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विराट जी, कुछ तो बोलो, मुंह तो खोलो!

विराट कोहली सिर्फ एक शानदार क्रिकेटर से बढ़कर बहुत कुछ हैं. वो एक बड़ी युवा खेप के हीरो हैं, लोग उन्हें मानते हैं पूजते भी हैं. अगर वही मैदान पर कुछ ऐसा करेंगे, जो खेल मर्यादा से कोसो दूर होगा तो फिर उसका असर उनके फैन्स पर भी पड़ेगा. जब अनुष्का को भला-बुरा कहा गया, तब हर किसी ने विराट का साथ दिया क्यूंकि वही सही था. लेकिन किसी दूसरे क्रिकेटर की पत्नी को कुछ कहा जा रहा है तब विराट की चुप्पी चुभती है.

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विराट कोहली की चुप्पी चुभती है.
विराट कोहली की चुप्पी चुभती है.

जब खेल के मैदान की जंग किसी खिलाड़ी के घर और बच्चों तक पहुंच जाए, तो समझ जाना चाहिए कि हमारा समाज मुश्किल दौर से गुज़र रहा है. मैदान पर दो खिलाड़ी भिड़ते हैं, रन बनाने की होड़ होती है, विकेट का आक्रामक जश्न होता है ये खेल का रोमांच का हिस्सा है. लेकिन मैच खत्म होते ही जब भारत के तथाकथित 'कीबोर्ड वॉरियर्स' अपनी उंगलियों से नफरत का तेजाब उगलने सोशल मीडिया पर उतरते हैं, तो सबसे पहला शिकार खिलाड़ियों का बेकसूर परिवार बनता है.

आईपीएल 2026 में विराट कोहली और ट्रेविस हेड के बीच की तनातनी ने एक बार फिर हमारी सामूहिक संवेदनशीलता को तार-तार कर दिया. सवाल यह है कि इस पूरी लड़ाई में ट्रेविस हेड की पत्नी जेसिका हेड या उनके बच्चे की क्या गलती थी? उनका कसूर सिर्फ इतना था कि वे उस इंसान से प्यार करती हैं जिसने मैदान पर भारत के सबसे बड़े क्रिकेट आइकन को आंखें दिखा दीं? किसी महिला के इंस्टाग्राम पर जाकर उसकी मर्यादा को तार-तार करना, बच्चे को लेकर घिनौनी बातें लिखना- ये नायक की भक्ति नहीं, बल्कि सड़ी हुई मर्दानगी और कुंठा का सबसे वीभत्स रूप है.

इन फैन्स को और भी बढ़ावा तब मिलता है, जब उनका नायक अपने गुस्से (पढ़ें ईगो) में सामने वाले खिलाड़ी से हाथ नहीं मिलाता है. ये कोई बड़ी बात नहीं है, हाथ मिलाना या नहीं मिलाना विराट कोहली की मर्ज़ी है, लेकिन फिर खेल भावना और आइडल जैसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए. क्यूंकि जब नायक ही किसी तरह की खेल भावना को नहीं मानता है, फिर फैन्स पर कौन-सा ही नियम लागू होता है.

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वैसे यह पहली बार नहीं है जब ट्रैविस हेड के परिवार को इस दौर से गुजरना पड़ा हो. साल 2023 के वनडे वर्ल्ड कप फाइनल की वह रात कोई नहीं भूल सकता, जब हेड ने अहमदाबाद में शानदार शतक जड़कर करोड़ों भारतीयों का दिल तोड़ा था. उस रात जहां हेड अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी कामयाबी का जश्न मना रहे होंगे, वहीं दूसरी तरफ उनकी पत्नी का सोशल मीडिया अकाउंट भारतीय फैंस की गालियों, बलात्कार की धमकियों और नफरत से पटा हुआ था. सोचिए, उस महिला पर क्या गुजरी होगी जो अपने पति की कामयाबी पर मुस्कुराने से भी डरने लगी हो?

गहरा दर्द इस बात का है कि विराट कोहली के नाम पर यह कथित गुंडागर्दी बार-बार दोहराई जाती है. जब महेंद्र सिंह धोनी की बेटी जीवा को सोशल मीडिया पर धमकियां दी गईं, जब मोहम्मद शमी को उनकी धार्मिक पहचान के लिए निशाना बनाया गया, तब पूरा देश सिहर उठा था. खुद कोहली ने उस वक्त शमी के समर्थन में खड़े होकर मर्यादा की मिसाल पेश की थी. यहां तक कि जब खुद कोहली के खराब फॉर्म के दौरान उनकी नौ महीने की बेटी वामिका को ऑनलाइन निशाना बनाया गया, तब कानून को दखल देना पड़ा था. लेकिन आज कितनी बड़ी विडंबना है कि जो दर्द कभी कोहली और अनुष्का शर्मा ने झेला था, आज वही दर्द कोहली के ही फैंस किसी दूसरे खिलाड़ी के परिवार को दे रहे हैं. और इस बार, अपने इन 'अंधभक्तों' की बदतमीजी पर विराट कोहली की चुप्पी चुभने वाली है. 

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यह सिर्फ क्रिकेट तक सीमित नहीं है, यह भारतीय उपमहाद्वीप की उस 'हीरो-वर्शिप' की पैदाइश है, जहां हम इंसानों को भगवान बना देते हैं. सिनेमा में रजनीकांत, विजय या अजित के फैंस एक-दूसरे का खून बहाने को तैयार रहते हैं. राजनीति में तो यह अंधभक्ति इस कदर हावी है कि लोग अपने पसंदीदा नेता की आलोचना सुनने के बजाय अपने सगे भाइयों से रिश्ता तोड़ लेते हैं. हम एक ऐसा समाज बन चुके हैं जो अपने नायक को हर गलती से परे, एक मसीहा मानता है, और उसके विरोध में खड़े हर शख्स को अपना परम शत्रु.

साइकोलॉजिकल और साइबर एक्सपर्ट्स की रिपोर्ट्स लगातार चेतावनी दे रही हैं कि सोशल मीडिया पर मिलने वाली गुमनामी ने इन ट्रोल्स को एक ऐसा सुरक्षा कवच दे दिया है जो अदृश्य है. भारत में ऑनलाइन हैरेसमेंट और साइबर बुलिंग की दरें दुनिया में सबसे खतरनाक स्तर पर हैं. यह एक ऐसी डिजिटल भीड़ है जिसका अपना कोई दिमाग नहीं होता, यह सिर्फ अपने नायक के एक इशारे या मैदान की एक घटना से हिंसक हो उठती है. दिक्कत वहां ज्यादा हो जाती है, जब हमारे बड़े-बड़े सेलिब्रिटी इन हरकतों पर मौन साध लेते हैं, तो इस भीड़ का हौसला और बढ़ जाता है. उन्हें लगता है कि उनकी यह बदतमीजी उनके 'भगवान' को डिफेंड करने का एक पवित्र जरिया है, और नायक की खामोशी उनकी इस नीचता पर अनकही स्वीकृति की मुहर है.

क्रिकेट को 'जेंटलमैन गेम' कहना अब एक भद्दा मजाक लगता है. किताबों में पढ़ते थे कि ये खेल हमें हार को शालीनता से स्वीकार करना और विरोधी का सम्मान करना सिखाता है. लेकिन आज इंटरनेट पर बैठे इन तथाकथित फैंस ने इसे एक ऐसा अखाड़ा बना दिया है जहां मर्यादाओं की बलि दी जाती है. क्या विराट कोहली या भारतीय क्रिकेट के इन बड़े दिग्गजों की यह नैतिक जिम्मेदारी नहीं बनती कि वे कैमरे के सामने आएं और साफ शब्दों में कहें—'अगर तुम मेरी आड़ में किसी महिला या बच्चे को गाली देते हो, तो तुम मेरे फैन कहलाने के लायक नहीं हो'?

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सवाल है कि अगर इन सुपरस्टार्स ने अपने प्रशंसकों की इस मानसिकता की क्लास नहीं लगाई, तो खेल सिर्फ मैदान तक सीमित नहीं रहेगा. यह नफरत हमारे घरों तक आएगी. हमें यह समझना ही होगा कि मैदान की जंग को मैदान पर ही दफन करना होगा. 

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