योंकि 2021 के बंगाल विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बीजेपी के शुभेंदु अधिकारी के साथ दो दो हाथ कर रही थीं. दोनों में मुकाबला तो इस बार भी हो रहा है, लेकिन भवानीपुर में. शुभेंदु अधिकारी नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों जगहों से चुनाव लड़ रहे हैं. इसी तरह बहरामपुर में कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी, खड़गपुर सदर में बीजेपी नेता दिलीप घोष और दोमकल सीट पर आम जनता उन्नयन पार्टी के नेता हुमायूं कबीर की किस्मत का फैसला भी पहले फेज में ही होना है. 

5. सीमा से लगी हुई सीटें भी खास मायने रखती हैं, क्योंकि वहां सीमा से जुड़े मुद्दे महत्वपूर्ण हो जाते हैं. ऐसी सीटों में सिलीगुड़ी, दार्जिलिंग, कलिम्पोंग, कूच बिहार, मालदा, मुर्शिदाबाद, बांकुड़ा, पुरुलिया और झाड़ग्राम के नाम लिए जा सकते हैं. 

11 फीसदी महिला उम्मीदवार भी मैदान में

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1. ADR यानी एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पहले चरण में 23 फीसदी उम्मीदवारों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामलों की घोषणा की है, जिनमें 20 फीसदी उम्मीदवारों पर संगीन इल्जाम हैं. ऐसे 1,475 उम्मीदवारों में से 345 पर आपराधिक मामले दर्ज हैं. ऐसे उम्मीदवारों पर महिलाओं के खिलाफ अपराध, हत्या और हत्या की कोशिश के मामले चल रहे हैं.  

2. पहले फेज की 66 विधानसभा क्षेत्रों को ‘रेड अलर्ट’ सीट घोषित किया गया है. रेड अलर्ट उन सीटों को घोषित किया गया है, जहां 3 या उससे ज्यादा उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले हैं.

3. पहले चरण में महिलाओं की हिस्सेदारी 11 फीसदी है. पहले फेज में 167 महिला उम्मीदवार चुनाव मैदान में होंगी. 

4. करीब 21 उम्मीदवार करोड़पति हैं, जिनकी औसत संपत्ति 1.34 करोड़ रुपये है. कुछ उम्मीदवारों ने 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति घोषित की है, जबकि कुछ ऐसे भी हैं जिनके पास संपत्ति के नाम पर 1,000 रुपये से भी कम है.

5. करीब 37 उम्मीदवारों ने अपनी देनदारियां भी घोषित की हैं. कई उम्मीदवारों पर 25 करोड़ रुपये से ज्यादा का लोन है. 

6. शिक्षा की बात करें, तो लगभग आधे उम्मीदवार 12वीं तक पढ़े हैं. हां, 47 फीसदी उम्मीदवार ग्रेजुएट या उससे ज्यादा पढ़े लिखे हैं.

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7. ज्यादातर उम्मीदवार 41 से 60 साल की उम्र वर्ग में हैं. 

कितने उम्मीदवार, कितने वोटर

पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के लिए पहले चरण का मतदान राज्य में अपना दबदबा कायम रखने की लड़ाई है. ममता बनर्जी को अपनी स्ट्रीट फाइटर वाली इमेज और जन कल्याणकारी योजनाओं के साथ साथ मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे इलाकों के मुस्लिम वोट बैंक पर भरोसा है. चुनौतियां भी हैं. सत्ता विरोधी माहौल और पार्टी की अंदरूनी खींचतान तो अलग ही मुसीबत है.

बीजेपी का फोकस उत्तर बंगाल, जंगल महल और सीमा से लगे जिलों की सीटों पर है. सिलीगुड़ी, दिनहाटा, रायगंज और बालूरघाट जैसी सीटों पर बीजेपी का खास जोर है. कोशिश है कि पहले फेज में टीएमसी को पछाड़ दे तो दूसरे फेज में राह थोड़ी आसान हो जाएगी. मालदा और मुर्शिदाबाद के साथ साथ कुछ शहरी इलाकों से कांग्रेस और लेफ्ट फ्रंट को भी काफी उम्मीदें हैं. 

चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अब तक तीन करोड़ सात लाख 77 हजार 171 वोटर पहले चरण में मतदान के योग्य हैं. मतदाताओं में एक करोड़ 84 लाख 99 हजार 496 पुरुष, एक करोड़ 75 लाख 77 हजार 210 महिला हैं, और 400 किन्‍नर वोटर हैं.

पहले चरण की वोटिंग को देखते हुए पश्चिम बंगाल के सभी मतदान केंद्रों पर वेबकास्टिंग व्यवस्था का ट्रायल रन शुरू हो चुका है. वेबकास्टिंग का काम पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी के कार्यालय से संचालित हो रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय सुरक्षा बल, पश्चिम बंगाल पुलिस और चुनाव आयोग के प्रतिनिधि सुनिश्चित करेंगे कि बूथों से लाइव स्ट्रीमिंग बिना किसी रुकावट के हो. 

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बंगाल की जिन सीटों पर पहले चरण में चुनाव होना है 'शाम 6 बजे से सुबह 6 बजे के बीच' बाइक या स्कूटर चलाने की अनुमति नहीं होगी. चुनाव आयोग के आदेश के मुताबिक, यह पाबंदी लागू हो गई है, और मतदान के दिन 23 अप्रैल तक जारी रहेगी. पाबंदी से सिर्फ मेडिकल इमरजेंसी या पारिवारिक समारोह जैसे जरूरी कामों के लिए ही छूट मिलेगी, लेकिन उसके लिए भी स्थानीय पुलिस से लिखित अनुमति लेना जरूरी है.

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