शरद पवार अपने छह दशक के राजनीतिक करियर में सबसे मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं, और ढाई दशक पुरानी उनकी बनाई हुई पार्टी की चुनौतियां भी वैसी ही हैं. 1999 में बनी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, अब शरद पवार के हिस्से में एनसीपी (एसपी) के रूप में ही बची है.
महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम रहे अजित पवार की हवाई हादसे में मौत के बाद मुश्किलें और भी बढ़ गई हैं, जिसके कारण एनसीपी के दोनों गुटों का विलय भी खटाई में पड़ गया है. यह विलय इसी महीने होना तय बताया जा रहा था, लेकिन अजित पवार की जगह डिप्टी सीएम बनी सुनेत्रा पवार अब नई राजनीतिक जरूरतों के हिसाब से फैसले ले रही हैं.
मुद्दे की बात ये है कि विपक्षी गठबंधन महाविकास आघाड़ी मिलकर भी चाहे तो राज्यसभा किसी एक को ही भेज सकता है - और वह एक सीट शरद पवार के हिस्से नहीं आ पाई, तो राज्यसभा में एनसीपी-एसपी का कोई भी नुमाइंदा नहीं होगा.
1. राज्यसभा में NCP-SP के दोनों सांसद रिटायर हो रहे हैं
राज्यसभा में महाराष्ट्र से 19 सदस्यों का कोटा है, जिनमें से 7 सदस्य 2 अप्रैल को रिटायर हो रहे हैं. रिटायर होने वालों में शरद पवार भी शुमार हैं. शरद पवार के अलावा महाराष्ट्र से राज्यसभा सदस्य प्रियंका चतुर्वेदी, फौजिया खान, रामदास अठावले, भागवत कराड, रजनी पाटिल और धैर्यशील पाटिल का कार्यकाल भी खत्म हो रहा है.
लोकसभा में तो एनसीपी-एसपी के 8 सदस्य हैं भी, लेकिन राज्यसभा में उनका खाता जीरो बैलेंस के करीब पहुंच चुका है. शरद पवार और फौजिया खान दोनों के ही राज्यसभा का कार्यकाल अप्रैल में खत्म हो रहा है, जिसके लिए राज्यसभा का चुनाव 16 मार्च को होने जा रहा है. नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 5 मार्च है.
2. एक तरफ शरद पवार की सेहत, दूसरी तरफ मजबूरी
शरद पवार को महाराष्ट्र में पुणे के अस्पताल से छुट्टी तो मिल गई है, लेकिन सेहत पहले की तरह साथ नहीं दे रहा है. 85 साल के शरद पवार कैंसर सर्वाइवर भी हैं, और अपने आत्मविश्वास के बल पर ही राजनीति में सक्रिय बने हुए हैं.
अब सवाल है कि क्या शरद पवार फिर से राज्यसभा जाना चाहेंगे?
सवाल का जवाब सुप्रिया सुले के ताजा बयान से समझने की कोशिश की जा सकती है. बारामती सांसद सुप्रिया सुले का कहना है, हमारे साथियों और ऑफिस वालों की यही इच्छा है कि शरद पवार साहब राज्यसभा जाएं... सबको लगता है कि पवार साहब ने साठ साल से लोगों के लिए जो काम किया है, उसे जारी रखना चाहिए.
शरद पवार का हवाला देते हुए सुप्रिया सुले ने कहा है कि हमें सारे मतभेद भुलाकर देश की भलाई के लिए काम करना चाहिए. शरद पवार लोकसभा के लिए सात बार, राज्यसभा के लिए दो बार और महाराष्ट्र विधानसभा के लिए पांच बार चुने गए हैं.
3. एमवीए के भीतर क्यों है कलह?
मुश्किल यह है कि महाविकास आघाड़ी के भीतर कोई भी सहयोगी दल ऐसी स्थिति में नहीं है कि वो अकेले दम पर अपने उम्मीदवार को राज्यसभा भेज सके - और सभी मिलकर भी चाहें तो एक ही उम्मीदवार की जीत पक्की हो सकती है.
राज्यसभा चुनाव में एक सीट जीतने के लिए प्रथम वरीयत के 37 वोटों की जरूरत है. विपक्षी गठबंधन महाविकास आघाड़ी के पास कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी (एसपी) सभी को मिलाकर कुल 46 वोट ही हैं.
MVA की बात करें तो महाराष्ट्र विधानसभा में सबसे ज्यादा उद्धव ठाकरे के पास ही नंबर है. और, शरद पवार के पास सबसे कम विधायक हैं.
जब एक ही उम्मीदवार की जीत संभव है, तो वो किसी पार्टी का होगा? दावेदारी तो सभी की बनती है. 20 विधायक वाले उद्धव ठाकरे की भी, और 10 विधायकों वाले शरद पवार की भी. कांग्रेस के पास 16 विधायक हैं, और वह सहयोगियों की मददगार के रूप में सामने आ रही है. फिलहाल तो ऐसा ही समझा जा रहा है.
4. किस सूरत में NCP-SP की बात मानी जाएगी?
सुप्रिया सुले ने अपना दावा तो पेश कर दिया है, लेकिन उद्धव ठाकरे और कांग्रेस उनकी बात मान भी लें, उसके लिए सहमति बनानी होगी.
वस्तुस्थिति यह है कि शरद पवार और फौजिया खान के बाद राज्यसभा में एनसीपी का कोई भी प्रतिनिधि नहीं बचेगा. लेकिन, बाकी दोनों सहयोगी दलों का मामला थोड़ा अलग है.
वैसे तो उद्धव ठाकरे की शिवसेना से प्रियंका चतुर्वेदी और कांग्रेस की रजनी पाटिल का भी कार्यकाल खत्म हो रहा है, लेकिन उसके बावजूद राज्यसभा में उनके प्रतिनिधि बने हुए हैं. संजय राउत का कार्यकाल 4 जुलाई, 2028 तक है. कांग्रेस के इमरान प्रतापगढ़ी भी जुलाई, 2028 तक सदस्य बने रहेंगे, जबकि कांग्रेस के पास एक सीट 2030 तक रहेगी.
ऐसे में एनसीपी-एसपी के पास दावेदारी के लिए कम से कम दो बातें हैं. एक बात यह कि सहयोगी मदद करें, तो एनसीपी-एसपी को भी राज्यसभा में बने रहने का मौका मिलेगा - और दूसरा, आम सहमति बन जाए तो शरद पवार भी राज्यसभा सदस्य बने रहेंगे.
5. यदि एमवीए को शरद पवार और उद्धव में से किसी एक को चुनना पड़ा तो?
एक सवाल यह भी उठ रहा है कि अगर शरद पवार राज्यसभा नहीं जाते हैं, तो क्या उद्धव ठाकरे एमवीए के उम्मीदवार होंगे?
शरद पवार का कद तो बड़ा है, लेकिन उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर सहयोगी में संशय बना हुआ है. चाहे उद्धव ठाकरे हों, या कांग्रेस एनसीपी के दोनों गुटों के मिलने से तो नहीं, लेकिन उनके मिलकर एनडीए में चले जाने की आशंका से दिक्कत होना तो स्वाभाविक ही है.
उद्धव ठाकरे और कांग्रेस नेतृत्व के मन में अगर शरद पवार के आगे चलकर साथ छोड़ देने की आशंका भारी पड़ी तो वे शरद पवार के समर्थन से कदम पीछे भी खींच सकते हैं?
मुश्किल बस इतनी ही नहीं है, अगर सबकुछ समय रहते मैनेज नहीं हुआ तो राज्यसभा चुनावों में क्रॉस-वोटिंग का खतरा तो रहता ही है.