तमिलनाडु चुनाव के नतीजे आने से पहले ही डीएमके के चुनाव कैंपेन में एमके स्टालिन को विनर के रूप में प्रोजेक्ट किया जाने लगा है. तमिलनाडु में 23 अप्रैल को विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होंगे, 4 मई को बाकी राज्यों के साथ ही वोटों की गिनती होगी और नतीजे आएंगे.
विधानसभा चुनाव के आखिरी दौर में डीएमके ने अपने चुनाव कैंपेन की रणनीति फिर बदल डाली है. ऐसा दूसरी बार हुआ है. पहले डीएमके का चुनाव कैंपेन क्षेत्रवाद बनाम राष्ट्रवाद, भाषा और विकास जैसे मुद्दों पर चल रहा था. फिर महिला आरक्षण संशोधन बिल के साथ परिसीमन विधेयक लाए जाने के विरोध पर जा टिका. लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन बिल के गिर जाने के बाद अब मुहिम नई दिशा में चल पड़ी है.
डीएमके का चुनाव कैंपेन अब 'द्रविड़ गौरव' पर फोकस देखा जा रहा है. डोर टू डोर कैंपेन में बीजेपी की केंद्र सरकार के परिसीमन प्रस्ताव के गिर जाने डीएमके को जीत बताते हुए, जनता को यह समझाने की कोशिश हो रही है कि सिर्फ एमके स्टालिन ही तमिलनाडु पर मंडरा रहे खतरे से वहां के लोगों को बचा सकते हैं.
क्या डीएमके के भाग्य से छींका टूटा?
लोकसभा में परिसीमन विधेयक लाए जाने से पहले डीएमके कार्यकर्ताओं को संबोधित करने के बाद एमके स्टालिन ने कहा था, 'हमारे सिर पर लटकी तलवार, अब हम पर आ गिरी है.'
और, जब लोकसभा में परिसीमन का प्रस्ताव गिर गया, तो एमके स्टालिन ने परिसीमन बिल की कॉपी जलाने वाली तस्वीर शेयर करते हुए X पर लिखा, तमिलनाडु ने दिल्ली को शिकस्त दे डाली! 23 अप्रैल को हम दिल्ली के अहंकार को हराएंगे, और मिलकर उस अहंकार का साथ देने वालों को भी.
संसद में परिसीमन विधेयक पेश किए जाने के पहले तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने प्रस्तावित परिसीमन विधेयक की कॉपी जलाकर अपना विरोध जता दिया था. डीएमके नेता स्टालिन ने विरोधस्वरूप काला झंडा भी फहराया था. विरोध प्रदर्शन के दौरान स्टालिन और डीएमके समर्थक काले कपड़े पहने हुए थे.
परिसीमन के मुद्दे पर स्टालिन पहले ही अपना स्टैंड साफ कर दिया था. स्टालिन का कहना था कि देश को एक बार फिर 1950 और 1960 के दशक वाली डीएमके का रंग देखना पड़ सकता है, जब डीएमके ने तमिलनाडु के लोगों के अधिकारों और कथित तौर पर हिंदी थोपे जाने के खिलाफ कई आंदोलन चलाए थे.
साथ ही, डीएमके कार्यकर्ताओं ने 'तमिल गौरव' की लड़ाई छेड़ दी थी. बीजेपी की केंद्र सरकार के खिलाफ स्टालिन का मैसेज डीएमके कार्यकर्ताओं तक पहुंचाया जा रहा था, और उसे आगे बढ़ाते रहने को कहा गया था. वही कैंपेन अब तमिल अस्मिता की लड़ाई को आगे बढ़ाते हुए 'द्रविड़ गौरव' अभियान के रूप में घर-घर पहुंचाया जा रहा है. अभियान के तहत स्टालिन की जीत के पर्चे भी बांटे जा रहे हैं.
डीएमके के चुनाव कैंपेन में बिल पास न हो पाने को केंद्र सरकार की हार के तौर पर पेश किया जा रहा है, जिसे 'तमिल अस्मिता' और 'द्रविड़ गौरव' की बड़ी जीत के रूप में प्रचारित किया जा रहा है.
1. डीएमके 'तमिल अस्मिता' को भी वैसे ही पेश कर रही है, जैसे बीजेपी चुनावों में गुजरात अस्मिता की बात करती है और 'द्रविड़ गौरव' मुहिम गांव-गांव तक पहुंचाने की हर संभव कोशिश हो रही है.
2. डीएमके के कैंपेन में तमिलनाडु बनाम दिल्ली की लड़ाई में 'तमिल अस्मिता' की जीत के रूप में दिखाने की कोशिश है. कैंपेन में दिल्ली के अहंकार पर 'तमिल अस्मिता' की जीत का जोर देकर जिक्र हो रहा है. और, इस तरह डीएमके के 200 से ज्यादा सीटें जीतने का दावा किया जा रहा है. तमिलनाडु में विधानसभा की 234 सीटें हैं.
3. स्टालिन की जीत के पर्चे बांटे जा रहे हैं, जिसमें काले कपड़े पहन कर डीएमके नेता का काला झंडा फहराना, और बिल की कॉपी जलाना और उसके असर को चुनाव प्रचार के दौरान समझाने का प्रयास चल रहा है.
महिला आरक्षण संशोधन बिल के साथ परिसीमन विधेयक लाए जाने की बीजेपी की अपनी रणनीति थी. पहले से ही बीजेपी के बिल पास कराने के इरादे पर शक जताया जा रहा था, हुआ भी वही. लोकसभा में बिल के गिर जाने को विपक्ष अपनी जीत बता रहा है, बीजेपी विपक्ष को कठघरे में खड़ा करने के लिए बड़े पैमाने पर कैंपेन चलाने जा रही है.
डीएमके स्टालिन को मसीहा के रूप में पेश कर रही है
महिला बिल को लेकर विपक्ष के खिलाफ बीजेपी के कैंपेन की शुरुआत तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्र के नाम संदेश के साथ ही शुरू हो गई थी. मोदी ने कोयंबटूर की सभा और राष्ट्र के नाम संबोधन में भी डीएमके को निशाने पर लिया. बिल के विरोध और परिवारवाद की राजनीति के नाम पर भी घेरा.
बाकी जगह तो बीजेपी हमलावर है, लेकिन तमिलनाडु में डैमेज कंट्रोल की कोशिश हो रही है. यह बात तो AIADMK नेता ईके पलानीस्वामी की तरफ से भी समझाने की कोशिश हो रही थी कि अमित शाह ने भरोसा दिया है, तमिलनाडु के साथ कोई भेदभाव नहीं होगा. और, बीजेपी के साथ चुनावी गठबंधन में होने के नाते AIADMK भी संसद की विशेष बैठक में लाए जाने वाले बिलों के समर्थन की घोषणा की थी. तमिलनाडु बीजेपी के नेता अब भी लोगों को यही समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि परिसीमन से तमिल लोगों को किसी तरह का नुकसान नहीं होने वाला था.
राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे से मिले सपोर्ट के लिए स्टालिन आभार जता रहे हैं. स्टालिन ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ अपनी तस्वीर शेयर की है, और उनके भाषण का हवाला दिया है. मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा था, स्टालिन कोई अकेले व्यक्ति नहीं हैं, बल्कि पूरा भारत उनके साथ खड़ा है. स्टालिन ने खड़गे नाम से पहले सम्माननीय और राहुल गांधी को भाई कह कर संबोधित किया है.
तमिलनाडु के लोगों से स्टालिन कहते हैं, एनडीए एक विध्वंसकारी ताकत है, जो राज्यों के अधिकारों, क्षेत्रीय दलों और हमारी विशिष्ट पहचान को मिटा देना चाहता है... हम 200 से ज्यादा सीटें जीतेंगे... हम तमिलनाडु पर मंडरा रहे खतरे से अपने लोगों की रक्षा करेंगे.